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नेशनल गेम्स बना ‘विवादों का गेम’
रौशन कुमार झा, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 05 Feb 2015 01:41 PM IST
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नेशनल गेम्स का आयोजन हो और विवाद न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। विवादों के कारण हर साल होने वाला देश का यह सबसे बड़ा खेल आयोजन कई बार तीन-तीन साल तक आयोजित ही नहीं होता।
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इसलिए भला केरल के तिरुवनंतपुरम में चल रहे 35वें नेशनल गेम्स इससे कैसे अछूते रहते, लिहाजा पहले दिन से ही आयोजन नित नए-नए विवादों में घिरता जा रहा है।
ताजा मामले में बुधवार को मध्य प्रदेश की ओर से खेलों में हिस्सा ले रही जिम्नास्ट प्रणति नायक को पहले अयोग्य घोषित कर रजत पदक देने से मना कर दिया गया लेकिन दिन भर चले आरोप-प्रत्यारोप के बाद शाम को उन्हें पदक दे दिया गया।
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दरअसल कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं प्रणति मूल रूप से बंगाल की रहने वाली हैं और सात साल की उम्र से पश्चिम बंगाल के साई सेंटर में अभ्यास कर रही हैं।
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बंगाल सरकार ने उन्हें इस साल राज्य के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न से भी सम्मानित किया लेकिन नेशनल गेम्स के लिए चयन नहीं होने के बाद प्रणति ने मध्य प्रदेश का रुख कर लिया।
वेस्ट बंगाल जिम्नास्टिक एसोसिएशन (डब्लूबीजीए) शुरुआत में चुप रहा लेकिन जैसे ही प्रणति ने बुधवार को रजत जीता, एसोसिएशन ने उनकी भागीदारी पर आपत्ति उठा दी जिसके बाद गेम्स की तकनीकी समिति ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।
‘अमर उजाला’ से फोन पर हुई बातचीत में प्रणति ने बताया कि बंगाल द्वारा नजरअंदाज किए जाने के बाद ही वह मध्य प्रदेश की ओर से खेलने के लिए विवश हुईं थी। इसके लिए जरूरी राज्य एसोसिएशन और जिम्नास्टिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एनओसी भी उनके पास है।
हालांकि डब्लूबीजीए के अधिकारी शंकर चौधरी ने कहा कि उन्होंने प्रणति को किसी तरह की एनओसी नहीं दी है। उन्होंने कहा, "बंगाल में इस तरह की कई एसोसिएशन चल रही हैं लेकिन डब्लूबीजीए को ही केवल आईओए से मान्यता मिली हुई है। हमने उन्हें किसी तरह की एनओसी नहीं दी है और उन्होंने राज्य के साथ गद्दारी की है।"
उन्होंने यह भी कहा, "प्रणति के मना करने के बाद ही हमने उन्हें टीम में शामिल नहीं किया। गेम्स तकनीकी समिति के मना करने के बावजूद आईओए के किसी बंसल नाम के अधिकारी के एक मामूली से कागज पर हस्ताक्षर कर देने मात्र से जिस तरह उसे पदक दे दिया गया, वह बिल्कुल गलत है।"
टॉप बॉक्सरों ने किया किनारा
नेशनल गेम्स में खेलने को लेकर राज्यों ने बॉक्सिंग इंडिया की धमकी को दरकिनार कर दिया है। खेलों में भाग लेने वाले बॉक्सरों को बीआई ने अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से प्रतिबंधित करने की बात कही थी।
धमकी के उलट कुल 31 में से 27 टीमें केरल पहुंच चुकी हैं, जबकि दो के कल पहुंचने की संभावना है। हां, बीआई की धमकी का असर यह जरूर पड़ा है और टॉप बॉक्सरों ने खेलों से किनारा कर लिया है।
जो भी बॉक्सर अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की तैयारियों के लिए शुरू होने वाले नेशनल कैंप में चुने गए हैं ये सभी विवादों से बचने के लिए नेशनल गेम्स में नहीं खेलने जा रहे हैं। खेलों में विजेंदर, अखिल, मनोज, सुमित सांगवान, देवेंद्रो हिस्सा नहीं लेंगे।