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मानवता की मिसाल, लंगूर की तेरहवीं में पहुंचे कई गांवों के लोग
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:55 PM IST
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डेमो पिक
करंट की चपेट में आने से एक लंगूर बंदर की जान चली गई थी। लोगों ने बंदर की तेरहवीं विधि-विधान के साथ की, लंगूर की तेरहवीं में कई गांव के लोग पहुंचे।
कानपुर बिल्हौर के वछना गांव में 13 दिन पहले करंट की चपेट में आने से मरे लंगूर बंदर की मंगलवार को विधि-विधान के साथ गांव के स्वामी नारायण आश्रम में तेरहवी संस्कार किया गया। लंगूर की तेरहवी में आसपास के गांव के 200 ग्रामीणों ने भोज में हिस्सा लिया। पूड़ी, सब्जी और मिठाई खाने में परोसी गई। पहले मान्यों और कन्याओं का भी भोज कराया गया।
गांव के अमित द्विवेदी, जयप्रकाश अवस्थी ने बताया कि गांव में पहले बंदरों का आतंक था। आश्रम में पले लंगूर की वजह से बंदर गांव में नहीं आते थे। किसी ग्रामीण को शिकार भी नहीं बनाते थे। गांव के हर घर से लंगूर का आना जाना था। इस लिए लोगों का उससे भावनात्मक जुड़ाव हो गया था। इस लिए उसकी आत्मा की शांति के लिए भोज में आयोजन किया गया। इसमें धर्मेंद्र, पप्पू, रामपाल आदि ने सहयोग किया।
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कानपुर बिल्हौर के वछना गांव में 13 दिन पहले करंट की चपेट में आने से मरे लंगूर बंदर की मंगलवार को विधि-विधान के साथ गांव के स्वामी नारायण आश्रम में तेरहवी संस्कार किया गया। लंगूर की तेरहवी में आसपास के गांव के 200 ग्रामीणों ने भोज में हिस्सा लिया। पूड़ी, सब्जी और मिठाई खाने में परोसी गई। पहले मान्यों और कन्याओं का भी भोज कराया गया।
गांव के अमित द्विवेदी, जयप्रकाश अवस्थी ने बताया कि गांव में पहले बंदरों का आतंक था। आश्रम में पले लंगूर की वजह से बंदर गांव में नहीं आते थे। किसी ग्रामीण को शिकार भी नहीं बनाते थे। गांव के हर घर से लंगूर का आना जाना था। इस लिए लोगों का उससे भावनात्मक जुड़ाव हो गया था। इस लिए उसकी आत्मा की शांति के लिए भोज में आयोजन किया गया। इसमें धर्मेंद्र, पप्पू, रामपाल आदि ने सहयोग किया।
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