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कुश्ती में खुला पदक का खाता: पहलवान सुनील कुमार ने एशियाड में जीता लगातार दूसरा मेडल, कांस्य अपने नाम किया
Wed, 30 Sep 2026 03:58 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Wed, 30 Sep 2026 03:58 PM IST
सार
कुश्ती में पुरुषों के ग्रीको रोमन 87 किग्रा भारवर्ग में भारत को एक कांस्य पदक मिला है। सुनील कुमार ने कांस्य पदक के मुकाबले में फिलीपिन्स के कैलम रॉबर्ट्स को 9-0 से हरा दिया।
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सुनील कुमार
- फोटो : UWW
विस्तार
सुनील कुमार एशियन गेम्स की ग्रीको रोमन स्पर्धा में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए हैं। उन्होंने पुरुषों के 87 किलो वर्ग में कुश्ती स्पर्धा के पहले दिन बुधवार को फिलीपीन के कैलम रॉबर्ट्स जॉनस्टन को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर कांस्य पदक जीता। सुनील ने अपने प्रतिद्वंद्वी का दाहिने हाथ बांधकर उन्हें पटखनी देते हुए 4-0 से बढ़त बना ली। रक्षात्मक खेल रहे जॉनस्टन को पार टेरे पोजिशन से जमीन पर गिराते हुए सुनील ने स्कोरिंग मूव बनाते हुए पहले ही पीरियड में मुकाबला जीत लिया।
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सेमीफाइनल में मिली थी हार
सुनील ने हांगझोउ में 2023 खेलों में भी कांस्य पदक जीतकर ग्रीको रोमन शैली में भारत का पदक का 13 साल का इंतजार खत्म किया था। इससे पहले रविंदर सिंह और सुनील कुमार ने 2010 में ग्वांग्झू खेलों में कांस्य पदक जीता था। हरियाणा के 27 वर्ष के सुनील सेमीफाइनल में जापान के ताइजो योशिडा से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हार गए थे। सुनील ने कांस्य जीतने के बाद कहा, मैं खुश हूं लेकिन संतुष्ट नहीं हूं। मैने एशियाई खेलों में कांस्य पदक पहले भी जीता है। जापानी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ गलती का मैंने खामियाजा भुगता। तकनीकी की बजाय दमखम का अधिक प्रयोग किया।
सुनील ने हांगझोउ में 2023 खेलों में भी कांस्य पदक जीतकर ग्रीको रोमन शैली में भारत का पदक का 13 साल का इंतजार खत्म किया था। इससे पहले रविंदर सिंह और सुनील कुमार ने 2010 में ग्वांग्झू खेलों में कांस्य पदक जीता था। हरियाणा के 27 वर्ष के सुनील सेमीफाइनल में जापान के ताइजो योशिडा से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हार गए थे। सुनील ने कांस्य जीतने के बाद कहा, मैं खुश हूं लेकिन संतुष्ट नहीं हूं। मैने एशियाई खेलों में कांस्य पदक पहले भी जीता है। जापानी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ गलती का मैंने खामियाजा भुगता। तकनीकी की बजाय दमखम का अधिक प्रयोग किया।
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निशा ने किया निराश
महिलाओं के 68 किग्रा वर्ग के प्री क्वार्टर फाइनल में निशा दहिया को एक बार फिर उत्तर कोरिया की सोल गुम पाक के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। निशा को पेरिस ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में भी पाक के हाथों हार मिली थी। निशा ने मुकाबले में 2-0 की बढ़त बनाई थी, लेकिन पाक ने चार अंक का दांव लगाकर पहले पीरियड के अंत तक 4-2 की बढ़त हासिल कर ली।
दूसरे पीरियड में निशा ने दो अंक लेकर स्कोर 4-4 से बराबर कर दिया। इसके बाद कोई भी पहलवान अंक नहीं बना सकी और बड़े दांव के आधार पर पाक को विजेता घोषित किया गया। पाक ने फाइनल में जगह बनाकर निशा के लिए रेपेचेज का रास्ता खोला लेकिन भारतीय पहलवान इस मौके का फायदा नहीं उठा सकीं और दक्षिण कोरिया की पार्क ह्योनयोंग के खिलाफ ‘फॉल’ से हार गईं। निशा को पेरिस ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में भी पाक के हाथों हार मिली थी। उस मुकाबले में निशा 8-2 से आगे थीं लेकिन कोहनी में चोट लगने के कारण मुकाबला 8-10 से गंवा बैठी थीं।
महिलाओं के 68 किग्रा वर्ग के प्री क्वार्टर फाइनल में निशा दहिया को एक बार फिर उत्तर कोरिया की सोल गुम पाक के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। निशा को पेरिस ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में भी पाक के हाथों हार मिली थी। निशा ने मुकाबले में 2-0 की बढ़त बनाई थी, लेकिन पाक ने चार अंक का दांव लगाकर पहले पीरियड के अंत तक 4-2 की बढ़त हासिल कर ली।
दूसरे पीरियड में निशा ने दो अंक लेकर स्कोर 4-4 से बराबर कर दिया। इसके बाद कोई भी पहलवान अंक नहीं बना सकी और बड़े दांव के आधार पर पाक को विजेता घोषित किया गया। पाक ने फाइनल में जगह बनाकर निशा के लिए रेपेचेज का रास्ता खोला लेकिन भारतीय पहलवान इस मौके का फायदा नहीं उठा सकीं और दक्षिण कोरिया की पार्क ह्योनयोंग के खिलाफ ‘फॉल’ से हार गईं। निशा को पेरिस ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में भी पाक के हाथों हार मिली थी। उस मुकाबले में निशा 8-2 से आगे थीं लेकिन कोहनी में चोट लगने के कारण मुकाबला 8-10 से गंवा बैठी थीं।