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तीन घंटे देरी से शुरू हुआ अल्ट्रासाउंड
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 12 Mar 2016 10:11 PM IST
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तीन घंटे देरी से शुरू हुआ अल्ट्रासाउंड छह बजे से लाइन में लगी थीं महिलाएं एक ही डॉक्टर की है तैनाती, छुट्टी पर जाने से हुई परेशानी अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। महिला अस्पताल में शनिवार को तीन घंटे देरी से अल्ट्रासाउंड शुरू हुआ हुआ जिसकी वजह से सुबह से लाइन में लगीं मरीजों को परेशान होना पड़ा। तमाम महिलाओं को बिना जांच ही लौटा दिया गया। दरअसल, अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट के पिता का निधन होने की वजह से वह छुट्टी पर चले गए थे। उनकी जगह जिला अस्पताल में अटैच डॉ. आरडी चौधरी को महिला अस्पताल जाना था जो देरी से पहुंचे थे। जिले में प्रसव संबंधी अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था सिर्फ महिला अस्पताल में ही है। सुबह आठ से दो बजे तक अल्ट्रासाउंड होने की वजह से सुबह छह बजे से ही नंबर लगने लगता है। एक दिन में 50 ही अल्ट्रासाउंड होता है। अस्पताल में तैनात डॉ. एके झा छुट्टी पर थे और उनकी जगह जिला अस्पताल में अटैच रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आरडी चौधरी को अल्ट्रासाउंड करने जाना था, लेकिन वह तीन घंटे लेट से पहुंचे। लेट होने से लाइन में लगी मरीजों को न सिर्फ परेशान होना पड़ा बल्कि तमाम महिलाओं को बिना जांच के ही लौटना पड़ा। कुछ महिलाएं प्राइवेट पैथोलॉजी चली गईं तो कई दूसरे दिन जांच की उम्मीद लेकर लौटी हैं। कोट- अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर आए थे और मरीजों की जांच हुई है। महिलाओें को लौटाए जाने की जानकारी मुझे नहीं है, यह गंभीर बात है। यदि मुझे गलत सूचना दी गई है तो उसकी जांच की जाएगी। डॉ. नीना त्रिपाठी, एसआईसी, महिला अस्पताल
- फोटो : shivharsh
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महिला अस्पताल में शनिवार को तीन घंटे देरी से अल्ट्रासाउंड शुरू हुआ हुआ जिसकी वजह से सुबह से लाइन में लगीं मरीजों को परेशान होना पड़ा। तमाम महिलाओं को बिना जांच ही लौटा दिया गया। दरअसल, अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट के पिता का निधन होने की वजह से वह छुट्टी पर चले गए थे। उनकी जगह जिला अस्पताल में अटैच डॉ. आरडी चौधरी को महिला अस्पताल जाना था जो देरी से पहुंचे थे।
जिले में प्रसव संबंधी अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था सिर्फ महिला अस्पताल में ही है। सुबह आठ से दो बजे तक अल्ट्रासाउंड होने की वजह से सुबह छह बजे से ही नंबर लगने लगता है। एक दिन में 50 ही अल्ट्रासाउंड होता है। अस्पताल में तैनात डॉ. एके झा छुट्टी पर थे और उनकी जगह जिला अस्पताल में अटैच रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आरडी चौधरी को अल्ट्रासाउंड करने जाना था, लेकिन वह तीन घंटे लेट से पहुंचे। लेट होने से लाइन में लगी मरीजों को न सिर्फ परेशान होना पड़ा बल्कि तमाम महिलाओं को बिना जांच के ही लौटना पड़ा। कुछ महिलाएं प्राइवेट पैथोलॉजी चली गईं तो कई दूसरे दिन जांच की उम्मीद लेकर लौटी हैं।
अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर आए थे और मरीजों की जांच हुई है। महिलाओें को लौटाए जाने की जानकारी मुझे नहीं है, यह गंभीर बात है। यदि मुझे गलत सूचना दी गई है तो उसकी जांच की जाएगी।
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- डॉ. नीना त्रिपाठी, एसआईसी, महिला अस्पताल
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जिले में प्रसव संबंधी अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था सिर्फ महिला अस्पताल में ही है। सुबह आठ से दो बजे तक अल्ट्रासाउंड होने की वजह से सुबह छह बजे से ही नंबर लगने लगता है। एक दिन में 50 ही अल्ट्रासाउंड होता है। अस्पताल में तैनात डॉ. एके झा छुट्टी पर थे और उनकी जगह जिला अस्पताल में अटैच रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आरडी चौधरी को अल्ट्रासाउंड करने जाना था, लेकिन वह तीन घंटे लेट से पहुंचे। लेट होने से लाइन में लगी मरीजों को न सिर्फ परेशान होना पड़ा बल्कि तमाम महिलाओं को बिना जांच के ही लौटना पड़ा। कुछ महिलाएं प्राइवेट पैथोलॉजी चली गईं तो कई दूसरे दिन जांच की उम्मीद लेकर लौटी हैं।
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अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर आए थे और मरीजों की जांच हुई है। महिलाओें को लौटाए जाने की जानकारी मुझे नहीं है, यह गंभीर बात है। यदि मुझे गलत सूचना दी गई है तो उसकी जांच की जाएगी।
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