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चेकिंग के टाइम में हो गई किडनेपिंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Mar 2016 01:24 AM IST
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divya kidnapping
- फोटो : अमर उजाला आगरा
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रविवार को वारदात का खतरा ज्यादा रहता है? पुलिस को इसका पहले से पता है। कई घटनाएं छुट्टी के इस दिन हो चुकी हैं। शाम को छह से आठ बदमाश ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इसकी जानकारी अफसरों तक को है। इन तीन घंटों में भी कई बड़ी वारदात हुई हैं। इसीलिए चेकिंग का स्पेशल प्लान भी बनाया गया। सभी थाना प्रभारियों को निर्देश हैं कि शाम को छह से आठ सड़क पर रहें, लेकिन दिव्य के अपहरण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गश्त सिर्फ कागजों पर चल रही है। बच्चे को लेकर बदमाश आराम से निकल गए। यह भी साफ हो गया कि पुलिस के पास भागते बदमाशों को पकड़ने का प्लान नहीं है। जिस जगह घटना हुई है, वह शहर का पॉश इलाका है। यहां कई कोठियां हैं। देर तक बाजार खुलता है। प्रतीक वार्ष्णेय की कोठी रोड किनारे है। इसके बावजूद यहां से उनके बेटे का अपहरण कर लिया गया। इस रोड पर चेन लूट की कई घटनाएं हो चुकी हैं। तीन महीने पहले फल व्यापारी को चाकू मारा गया था। इसके बावजूद यहां गश्त का नाम नहीं था। घटना सात बजे हुई है। यह शहर में पुलिस की गश्त का समय है। छह से आठ के बीच और खास तौर पर रविवार को कई सराफ के साथ लूट हो चुकी है। कई की हत्या हो चुकी है। इसके बावजूद पुलिस गश्त में ढिलाई सामने आई है। बदमाश बच्चे को लेकर चले गए। सूचना तुरंत मिल जाने के बावजूद पुलिस नाकाबंदी करके बदमाशों को पकड़ नहीं पाई।
किस काम की क्राइम मैपिंग
पुलिस एक अप्रैल से वेब बेस्ड क्राइम मैपिंग शुरू करने जा रही है। इसका मकसद है पुरानी घटनाओं से सबक लेकर नई को रोकना। फार्मुला यह है कि अगर पुलिस को पता हो कि वारदात किस समय होती है, तो उस समय गश्त बढ़ाई जाए। इससे घटनाएं रुक जाएंगी। लेकिन दिव्य के अपहरण से तो यही लगता है कि पुलिस सबक लेने वाली नहीं। जिस समय पहले वारदात होती रही हैं, उसी समय यह घटना हुई है।
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किस काम की क्राइम मैपिंग
पुलिस एक अप्रैल से वेब बेस्ड क्राइम मैपिंग शुरू करने जा रही है। इसका मकसद है पुरानी घटनाओं से सबक लेकर नई को रोकना। फार्मुला यह है कि अगर पुलिस को पता हो कि वारदात किस समय होती है, तो उस समय गश्त बढ़ाई जाए। इससे घटनाएं रुक जाएंगी। लेकिन दिव्य के अपहरण से तो यही लगता है कि पुलिस सबक लेने वाली नहीं। जिस समय पहले वारदात होती रही हैं, उसी समय यह घटना हुई है।
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