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एमसीआई टीम ने कॉलेज प्रशासन को फिर गिनाई खामियां
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 12 Mar 2016 01:58 AM IST
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+एमबीबीएस के 100 सीटों का मानक देखने पहुंची एमसीआई टीम
- फोटो : amar ujala
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एमबीबीएस की 100 सीटों के मानक की तस्दीक करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की तीन सदस्यीय टीम शुक्रवार को एक बार फिर मेडिकल कॉलेज पहुंची। टीम ने उन खामियों के दुरुस्तगी की पड़ताल की, जिन्हें उसने पिछले 28 अक्टूबर के मुआयने पर गिनाया था। पड़ताल के दौरान गुणवत्ता को लेकर टीम के सवालों से कॉलेज प्रशासन सकते में आ गया।
पिछले दौरे के बाद एमबीबीएस की 50 सीटों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश कर चुकी एमसीआई की टीम जब शुक्रवार सुबह अचानक कॉलेज पहुंची तो अफरा-तफरी मच गई। आमतौर पर सोमवार को आने वाली टीम को शुक्रवार को देखकर कॉलेज प्रशासन परेशान हो गया। टीम ने पहले प्राचार्य और विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। उसके बाद दो सदस्यों ने अस्पताल के मुआयने की कमान संभाली, जबकि एक ने शिक्षकों के रिकॉर्ड खंगाले। मुआयने में ट्रॉमा सेंटर में कई खामियां मिलीं।
मरीजों के रिकार्ड के अधूरे होने पर सवाल उठा तो ब्लड बैंक में ब्लड के स्टॉक के सवाल पर कॉलेज प्रशासन परेशान हो गया।। मेडिसिन विभाग में इको कॉर्डियोग्रॉफी मशीन का पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन न होने की जानकारी पर टीम की भौहें तन गईं और कहा कि ये तो गलत है। सीटी स्कैन का इंतजाम न होने पर रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष ने उसे जल्द शुरू होने का आश्वासन देते हुए रकम की मंजूरी की बात बताई। एमआरआई मशीन के कागजात भी कॉलेज प्रशासन ने टीम को सौंपे।
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एमसीआई की टीम ने सभी विभागों की ओपीडी, ओटी और पर्ची काउंटर का गहन निरीक्षण किया। शाम होते ही डॉक्टरों के डाक्यूमेंट जांचने का सिलसिला शुरू हुआ। विभागवार डॉक्टरों ने अपने-अपने डाक्यूमेंट चेक कराए। यह कार्य देर शाम तक होता रहा।
एनाटमी के डॉ. एम पाटिल थे समन्वयक
मानक की पड़ताल को आई टीम के समन्वयक अकोला मेडिकल कॉलेज के प्रो. एम. पाटिल थे। टीम के अन्य सदस्यों में अहमदाबाद मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. दीपेंद्र चंद्र पटेल और गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी विभाग के प्रो. डीसी दत्त शामिल थे।
बिजली गुल हुई तो अंधेरे में हुआ मुआयना
एमसीआई के मुआयने के दौरान मेडिकल कॉलेज की बिजली का करीब चार घंटे तक गुल रहना चर्चा का विषय बना रहा। दोपहर दो बजे जब बिजली गुल हुई तो कॉलेज के कई कमरों में अंधेरा छा गया। इन कमरों में जेनरेटर से सप्लाई की व्यवस्था न होने पर टीम अंधेरे में ही मुआयना करती रही। बिजली न आने तक कॉलेज प्रशासन के माथे पर इसे लेकर परेशानी साफ देखी गई कि यदि रात होने तक यही स्थिति रही तो क्या होगा?
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पिछले दौरे के बाद एमबीबीएस की 50 सीटों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश कर चुकी एमसीआई की टीम जब शुक्रवार सुबह अचानक कॉलेज पहुंची तो अफरा-तफरी मच गई। आमतौर पर सोमवार को आने वाली टीम को शुक्रवार को देखकर कॉलेज प्रशासन परेशान हो गया। टीम ने पहले प्राचार्य और विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। उसके बाद दो सदस्यों ने अस्पताल के मुआयने की कमान संभाली, जबकि एक ने शिक्षकों के रिकॉर्ड खंगाले। मुआयने में ट्रॉमा सेंटर में कई खामियां मिलीं।
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मरीजों के रिकार्ड के अधूरे होने पर सवाल उठा तो ब्लड बैंक में ब्लड के स्टॉक के सवाल पर कॉलेज प्रशासन परेशान हो गया।। मेडिसिन विभाग में इको कॉर्डियोग्रॉफी मशीन का पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन न होने की जानकारी पर टीम की भौहें तन गईं और कहा कि ये तो गलत है। सीटी स्कैन का इंतजाम न होने पर रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष ने उसे जल्द शुरू होने का आश्वासन देते हुए रकम की मंजूरी की बात बताई। एमआरआई मशीन के कागजात भी कॉलेज प्रशासन ने टीम को सौंपे।
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एमसीआई की टीम ने सभी विभागों की ओपीडी, ओटी और पर्ची काउंटर का गहन निरीक्षण किया। शाम होते ही डॉक्टरों के डाक्यूमेंट जांचने का सिलसिला शुरू हुआ। विभागवार डॉक्टरों ने अपने-अपने डाक्यूमेंट चेक कराए। यह कार्य देर शाम तक होता रहा।
एनाटमी के डॉ. एम पाटिल थे समन्वयक
मानक की पड़ताल को आई टीम के समन्वयक अकोला मेडिकल कॉलेज के प्रो. एम. पाटिल थे। टीम के अन्य सदस्यों में अहमदाबाद मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. दीपेंद्र चंद्र पटेल और गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी विभाग के प्रो. डीसी दत्त शामिल थे।
बिजली गुल हुई तो अंधेरे में हुआ मुआयना
एमसीआई के मुआयने के दौरान मेडिकल कॉलेज की बिजली का करीब चार घंटे तक गुल रहना चर्चा का विषय बना रहा। दोपहर दो बजे जब बिजली गुल हुई तो कॉलेज के कई कमरों में अंधेरा छा गया। इन कमरों में जेनरेटर से सप्लाई की व्यवस्था न होने पर टीम अंधेरे में ही मुआयना करती रही। बिजली न आने तक कॉलेज प्रशासन के माथे पर इसे लेकर परेशानी साफ देखी गई कि यदि रात होने तक यही स्थिति रही तो क्या होगा?