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आर्थिक आधार पर होना चाहिए आरक्षण : सिन्हा
ब्यूराे/अमर उजाला,अलीगढ़
Updated Sun, 13 Mar 2016 01:41 AM IST
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पत्रकारों से वार्ता करते आरके सिन्हा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराे
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भाजपा के राज्यसभा सदस्य और प्रमुख उद्योगपति आरके सिन्हा का मानना है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने कायस्थ महासभा द्वारा शुरू किए गए संगत-पंगत अभियान की जानकारी दी। सिन्हा ने सेना के जवानों को लेकर कन्हैया के बयान को राष्ट्र का अपमान बताया और इसे लेकर कांग्रेस सहित कई दलों के नेताओं को आड़े हाथों लिया। वह महासभा की युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज सक्सेना के निवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दलितों को आरक्षण की व्यवस्था दस साल के लिए की गई थी। उसके बाद यह समय बढ़ता चला गया। बाद में 1993 में पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण दे दिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर हो।
उन्होेंने कहा कि कन्हैया की जमानत में कपिल सिब्बल जैसे लोगोें ने पैरवी की। यही वही लोग हैं, जिन्होेंने अफजल गुरू को बचाने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि कन्हैया की पैरवी में 23 लाख रुपये की रोजाना की पैरवी का खर्चा आखिर कहां से आ रहा है, जबकि उसकी मां केवल एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री है।
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कायस्थ महासभा के संगत-पंगत कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कायस्थ समाज शत प्रतिशत साक्षर और शिक्षित है। इसके बाद भी समाज के काफी युवक बेरोजगार हैं। समाज में दहेज प्रथा प्रचलित है।
समाज के काफी लोग आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मेडिकल सहायता न मिलने से गंभीर बीमारी से जूझते हैं और फिर मौत के समझौता कर लेते हैं। उन्होेंने कहा कि समाज का एक सक्षम व्यक्ति एक अक्षम परिवार का हाथ थाम ले तो समाज में काफी समस्याएं दूर हो सकती हैं। सिन्हा ने कहा कि संगत-पंगत अभियान का मूल मकसद यही है।
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उन्होंने कायस्थ महासभा द्वारा शुरू किए गए संगत-पंगत अभियान की जानकारी दी। सिन्हा ने सेना के जवानों को लेकर कन्हैया के बयान को राष्ट्र का अपमान बताया और इसे लेकर कांग्रेस सहित कई दलों के नेताओं को आड़े हाथों लिया। वह महासभा की युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज सक्सेना के निवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दलितों को आरक्षण की व्यवस्था दस साल के लिए की गई थी। उसके बाद यह समय बढ़ता चला गया। बाद में 1993 में पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण दे दिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर हो।
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उन्होेंने कहा कि कन्हैया की जमानत में कपिल सिब्बल जैसे लोगोें ने पैरवी की। यही वही लोग हैं, जिन्होेंने अफजल गुरू को बचाने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि कन्हैया की पैरवी में 23 लाख रुपये की रोजाना की पैरवी का खर्चा आखिर कहां से आ रहा है, जबकि उसकी मां केवल एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री है।
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कायस्थ महासभा के संगत-पंगत कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कायस्थ समाज शत प्रतिशत साक्षर और शिक्षित है। इसके बाद भी समाज के काफी युवक बेरोजगार हैं। समाज में दहेज प्रथा प्रचलित है।
समाज के काफी लोग आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मेडिकल सहायता न मिलने से गंभीर बीमारी से जूझते हैं और फिर मौत के समझौता कर लेते हैं। उन्होेंने कहा कि समाज का एक सक्षम व्यक्ति एक अक्षम परिवार का हाथ थाम ले तो समाज में काफी समस्याएं दूर हो सकती हैं। सिन्हा ने कहा कि संगत-पंगत अभियान का मूल मकसद यही है।