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अद्भुत मिसाल: ताकि धुंधला न पड़े कृष्णकालीन रिश्ता
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 14 Mar 2016 11:52 PM IST
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बरसाना में होली
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‘प्रेम सरोवर प्रेम की भरी रहे दिन रैन, जहां प्रिय प्यारी पग धरैं तो कृष्ण धरों दोऊ नैन। इन पंक्तियों का भाव इजहार करता है कि बरसाना और वहां के निवासी कन्हैया को कितने प्यारे थे। उनके इसी प्यार की धरोहर को आज नंदगांव के सखा सहेजे हुए हैं। यहां के लोग पांच हजार साल पुरानी भगवान कृष्ण और राधा के बीच होली के मूल भाव को जीवंत बनाए रखने की अद्भुत मिसाल बन गए हैं।
राधा और कृष्ण के बीच के अद्वितीय संबंध के चलते आज भी नंदगांव और बरसाना कस्बों के निवासियों के मध्य वैवाहिक संबंध नहीं किए जाते हैं। इसके पीछे स्थानीय लोगों का भाव ये है कि कहीं नए रिश्तों के चक्कर में कृष्णकालीन रिश्ता धुंधला न पड़ जाए।
पांच हजार वर्ष पुराने इस संबंध क ी मर्यादाओं को आज भी यहां के लोग यथावत निभाते चले आ रहे हैं। राधाकृष्ण के पौराणिक रिश्ते को मानते हुए बरसाना के तमाम वयोवृद्ध आज भी राधारानी की ससुराल नंदगंाव की सीमा का पानी तक नहीं पीते। आज भी बरसाना में बेटी (राधा जी) की ससुराल नंदगांव से आए किसी भी व्यक्ति को धन, द्रव्य के साथ ससम्मान विदा किया जाता है।
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वही हुरियारे, वही हुरियारिन, प्रेम पगी लाठियां सहने के लिए वही ढाल। कुछ भी नहीं बदला है। नंदगांव बरसाना के निवासी एक-दूसरे के पूरक हैं। हास परिहास स्वरूप नंदगांव के लोग स्वयं को कृष्ण के सखा मानकर वृषभान के जमाई के रूप में बरसाना के लोगों से परिहास करते हों, लेकिन उनके इस परिहास के अंदर भी कृष्ण भक्ति की झलक दिखाई पड़ती है।
बरसाना के लाड़लीजी मंदिर से हर उत्सव पर परंपरागत रूप से निमंत्रण आता है। नंदगंाव निवासी भी राधाकृष्ण की उपस्थिति की अनुभूति करते हुए पारंपरिक वेशभूषा मेें गाते बजाते ठिठोली करते श्री जी महल पहुंचते हैं।
भले ही मथुरा को श्रीकृष्ण की जन्मस्थली, वृंदावन को युगल के माधुर्य पूर्ण रास विहार का गौरव प्राप्त हो, लेकिन नंदगांव और बरसाना को प्रिया-प्रियतम की अलौकिक बाल लीलाओं के स्थल के रूप में गौरव प्राप्त है। वास्तव में श्रीकृष्ण और राधा एक ही रस समुद्र के दो महान रत्न हैं। भक्तों को आनंद का रसास्वादन कराने के लिए ही दो देह धारण की हैं। इसी प्रकार बरसाना और नंदगांव दो अलग-अलग स्थान होते हुए भी एक-दूसरे के पूरक हैं।
हम बरसाने के लोग राधा को अपनी बेटी और नंदगांव के लोगों को मेहमान (दामाद) भाव से देखते हैं। इनके आगमन और विदाई पर उसी प्रकार का सम्मान दिया जाता है।
-श्याम लाल गोस्वामी, श्रीजी मंदिर नंदगांव के सेवायत
हजारों वर्षों बाद भी नंदगांव, बरसाना के लोग राधाकृष्ण के संबंधों को निभाते चले आ रहे हैं। कृष्णकालीन रिश्तों को लोग भूल न जाएं, इसलिए दोनों कस्बों के मध्य आज भी वैवाहिक संबंध नहीं होते।
- विजेंद्र गोस्वामी, नंदभवन के सेवायत
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राधा और कृष्ण के बीच के अद्वितीय संबंध के चलते आज भी नंदगांव और बरसाना कस्बों के निवासियों के मध्य वैवाहिक संबंध नहीं किए जाते हैं। इसके पीछे स्थानीय लोगों का भाव ये है कि कहीं नए रिश्तों के चक्कर में कृष्णकालीन रिश्ता धुंधला न पड़ जाए।
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पांच हजार वर्ष पुराने इस संबंध क ी मर्यादाओं को आज भी यहां के लोग यथावत निभाते चले आ रहे हैं। राधाकृष्ण के पौराणिक रिश्ते को मानते हुए बरसाना के तमाम वयोवृद्ध आज भी राधारानी की ससुराल नंदगंाव की सीमा का पानी तक नहीं पीते। आज भी बरसाना में बेटी (राधा जी) की ससुराल नंदगांव से आए किसी भी व्यक्ति को धन, द्रव्य के साथ ससम्मान विदा किया जाता है।
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वही हुरियारे, वही हुरियारिन, प्रेम पगी लाठियां सहने के लिए वही ढाल। कुछ भी नहीं बदला है। नंदगांव बरसाना के निवासी एक-दूसरे के पूरक हैं। हास परिहास स्वरूप नंदगांव के लोग स्वयं को कृष्ण के सखा मानकर वृषभान के जमाई के रूप में बरसाना के लोगों से परिहास करते हों, लेकिन उनके इस परिहास के अंदर भी कृष्ण भक्ति की झलक दिखाई पड़ती है।
बरसाना के लाड़लीजी मंदिर से हर उत्सव पर परंपरागत रूप से निमंत्रण आता है। नंदगंाव निवासी भी राधाकृष्ण की उपस्थिति की अनुभूति करते हुए पारंपरिक वेशभूषा मेें गाते बजाते ठिठोली करते श्री जी महल पहुंचते हैं।
भले ही मथुरा को श्रीकृष्ण की जन्मस्थली, वृंदावन को युगल के माधुर्य पूर्ण रास विहार का गौरव प्राप्त हो, लेकिन नंदगांव और बरसाना को प्रिया-प्रियतम की अलौकिक बाल लीलाओं के स्थल के रूप में गौरव प्राप्त है। वास्तव में श्रीकृष्ण और राधा एक ही रस समुद्र के दो महान रत्न हैं। भक्तों को आनंद का रसास्वादन कराने के लिए ही दो देह धारण की हैं। इसी प्रकार बरसाना और नंदगांव दो अलग-अलग स्थान होते हुए भी एक-दूसरे के पूरक हैं।
हम बरसाने के लोग राधा को अपनी बेटी और नंदगांव के लोगों को मेहमान (दामाद) भाव से देखते हैं। इनके आगमन और विदाई पर उसी प्रकार का सम्मान दिया जाता है।
-श्याम लाल गोस्वामी, श्रीजी मंदिर नंदगांव के सेवायत
हजारों वर्षों बाद भी नंदगांव, बरसाना के लोग राधाकृष्ण के संबंधों को निभाते चले आ रहे हैं। कृष्णकालीन रिश्तों को लोग भूल न जाएं, इसलिए दोनों कस्बों के मध्य आज भी वैवाहिक संबंध नहीं होते।
- विजेंद्र गोस्वामी, नंदभवन के सेवायत