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‘अत्याचार बढ़ने पर अवतार लेते हैं प्रभु’
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sun, 13 Mar 2016 11:15 PM IST
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प्रवचन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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धरती पर जब-जब अत्याचार बढ़ते हैं। पापों से जनमानस कराहने लगता है गाय, गंगा, गीता की दुर्दशा होने लगती है तब पृथ्वी को भारमुक्त करने के लिए परमपिता परमेश्वर का धरा पर आगमन होता है। यह उद्गार ग्राम खिरिया पीपल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी आधार चैतन्य ने व्यक्त किए।
स्वामी आधार चैतन्य ने कहा कि कंस अपनी बहन देवकी को वसुदेव के साथ उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। उस समय आकाशवाणी होती है कि हे कंस! जिस बहन देवकी को तू बड़े प्यार से पहुंचाने जा रहा है उसके आठवें गर्भ से तेरा काल पैदा होगा। आकाशवाणी सुनने के बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को जेल में डाल दिया। यही नहीं पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर स्वयं मथुरा का राजा बन गया और अत्याचार करने लगा। कंस के अत्याचारों से पृथ्वी कराहने लगी। तब समस्त देवता एकत्रित होकर पृथ्वी को लेकर क्षीरसागर में भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान विष्णु ने देवताआें से कहा कि तुम सभी लोग बृज में जाकर गोपी और ग्वालों के रूप में अवतार लो। मैं कृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से जन्म लेकर पृथ्वी के भार को मुक्त करूंगा। इस प्रकार कंस की जेल मेें देवकी के गर्भ से आठवें बालक के रूप में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया और पृथ्वी को कंस के अत्याचार से भार मुक्त किया। परीक्षित तहसीलदार यादव व उनकी पत्नी वीरवती देवी और कथा आयोजक रामनरेश, बिजेंद्र सिंह यादव ने कथा व्यास स्वामी आधार चैतन्य व श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी। इस मौके पर आचार्य ओमपाल चैतन्य, अखिलेश शास्त्री, सर्वेश कुमार यादव ठेकेदार, रामप्रवेश, रामप्रताप, रामदुर्वेश, संतोष कुमार, उत्सव कुमार, ह्रदेश कुमार, राजकुमार, रामविलास, सतेंद्र सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
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स्वामी आधार चैतन्य ने कहा कि कंस अपनी बहन देवकी को वसुदेव के साथ उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। उस समय आकाशवाणी होती है कि हे कंस! जिस बहन देवकी को तू बड़े प्यार से पहुंचाने जा रहा है उसके आठवें गर्भ से तेरा काल पैदा होगा। आकाशवाणी सुनने के बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को जेल में डाल दिया। यही नहीं पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर स्वयं मथुरा का राजा बन गया और अत्याचार करने लगा। कंस के अत्याचारों से पृथ्वी कराहने लगी। तब समस्त देवता एकत्रित होकर पृथ्वी को लेकर क्षीरसागर में भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान विष्णु ने देवताआें से कहा कि तुम सभी लोग बृज में जाकर गोपी और ग्वालों के रूप में अवतार लो। मैं कृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से जन्म लेकर पृथ्वी के भार को मुक्त करूंगा। इस प्रकार कंस की जेल मेें देवकी के गर्भ से आठवें बालक के रूप में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया और पृथ्वी को कंस के अत्याचार से भार मुक्त किया। परीक्षित तहसीलदार यादव व उनकी पत्नी वीरवती देवी और कथा आयोजक रामनरेश, बिजेंद्र सिंह यादव ने कथा व्यास स्वामी आधार चैतन्य व श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी। इस मौके पर आचार्य ओमपाल चैतन्य, अखिलेश शास्त्री, सर्वेश कुमार यादव ठेकेदार, रामप्रवेश, रामप्रताप, रामदुर्वेश, संतोष कुमार, उत्सव कुमार, ह्रदेश कुमार, राजकुमार, रामविलास, सतेंद्र सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
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