300 बच्चों की नहीं बुझ पा रही है प्यास
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प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शासन-प्रशासन नित नए कदम उठा रहे हैं, लेकिन स्थिति में बदलाव होता नजर नहीं आ रहा है। करीब डेढ़ दशक से चल रहे सर्व शिक्षा अभियान का दावा सीमावर्ती स्कूलों में पहुंचकर खत्म हो जा रहा है। स्कूलों में हैंडपंप, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो सकी हैं।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोदमा में पढ़ रहे करीब 150 बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए एक किमी का सफर तय कर गांव में जाना पड़ता है। पानी की किल्लत को देखते हुए कुछ बच्चे तो घर से ही पानी बोतल में भरकर लाते हैं। शौचालय टूटा होने से खुले में बच्चों को शौच करना पड़ता है। हैरत की बात यह है कि प्राथमिक विद्यालय गोदमा में 2012 से मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा है। प्रधानाध्यापक अमर बहादुर यादव ने बताया कि संकुल के माध्यम से अधिकारियोें को अवगत कराया गया है, लेकिन कई माह बाद भी स्थिति बेहतर नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में बर्तन चोरी होने के बाद कुछ माह तक एमडीएम बनाने में दिक्कत हुई। उच्चाधिकारियों के मौखिक आदेश पर पूर्व माध्यमिक स्कूल में एमडीएम बनाया जा रहा है। कमोबेश यही स्थिति प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय हरिहरपुर में भी है। यहां पढ़ रहे 150 बच्चों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।