मारपीट के आरोपियों को छुड़ाने थाने पहुंचे मंत्री पुत्र

अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 14 Mar 2016 01:25 AM IST
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एसओ के साथ चर्चा करते मंत्री पुत्र
एसओ के साथ चर्चा करते मंत्री पुत्र - फोटो : police

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ककवन थाना क्षेत्र के बिसधन कसबे में सपा नेता की दुकान में घुसकर लाठी-डंडों से मारपीट करने और दुकान का सामान सड़क पर फेंकने के आरोपियों को थाना पुलिस ने दबिश देकर शनिवार रात दबोचा, लेकिन रविवार दोपहर पुलिस के सामने अजीब स्थित बन आई जब श्रम संविदा बोर्ड के दर्जा प्राप्त मंत्री पुत्र थाने आ पहुंचे और पकड़े गए आरोपियों को छोड़ने का दबाव पुलिस पर डालने लगे।
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लेकिन, सक्रिय होती पुलिस को देख मंत्री पुत्र मौके से चले गए। विसधन कसबे में 19 फरवरी को ओम नारायण गुप्ता उर्फ बिन्नू पुत्र राधाकृष्ण गुप्ता जो क्षेत्र में स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री अरुणा कोरी के विधानसभा प्रतिनिधि भी हैं। इन पर मुनौव्वरपुर गांव के कुछ लोगों द्वारा लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया।
जिसके बाद बिन्नू गुप्ता ने प्रार्थनापत्र देकर मुनौव्वरपुर गांव निवासी अरविंद यादव पुत्र बालू लाल, श्रवण कुमार पुत्र नथ्थू, मोहित पुत्र अरविंद, रामलला पुत्र सुरेश और कई साथियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। तब से पुलिस लगातार सभी नामजद आरोपियों की तलाश कर रही थी। शनिवार रात मिली सूचना के आधार पर थाना पुलिस ने अरविंद यादव पुत्र बाबूराम और रामलला पुत्र सुरेश को दबोचा था।
तब से लगातार कई बड़े नेताओं का दबाव थाना पुलिस पर था, लेकिन रविवार दोपहर करीब एक बजे श्रम संविदा बोर्ड के दर्जा प्राप्त मंत्री जगदेव सिंह यादव के पुत्र यादवेंद्र यादव उर्फ दीपू हूटर लगी कार और अपने निजी सुरक्षा गार्ड के साथ थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से तत्काल अरविंद और रामलला को छुड़ाने का दबाव बनाने लगे।

विवाद बढ़ता देख थाना पुलिस द्वारा पुलिस क्षेत्राधिकारी को पूरी जानकारी दी गई, जिसके बाद आनन-फानन में शिवराजपुर थाना और बिल्हौर कोतवाली पुलिस को वायरलेस पर अलर्ट जारी किया गया। सूत्रों की मानें तो एसओ दिनेश पांडेय ने कानूनी दांव पेंच अड़चन और उक्त आरोपियों की रवानगी सहित आसपास थानों से पुलिस आने की जानकारी देने में मंत्री पुत्र का गुस्सा शांत हो सका। इसी दौरान थाने में विवाद की सूचना पर बड़ी संख्या में लोगों को आता देख मंत्री पुत्र थाने से चले गए।

एसओ दिनेश पांडेय ने बताया कि थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर आरोपियों को पकड़ा गया था, इसके बाद रविवार सुबह ही उनकी कोर्ट के लिए रवानगी कर दी गई, एसओ के अनुसार मंत्री पुत्र आरोपियों को छुड़वाने के लिए दबाव बना रहे थे। वहीं यादवेंद्र यादव उर्फ दीपू का कहना है कि वह थानाध्यक्ष ककवन से सामान्य तौर पर मुलाकात करने गए थे, उन्होंने किसी की पैरवी नहीं की।

 
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