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घाघरा नदी की धारा में गायघाट दक्षिणी के छह घर समाएं
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घाघरा नदी की धारा में गायघाट दक्षिणी के छह घर समाएं
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- कई घर नदी की कटान की जद में आ गए है
- घर छोड़ कर रिश्तेदारों ,बाढ़ शरणालय और बांध पर जिंदगी बिता रहे लोग
- भविष्य को लेकर चिंतित है बाढ़ पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो
धनघटा/संतकबीरनगर। एमबीडी बांध और घाघरा के बीच में बसे 38 गांव प्रभावित है,लेकिन गायघाट दक्षिणी को नदी निशाना बना ली है। अब तक छह लोगों के घरों को नदी अपने धारा में विलीन कर चुकी है। जबकि कई घर कटान की जद में है। कटान होता देख कर गांव के लोग सहम गए है। लोग अपने घरों को खाली करके बांध पर खुले आसमान तले रहने को विवश है।
गायघाट दक्षिणी गांव में पिछले तीन दिनों से नदी कटान कर रही। गांव के किनारे स्थित पेड़ को काटने के बाद नदी सतई निषाद, राधेश्याम यादव , कंसो, भोला, रामनरेश और तीरथ के मकान को अपनी धारा में समाहित कर चुकी है। गांव के अन्य कई घरों की तरफ तेजी के साथ कटान करती हुई नदी आगे बढ़ रही है। गांव के लोग कटान रोकने का उपाय करने की मांग करके थक चुके है। इसके बाद अपनी जान बचाकर घर से पलायन करके एमबीडी बांध और तिघरा विद्यालय पर 15 दिन से शरण लिए हुए है। गांव वाले बताते है कि मकान नदी की धारा में विलीन हो रहे है और रहने खाने का कही पर ठिकाना नही है। इस तरह कब तक जिंदगी बीतेगी समझ से परे है। बाढ़ पीडि़तों का कहना है कि नदी जब दूरी पर कटान कर रही थी तो प्रशासन के लोग यहां पर जरुर आया करते थे, लेकिन जब से गांव में घुसकर घर को अपनी धारा में मिला रही है, तब से कोई भी अधिकारी कर्मचारी यहां आने का नाम नही ले रहा है। गांव निवासी एवं बीडीसी सदस्य बालेंद्र , रामअधीन, झीनक, फूलमती, गायत्री , सुभद्रा आदि का कहना है कि बंधे के उतर तरफ बसने के लिए कही पर जमीन नही है। गांव के 300 लोगो का मकान खतरे में है। सभी लोग घर छोड़कर रिश्तेदारों के वहां तथा इधर- उधर रह रहे है। कही पर बसाने की बात नही की जा रही है। गांव वालों ने बताया कि अब लग रहा है कि बांध के दक्षिणी नही रह मिलेगा। खेती के साथ मकान भी चला गया। कैसे जिंदगी बितेगी, यही सोच कर आंखो से आंसू निकल रहे है। एसडीएम नवीन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गायघाट दक्षिणी गांव को पहले ही खाली कराया जा चुका है। वहां के लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था बाढ़ शरणालय में की गई है। जिनके पास सुरक्षित जगह जमीन नही है, उनको बसने के लिए जमीन की व्यवस्था की जाएगी।
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