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खिलाड़ियों ने आईटा के खिलाफ किया विद्रोह
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jan 2013 12:21 AM IST
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टेनिस खिलाड़ियों और ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (एआईटीए) के बीच चल रहा विवाद बुरी तरह गहरा गया है। लिएंडर पेस को छोड़ सभी आठ टेनिस खिलाड़ियों ने एआईटीए सचिव भरत ओझा के बयान के बाद अपने आपको कोरिया के खिलाफ होने वाले डेविस कप मुकाबले के चयन से अलग कर लिया है। खिलाड़ियों ने संयुक्त बयान में कहा है कि उनका यह कदम किसी तरह से आईटा के खिलाफ विद्रोह नहीं है बल्कि यह टेनिस की भलाई के लिए उठाया गया है।
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सोमदेव देववर्मन, महेश भूपति, सनम सिंह, विष्णु वर्धन, युकी भांबरी, साकेत मिनेनी, रोहन बोपन्ना, दिविज शरण ने शुक्रवार को संयुक्त बयान में कहा है कि उन्होंने भारतीय टेनिस की भलाई के लिए कुछ शर्तें रखी थीं। लेकिन एआईटीए सचिव भरत ओझा का बयान आया है कि कोरिया के खिलाफ होने वाले डेविस कप मुकाबले से पहले टेनिस खिलाड़ियों से कोड ऑफ कंडक्ट साइन कराया जाएगा।
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जो खिलाड़ी इस कोड ऑफ कंडक्ट पर साइन करेंगे उन्हें डेविस कप के लिए टीम में चयनित किया जाएगा। खिलाड़ियों का कहना है कि इस रवैये पर वे टीम के लिए उपलब्ध नहीं हैं। खिलाड़ियों ने यह भी साफ किया है कि यह कदम अल्टीमेटम नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय टेनिस के भविष्य की भलाई छिपी है। सोमदेव ने बयान में कहा कि उनकी मांगों पर अब तक आईटा का जवाब संतोषजनक नहीं रहा है। अगर आईटा के पास इसके समाधान का कोई हल है और यह खिलाड़ियों को स्वीकार है तो वह देश के लिए खेलने को तैयार हैं।
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मांगे पूरी नहीं होने तक खिलाड़ी पूरी तरह से एकजुट हैं और यह तब तक जारी रहेगा जब तक इन्हें माना नहीं जाता है। बोपन्ना का कहना है कि खिलाड़ियों की ओर से जो भी सुझाव आईटा को दिए गए हैं वह खिलाड़ियों और टेनिस के भविष्य के हित में हैं। भूपति का कहना है कि यह देखकर अच्छा लग रहा है कि खिलाड़ी मांगों को लेकर एकजुट हुए हैं। खिलाड़ियों की मांगों से न सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा बल्कि डेविस कप में उनका प्रदर्शन भी निखरेगा।