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विंबलडनः आखिर क्या हुआ अमेरिकी टेनिस खिलाड़ियों को!

Fri, 28 Jun 2013 12:05 PM IST
लंदन
लंदन Updated Fri, 28 Jun 2013 12:05 PM IST
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no us men in 4th round in wimbledon for 1912

एक दशक पहले टेनिस जगत में अमेरिकी खिलाड़ियों का दबदबा होता था, लेकिन अब वो दबदबा खत्म होता नजर होता आ रहा है। इस बार तो विंबलडन में हद ही हो गई।

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दुनिया को कई महान टेनिस खिलाड़ी देने वाले अमेरिका के लिए यह साल बेहद शर्मनाक रहा। 1912 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक भी अमेरिकी खिलाड़ी एकल वर्ग के तीसरे दौर में नहीं पहुंच सका।
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नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने दूसरे दौर में बृहस्पतिवार को टूर्नामेंट में बची एकमात्र अमेरिकी चुनौती को खत्म कर दिया। जोकोविच ने 156वें नंबर के खिलाड़ी बॉबी रेनॉल्ड को सीधे सेटों में 7-6 (7-2), 6-3, 6-1 से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया।
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इंग्लैंड के ग्रास कोर्ट पर खेला जाने वाला विंबलडन एक प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है और यहां पर खेलना किसी भी टेनिस खिलाड़ी के लिए गौरव की बात मानी जाती है।

पिछले एक दशक से अमेरिकी वर्चस्व को तोड़कर यूरोपीय खिलाड़ियों ने टेनिस जगत में अपनी बादशाहत कायम कर रखी है।

टूर्नामेंट की शुरुआत में कुल 11 अमेरिकी खिलाड़ियों को मुख्य ड्रा में जगह मिली थी, जिसमें दो जॉन आइसनर और सैम क्विरी ही वरीयता प्राप्त खिलाड़ी थे।

18वीं सीड आइसनर दूसरे दौर में फ्रांस के एड्रियन मैनारिनो के खिलाफ मुकाबले में चोट लगने के कारण टूर्नामेंट से हट गए थे।

जबकि 21वीं सीड क्विरी पहले ही दौर में ऑस्ट्रेलिया के बर्नार्ड टॉमिक के साथ पांच सेट तक चले मुकाबले में हार गए थे।

बृहस्पतिवार को जेम्स ब्लैक, डेनिस कुडला और रेनॉल्ड के रूप में अमेरिकी चुनौती बची थी। लेकिन ब्लैक टॉमिक के हाथों हार का सामना करना पड़ा जबकि कुडला को क्रोएशिया के इवान डोडिग ने बाहर का रास्ता दिखाया।

लगभग 10 साल और 39 ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट हो चुके हैं लेकिन इस दौरान एक भी अमेरिकी पुरुष चारों मेजर टूर्नामेंटों में एकल खिताब नहीं जीत सका है।

महान टेनिस खिलाड़ी पिट सैंप्रास आखिरी अमेरिकी थे जिन्होंने 2000 में विंबलडन खिताब जीता था। यह उनका सातवां विंबलडन खिताब भी था।

रॉडिक ने आखिरी बार जीता ग्रैंड स्लैम
बतौर अमेरिकन एंडी रॉडिक आखिरी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने पुरुष एकल का ग्रैंड स्लैम अपने नाम किया था। उन्होंने 2003 में अमेरिकी ओपन पर कब्जा जमाया था। हालांकि उन्हें तीन बार 2004, 2005 और 2009 में विंबलडन के फाइनल में रोजर फेडरर के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था।

पिछले कुछ समय से इसी कोर्ट पर इसनर अपनी चुनौती पेश करते रहे हैं। 2010 में उन्हें टेनिस इतिहास का सबसे लंबा मैच जीतने पर खासी पहचान मिली थी।

एक समय इसी ग्रास कोर्ट पर सैंप्रास, आंद्रे आगासी और जॉन मैकनरो का दबदबा हुआ करता था। हालांकि महिला टेनिस में आज भी अमेरिकी चुनौती कायम है।

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