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Hindi News ›   Sports ›   Vithya Ramraj: Truck Driver Father Borrowed Money for Shoes, Now She Has Three Asian Games Medals

ड्राइवर पिता ने उधार लेकर विद्या को दिलाए थे जूते: जापान में अब तक जीत चुकीं तीन पदक, इनमें एक स्वर्ण

Wed, 30 Sep 2026 08:49 AM IST
Hemant Rastogi हेमंत रस्तोगी
Updated Wed, 30 Sep 2026 08:49 AM IST
सार

ट्रक ड्राइवर पिता ने उधार लेकर विद्या रामराज और उनकी जुड़वां बहन नित्या के लिए एथलेटिक जूते खरीदे थे। आज विद्या जापान में तीन एशियाड पदक जीत चुकी हैं, जिसमें एक स्वर्ण है। पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने वाली विद्या अब 400 मीटर बाधा दौड़ में 54 सेकंड से कम समय का लक्ष्य रखती हैं।

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Vithya Ramraj: Truck Driver Father Borrowed Money for Shoes, Now She Has Three Asian Games Medals
विद्या - फोटो : Twitter

विस्तार

पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर भी विद्या रामराज ने खुशी को दबाकर रखा था। उन्हें मालूम था कि 4x400 मीटर रिले में 2002 से 2018 तक चली भारतीय बादशाहत को दोबारा कायम करने का बड़ा दारोमदार उनके कंधों पर है।
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विद्या ने रिले में बहरीन की ओर से 2023 एशियाड में छिने भारतीय वर्चस्व को फिर छीन लिया। भावुक विद्या ने अमर उजाला से कहा कि मुझे पिता का संघर्ष याद आ रहा है। एक समय था जब ट्रक ड्राइवर पिता उनके व उनकी जुड़वां एथलीट बहन नित्या के लिए एथलेटिक जूतों की व्यवस्था नहीं कर पाए थे। वह कई लोगों के पास गए, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और उधार लेकर जूतों की व्यवस्था कर दोनों बहनों के कॅरिअर को आगे बढ़ाया।
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बुरे समय में साथ रहीं बहन नित्या को समर्पित पदक
विद्या ने जापान में जीते अपने पदकों को अपनी बहन नित्या को समर्पित किया। विद्या के संघर्ष में नित्या ने अपने वेतन से उनका खर्च उठाया। विद्या ने कहा, खुशी है कि उन्होंने पीटी उषा के रिकॉर्ड को तोड़ा, पर उन्हें ज्यादा खुशी है कि वह 55 सेकंड से कम समय में 400 मीटर बाधा दौड़ पूरी करनी वाली पहली भारतीय बेटी बनी हैं।
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54 सेकंड से कम समय में दौड़ना चाहती हैं विद्या
विद्या ने कहा, हांगझोउ में बहरीन के हाथों हार के बाद उनका सपना था कि वह रिले का स्वर्ण फिर भारत को दिलाएं। यह सपना पूरा हो गया है, पर उनकी कोशिश विश्व चैंपियनशिप में 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड समय को और बेहतर करना है। उनकी इच्छा है कि वह इस दौड़ को 54 सेकंड से कम में पूरा करके आने वाली पीढ़ी को नई चुनौती दें।
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