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लोगों की चेतावनी से बैकफुट पर अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
Updated Mon, 14 Mar 2016 01:30 AM IST
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बड़ौत के बिजरौल गांव में अवैध निर्माण को ध्वस्त करती जेसीबी मशीन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजरौल गांव में 31 परिवारों द्वारा दी गई आत्मदाह की चेतावनी से पुलिस-प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। एसडीएम और सीओ ने पुलिस फोर्स के साथ गांव में पहुंचकर हाईकोर्ट के आदेश पर खानापूर्ति कर दीवारें तोड़ डाली। जब एक मकान को ध्वस्त किया गया तो इसका विरोध किया गया, लेकिन पुलिस बल के सामने किसी की नहीं चली।
गांव में खसरा नंबर 643 पर तालाब है। उस तालाब की भूमि पर वर्षों से 31 परिवारों ने घर बनाए हुए हैं। इस संबंध में गांव के सहर्ष पुत्र कालू राम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। 23 जून 2015 को हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को कोर्ट की अवमानना करने के नोटिस दिए थे और कहा था कि अभी तक इन मकानों को ध्वस्त क्यों नहीं कराया गया।
इस पर ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में फिर से याचिका दायर की थी लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर फरवरी 2016 में मकानों को ध्वस्त कर तालाब की खुदाई कराने के आदेश दिए थे। इस पर प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए थे और उन्होंने नोटिस जारी कर 31 परिवारों को मकान खाली करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन्होंने खाली नहीं किए।
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प्रशासन की चेतावनी के बाद 31 परिवारों ने चेतावनी दी थी कि यदि उनके मकान ध्वस्त कराए गए तो वे सामूहिक आत्मदाह कर लेंगे। इस चेतावनी के बाद पुलिस-प्रशासन बैकफुट पर आ गया।
रविवार को एसडीएम यशवर्धन श्रीवास्तव, सीओ सीपी सिंह, रमाला थाने का पुलिस बल, महिला पुलिस एवं पीएसी के साथ बिजरौल गांव पहुंचे और उन्होंने जेसीबी से कुछ दीवारें तोड़ डाली। इसी दौरान राजकुमार का मकान ध्वस्त किए जाने पर उसने हंगामा किया और कहा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है।
उनका मकान तोड़ दिया गया, जबकि अन्य मकानों को नहीं तोड़ा गया। अब वह इस मामले को लेकर कोर्ट में जाएंगे। इसके बाद अधिकारी पुलिस बल के साथ गांव से चले आए। एसडीएम ने बताया कि गैर रिहायसी मकानों को तोड़ा गया है।
जिनके मकान हैं, उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है और जो गरीब लोग हैं उनके लिए ग्राम सभा से अन्य जगह दिलवाई जाएगी। इस मामले में हाई कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
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गांव में खसरा नंबर 643 पर तालाब है। उस तालाब की भूमि पर वर्षों से 31 परिवारों ने घर बनाए हुए हैं। इस संबंध में गांव के सहर्ष पुत्र कालू राम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। 23 जून 2015 को हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को कोर्ट की अवमानना करने के नोटिस दिए थे और कहा था कि अभी तक इन मकानों को ध्वस्त क्यों नहीं कराया गया।
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इस पर ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में फिर से याचिका दायर की थी लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर फरवरी 2016 में मकानों को ध्वस्त कर तालाब की खुदाई कराने के आदेश दिए थे। इस पर प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए थे और उन्होंने नोटिस जारी कर 31 परिवारों को मकान खाली करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन्होंने खाली नहीं किए।
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प्रशासन की चेतावनी के बाद 31 परिवारों ने चेतावनी दी थी कि यदि उनके मकान ध्वस्त कराए गए तो वे सामूहिक आत्मदाह कर लेंगे। इस चेतावनी के बाद पुलिस-प्रशासन बैकफुट पर आ गया।
रविवार को एसडीएम यशवर्धन श्रीवास्तव, सीओ सीपी सिंह, रमाला थाने का पुलिस बल, महिला पुलिस एवं पीएसी के साथ बिजरौल गांव पहुंचे और उन्होंने जेसीबी से कुछ दीवारें तोड़ डाली। इसी दौरान राजकुमार का मकान ध्वस्त किए जाने पर उसने हंगामा किया और कहा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है।
उनका मकान तोड़ दिया गया, जबकि अन्य मकानों को नहीं तोड़ा गया। अब वह इस मामले को लेकर कोर्ट में जाएंगे। इसके बाद अधिकारी पुलिस बल के साथ गांव से चले आए। एसडीएम ने बताया कि गैर रिहायसी मकानों को तोड़ा गया है।
जिनके मकान हैं, उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है और जो गरीब लोग हैं उनके लिए ग्राम सभा से अन्य जगह दिलवाई जाएगी। इस मामले में हाई कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।