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जानलेवा हमले के दोषी को 10 साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Wed, 09 Mar 2016 11:57 PM IST
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अदालत
- फोटो : अमर उजाला
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ककोड़ थाना क्षेत्र में तीन साल पहले रंजिशन गोली मारने के आरोपी को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र कुमार जौहरी ने सुनाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रवींद्र कुमार शर्मा ने बताया कि 14 सितंबर 2013 को ओमवीर पुत्र अमर सिंह निवासी गांव भौरा थाना ककोड़ ने एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें बताया था कि उसकी मां लीला देवी जंगल जा रही थी।
तभी गांव के महेश ने रंजिशन डंडे से हमला कर दिया। जब इसकी शिकायत करने भाई नरेश व चचेरा भाई ऋषिपाल आरोपी महेश के पास गए तो महेश ने गाली-गलौंच कर ऋषिपाल के सिर में तमंचे की बट से हमला कर दिया, जिससे ऋषिपाल लहूलुहान हो गए।
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नरेश ने बीच बचाव करना चाहा तो महेश ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से गोली मार दी। नरेश मौके पर गिर गया। इसके बाद महेश फरार हो गया। परिजनों ने नरेश को अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की तरफ से 12 गवाह पेश किए गए। नरेश और ऋषिपाल बहस के दौरान पक्षद्रोही हो गए। लेकिन न्यायाधीश ने ऋषिपाल के मुख्य बयान व परिस्थिति व साक्ष्य के आधार पर आरोपी महेश पुत्र ओमीपाल को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रवींद्र कुमार शर्मा ने बताया कि 14 सितंबर 2013 को ओमवीर पुत्र अमर सिंह निवासी गांव भौरा थाना ककोड़ ने एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें बताया था कि उसकी मां लीला देवी जंगल जा रही थी।
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तभी गांव के महेश ने रंजिशन डंडे से हमला कर दिया। जब इसकी शिकायत करने भाई नरेश व चचेरा भाई ऋषिपाल आरोपी महेश के पास गए तो महेश ने गाली-गलौंच कर ऋषिपाल के सिर में तमंचे की बट से हमला कर दिया, जिससे ऋषिपाल लहूलुहान हो गए।
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नरेश ने बीच बचाव करना चाहा तो महेश ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से गोली मार दी। नरेश मौके पर गिर गया। इसके बाद महेश फरार हो गया। परिजनों ने नरेश को अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की तरफ से 12 गवाह पेश किए गए। नरेश और ऋषिपाल बहस के दौरान पक्षद्रोही हो गए। लेकिन न्यायाधीश ने ऋषिपाल के मुख्य बयान व परिस्थिति व साक्ष्य के आधार पर आरोपी महेश पुत्र ओमीपाल को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।