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किसानों के प्रति बैंक असंवेदनशील
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
Updated Tue, 08 Mar 2016 01:21 AM IST
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Bank, farmers, jhansi news
- फोटो : demo pic
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झांसी। कुदरत की मार से बेजार हो चुके जिले के किसानों के साथ बैंकों का रवैया भी असंवेदनशील है। स्थिति का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बीमा कंपनी द्वारा खराब फसल का क्लेम बैंकों को दिए जाने के महीनों बाद भी तमाम किसान इससे वंचित हैं।
किसानों पर लगातार कुदरत की मार पड़ रही है। रबी-2015 को अतिवृष्टि व ओलावृष्टि चट कर दी गई थी, तो इसके बाद खरीफ को सूखा खा गया। इस रबी सीजन में भी पानी की कमी से फसलों की हालत खस्ता है। आए दिन किसान मौत को गले लगा रहे हैं। किसान अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता व बीमा कंपनी द्वारा दिए जाने वाले खराब फसलों के क्लेम पर निर्भर हैं।
यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा तीन माह पूर्व रबी-2015 का 48 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम उपलब्ध कराया गया था। जबकि, एक महीने पहले खरीफ-2015 का 42.61 करोड़ रुपये क्लेम दिया गया है। कंपनी द्वारा यह धनराशि बैंकों को शाखावार उपलब्ध कराई गई है। बैंकों को यह राशि अपने खातेदार किसानों को देनी है। लेकिन, तमाम किसान उक्त राशि से वंचित हैं। जबकि, इस स्थिति पर अंकुश को पिछले माह उप जिलाधिकारी द्वारा बैठक आयोजित कर बैंकों को शत प्रतिशत धनराशि किसानों को उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए थे।
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बावजूद, स्थिति में कोई खास अंतर नहीं आया है। किसान नेता गौरीशंकुर बिदुआ के अनुसार तमाम किसानों को महीनों बाद भी बीमा क्लेम नहीं मिला है। जबकि, बीमा कंपनी द्वारा उनके हिस्से की धनराशि बैंकों में भेजी जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक बीमा क्लेम की धनराशि उपयोग में लेते हैं। ज्यादा सख्ती होने पर यह किसानों के खाते में दी जाती है।
‘किसानों के साथ यह रवैया बेहद असंतोषजनक है। बैंकों से किसानों के खाते में भेजी गई बीमा राशि की रिपोर्ट ली जाएगी। हीलाहवाली पर कार्रवाई होगी।’
- उमेश नारायण पांडेय, एडीएम
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किसानों पर लगातार कुदरत की मार पड़ रही है। रबी-2015 को अतिवृष्टि व ओलावृष्टि चट कर दी गई थी, तो इसके बाद खरीफ को सूखा खा गया। इस रबी सीजन में भी पानी की कमी से फसलों की हालत खस्ता है। आए दिन किसान मौत को गले लगा रहे हैं। किसान अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता व बीमा कंपनी द्वारा दिए जाने वाले खराब फसलों के क्लेम पर निर्भर हैं।
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यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा तीन माह पूर्व रबी-2015 का 48 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम उपलब्ध कराया गया था। जबकि, एक महीने पहले खरीफ-2015 का 42.61 करोड़ रुपये क्लेम दिया गया है। कंपनी द्वारा यह धनराशि बैंकों को शाखावार उपलब्ध कराई गई है। बैंकों को यह राशि अपने खातेदार किसानों को देनी है। लेकिन, तमाम किसान उक्त राशि से वंचित हैं। जबकि, इस स्थिति पर अंकुश को पिछले माह उप जिलाधिकारी द्वारा बैठक आयोजित कर बैंकों को शत प्रतिशत धनराशि किसानों को उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए थे।
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बावजूद, स्थिति में कोई खास अंतर नहीं आया है। किसान नेता गौरीशंकुर बिदुआ के अनुसार तमाम किसानों को महीनों बाद भी बीमा क्लेम नहीं मिला है। जबकि, बीमा कंपनी द्वारा उनके हिस्से की धनराशि बैंकों में भेजी जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक बीमा क्लेम की धनराशि उपयोग में लेते हैं। ज्यादा सख्ती होने पर यह किसानों के खाते में दी जाती है।
‘किसानों के साथ यह रवैया बेहद असंतोषजनक है। बैंकों से किसानों के खाते में भेजी गई बीमा राशि की रिपोर्ट ली जाएगी। हीलाहवाली पर कार्रवाई होगी।’
- उमेश नारायण पांडेय, एडीएम