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खपाटिया कुंज पर कब्जे की नीयत से हमला
अमर उजाला ब्यूरो वृंदावन
Updated Mon, 07 Mar 2016 11:19 PM IST
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खपाटिया कुंज पर हमला
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन के केशीघाट स्थित प्राचीन खपाटिया कुंज पर कब्जे के प्रयास में घुसे हथियारबंद लोगों ने युवतियों और महिलाओं के साथ मारपीट कर दी। उनके कपड़े फाड़ दिए। आरोप है कि 100 नंबर पर फोन करने के बाद भी काफी देर तक पुलिस नहीं पहुंची। शोर सुनकर पड़ोसी में से पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हमलावरों को बाहर खदेड़ दिया।
बता दें कि केशीघाट के समीप लगभग 200 साल पुरानी खपाटिया कुंज है। यहां भगवान राधाकृष्ण और रामजानकी के मंदिर हैं। मंदिर में सेवा पूजा मंहत जुगल किशोर करते आए हैं। एक अन्य पक्ष कुंज की संपत्ति को अपनी बताता है। इसका वाद न्यायालय में लंबित है।
बताया गया है कि सोमवार को सुबह करीब छह बजे 20-25 लोग हाथों में डंडा, सरिया, तमंचे लेकर कुंज में दाखिल हो गए। इनमें महिलाएं भी थीं। महंत जुगल किशोर के पुत्र मनमोहन शर्मा का आरोप है कि हमलावरों ने उनकी मां को धमकाते हुए कुंज खाली करने को कहा। विरोध करने पर उनकी मां और बहन के साथ मारपीट कर दी। मंदिर का दरवाजा बंद कर ताला लगा दिया।
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इस पर कुंज में मौजूद किराएदार राम विनोद भट्ट सहित कई लोग आ गए लेकिन हमलावरों की संख्या और हथियारों को देख बेबस रहे। पीड़ितों का कहना है कि 100 नंबर पर फोन करने के काफी देर तक पुलिस नहीं आई। कुंज के पास ही पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल का आवास है। शोर सुनकर उनके सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और हमलावरों को खदेड़ा।
मामले में मनमोहन शर्मा का कहना है कि दूसरे पक्ष ने एक महीने पहले उनके पिता जुगल किशोर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करा दिया था। रविवार को पिता और उनका छोटा भाई रामानुज शर्मा अपना पक्ष रखने कोतवाली गए तो पुलिस ने उन्हें ही जेल भेज दिया।
आरोप है कि पिता और भाई को जेल जाने के बाद दूसरे पक्ष ने कुंज पर कब्जे का प्रयास किया। पुलिस पर हमलावरों से मिलीभगत का आरोप है। वृंदावन कोतवाली प्रभारी का कहना है कि कुंज पर कब्जे का प्रयास झूठा है। सुबह फोन आने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची थी। वहां कोई नहीं था।
नहीं खुले मंदिर के पट
प्राचीन खपाटिया कुंज में स्थित मंदिर के पट सोमवार को नहीं खुले। सुबह हुए विवाद और सेवायत जुगल किशोर के जेल जाने के कारण ऐसा हुआ। इससे प्रतिदिन दर्शन और सेवा करने आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं को भारी ठेस पहुंची है।
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बता दें कि केशीघाट के समीप लगभग 200 साल पुरानी खपाटिया कुंज है। यहां भगवान राधाकृष्ण और रामजानकी के मंदिर हैं। मंदिर में सेवा पूजा मंहत जुगल किशोर करते आए हैं। एक अन्य पक्ष कुंज की संपत्ति को अपनी बताता है। इसका वाद न्यायालय में लंबित है।
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बताया गया है कि सोमवार को सुबह करीब छह बजे 20-25 लोग हाथों में डंडा, सरिया, तमंचे लेकर कुंज में दाखिल हो गए। इनमें महिलाएं भी थीं। महंत जुगल किशोर के पुत्र मनमोहन शर्मा का आरोप है कि हमलावरों ने उनकी मां को धमकाते हुए कुंज खाली करने को कहा। विरोध करने पर उनकी मां और बहन के साथ मारपीट कर दी। मंदिर का दरवाजा बंद कर ताला लगा दिया।
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इस पर कुंज में मौजूद किराएदार राम विनोद भट्ट सहित कई लोग आ गए लेकिन हमलावरों की संख्या और हथियारों को देख बेबस रहे। पीड़ितों का कहना है कि 100 नंबर पर फोन करने के काफी देर तक पुलिस नहीं आई। कुंज के पास ही पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल का आवास है। शोर सुनकर उनके सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और हमलावरों को खदेड़ा।
मामले में मनमोहन शर्मा का कहना है कि दूसरे पक्ष ने एक महीने पहले उनके पिता जुगल किशोर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करा दिया था। रविवार को पिता और उनका छोटा भाई रामानुज शर्मा अपना पक्ष रखने कोतवाली गए तो पुलिस ने उन्हें ही जेल भेज दिया।
आरोप है कि पिता और भाई को जेल जाने के बाद दूसरे पक्ष ने कुंज पर कब्जे का प्रयास किया। पुलिस पर हमलावरों से मिलीभगत का आरोप है। वृंदावन कोतवाली प्रभारी का कहना है कि कुंज पर कब्जे का प्रयास झूठा है। सुबह फोन आने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची थी। वहां कोई नहीं था।
नहीं खुले मंदिर के पट
प्राचीन खपाटिया कुंज में स्थित मंदिर के पट सोमवार को नहीं खुले। सुबह हुए विवाद और सेवायत जुगल किशोर के जेल जाने के कारण ऐसा हुआ। इससे प्रतिदिन दर्शन और सेवा करने आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं को भारी ठेस पहुंची है।