भ्रम की समाप्ति ही ब्रह्म की प्राप्ति: सुखदेव
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श्री महराज ने कहा कि चौरासी लाख योनियो में भटकने के बाद यह मानव शरीर मिला हुआ हैं। यदि यह तन पाकर भी मानव अपना उद्धार नहीं कर पाता तो पुर्न उसे लाखों वर्ष भटकने के बाद ही मानव शरीर मिलेगा। उन्होंने कहा कि मानव अपनी शरीर की सुन्दरता, सफलता और संपत्तियो पर गुमान करता फिरता है। यह जानते हुए भी कि इसकी कीमत बस आखिरी सांस तक है।
इसके बाद मिट्टी का यह पुतला उसी में मिल जाना है। तब भी मानव अपनी हवस के चलते झूठी सान बनाने में भागता फिर रहा हैं। संसार में एक मात्र संत महात्माओं ने अज्ञान रुपी अंधकार को भगाने और ज्ञान रुपी प्रकाश से जागृति फैलाने का कार्य किया हैं और करते चले आ रहें है। जिनके पद चिर्ह्नो पर चल कर मानव आसानी से मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। इस मौके पर कृष्णा प्रसाद, डा. आरपी सिंह, तेजबहादुर, जयराम पाल, शंकर, दयाल, प्रमीला, शीला, अमित सोनी, सदगुरु सोनी, ओमकार, शिवशंकर आदि मौजूद रहे। शंकर सेठ ने सभी के प्रति आभार जताया।