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शिक्षकों के नाम पर कॉलेजों का फर्जीवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 15 Mar 2016 02:49 AM IST
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सीसीएसयू
- फोटो : फाइल फोटो
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सीसीएसयू से संबद्ध सेल्फ फाइनेंस कॉलेज शिक्षकों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। मेरठ और सहारनपुर मंडल में 400 से अधिक कॉलेजों ने कई बार कहने के बावजूद अपने यहां तैनात शिक्षकों की जानकारी नहीं दी है।
ऑल इंडिया हायर एजूकेशन सर्वे के तहत मांगी गई जानकारी ऑनलाइन अपलोड नहीं की जा रही है। विवि सख्त हिदायत दे चुका है। अब ऐसे कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की शासन से संस्तुति की जा रही है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन और राज्य सरकार के सहयोग से ऑल इंडिया हायर एजूकेशन सर्वे हो रहा है। इसमें संस्थान की तमाम जानकारी मांगी गई है। जिनमें शिक्षकों और छात्रों की संख्या, इंफ्रास्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी। यह सब पोर्टल पर अपलोड करना है। विवि इस काम की गंभीरता और जागरूकता के लिए कई वर्कशॉप करा चुका है।
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लेकिन आधे कॉलेज अभी भी मनमर्जी चला रहे हैं। ये सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। सूत्रों के मुताबिक कॉलेजों ने पर्याप्त और योग्य फैकल्टी नहीं रखी है। कागजों में खेल किया है। एक फैकल्टी कई-कई जगह दिखा रखी है। इस वजह से डाटा ऑनलाइन नहीं कर रहे। जानकारी देते ही वह पकड़ में आ जाएंगे। विवि ऐसे कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की शासन से संस्तुति की कार्रवाई कर रहा है।
सत्र 2014-15 की स्थिति
620 कॉलेजों ने बनाई लॉगिन आईडी, रजिस्ट्रेशन कराया
410 कॉलेजों ने डाटा किया अपलोड
800 से अधिक हैं कॉलेज
सत्र 2015-16 की स्थिति
647 कॉलेजों बनाई लॉगिन आईडी, रजिस्ट्रेशन कराया
310 कॉलेजों ने किया डाटा अपलोड
824 हैं कॉलेज
कॉलेजों को डाटा अपलोड करने के लिए कई पत्र लिखे जा चुके हैं। जागरूकता आई है लेकिन अभी रफ्तार काफी कम है। एमएचआरडी, यूजीसी और राज्य सरकार की यह योजना है। हर हाल में डाटा अपलोड करना है। कॉलेज नहीं करेंगे तो उन्हें ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
- डॉ. एसएस गौरव, नोडल ऑफिसर, ऑल इंडिया हायर एजूकेशन सर्वे
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ऑल इंडिया हायर एजूकेशन सर्वे के तहत मांगी गई जानकारी ऑनलाइन अपलोड नहीं की जा रही है। विवि सख्त हिदायत दे चुका है। अब ऐसे कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की शासन से संस्तुति की जा रही है।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन और राज्य सरकार के सहयोग से ऑल इंडिया हायर एजूकेशन सर्वे हो रहा है। इसमें संस्थान की तमाम जानकारी मांगी गई है। जिनमें शिक्षकों और छात्रों की संख्या, इंफ्रास्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी। यह सब पोर्टल पर अपलोड करना है। विवि इस काम की गंभीरता और जागरूकता के लिए कई वर्कशॉप करा चुका है।
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लेकिन आधे कॉलेज अभी भी मनमर्जी चला रहे हैं। ये सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। सूत्रों के मुताबिक कॉलेजों ने पर्याप्त और योग्य फैकल्टी नहीं रखी है। कागजों में खेल किया है। एक फैकल्टी कई-कई जगह दिखा रखी है। इस वजह से डाटा ऑनलाइन नहीं कर रहे। जानकारी देते ही वह पकड़ में आ जाएंगे। विवि ऐसे कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की शासन से संस्तुति की कार्रवाई कर रहा है।
सत्र 2014-15 की स्थिति
620 कॉलेजों ने बनाई लॉगिन आईडी, रजिस्ट्रेशन कराया
410 कॉलेजों ने डाटा किया अपलोड
800 से अधिक हैं कॉलेज
सत्र 2015-16 की स्थिति
647 कॉलेजों बनाई लॉगिन आईडी, रजिस्ट्रेशन कराया
310 कॉलेजों ने किया डाटा अपलोड
824 हैं कॉलेज
कॉलेजों को डाटा अपलोड करने के लिए कई पत्र लिखे जा चुके हैं। जागरूकता आई है लेकिन अभी रफ्तार काफी कम है। एमएचआरडी, यूजीसी और राज्य सरकार की यह योजना है। हर हाल में डाटा अपलोड करना है। कॉलेज नहीं करेंगे तो उन्हें ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
- डॉ. एसएस गौरव, नोडल ऑफिसर, ऑल इंडिया हायर एजूकेशन सर्वे