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50 करोड़ लिए, पर अपना हिस्सा देना भूला मंत्रालय

Fri, 01 Mar 2013 11:59 PM IST
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी Updated Fri, 01 Mar 2013 11:59 PM IST
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sports ministry forget to do its share for 50 crore

बीसीसीआई की ओर से दूसरे खेलों के प्रोत्साहन को दिए गए 50 करोड़ रुपये का हिसाब मांगे जाने के बावजूद खेल मंत्रालय ने अब तक इस राशि की मैचिंग ग्रांट का पूरा हिस्सा नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (एनएसडीएफ) में नहीं डाला है। यही नहीं वित्त मंत्री पी चिदंबरम की ओर से पेश सालाना आम बजट में भी इस ग्रांट के लिए बजट निर्धारित नहीं है।

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बीसीसीआई पहले ही खेल मंत्रालय पर बीसीसीआई-एनएसडीएफ ईलीट स्पोर्ट्स फंड (बेस्ट) के तहत दी गई इस राशि के दुरुपयोग का आरोप मंत्रालय पर लगा चुका है। सिर्फ बीसीसीआई ही नहीं बल्कि फार्मूला-वन रेस आयोजित करने के एवज में जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल की ओर से दिए गए 20 करोड़ की मैचिंग ग्रांट के रूप में मंत्रालय ने अब तक फूटी कौड़ी नहीं डाली है। 2013-14 के बजट में एनएसडीएफ के लिए महज पांच करोड़ रुपये की राशि रखी गई है।
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यह नियम है कि एनएसडीएफ के लिए कोई भी संस्था मदद करेगी तो उतनी ही राशि (मैचिंग ग्रांट) खेल मंत्रालय भी अपने पास से डालेगा। मंत्रालय को यह राशि सालाना बजट में निर्धारित करनी होती है। लेकिन बीसीसीआई ने 50 करोड़ 2008 में दिए थे। लेकिन मैचिंग ग्रांट के रूप में 42 करोड़ रुपये के आसपास ही डाले गए हैं।
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यही कारण है कि बीसीसीआई उनकी ओर से दी गई राशि के दुरुपयोग का आरोप मंत्रालय पर लगा रहा है। बीसीसीआई आरोप लगा चुकी है कि यह राशि खिलाड़ियों के ऊपर नहीं बल्कि ढांचागत सुविधाओं पर खर्च की गई है। इसके लिए सिर्फ 2009 में एक बार बैठक की गई। इस आरोप के बाद से बीसीसीआई ने एनएसडीएफ में राशि डालने से हाथ खीच लिया।

जेपी की ओर से 2011 व 2012 में एनएसडीएफ में 10-10 करोड़ रुपये की राशि दी गई। हालांकि जेपी विवादों को हवा नहीं देने के लिए अब तक मंत्रालय से इस राशि के खर्च का ब्योरा नहीं मांगा है। लेकिन सच्चाई यही है कि मंत्रालय के पास मैचिंग ग्रांट डालने के लिए फूटी कौड़ी नहीं है। एनएसडीएफ के लिए निर्धारित पांच करोड़ से एशियाई व कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियों में जुटे खिलाड़ियों की मदद की जाएगी।


खेल मंत्रालय के एक अधिकारी का तर्क है कि मैचिंग ग्रांट के लिए राशि मांगी गई थी। लेकिन इसे बजट में नहीं रखा गया। लेकिन मंत्रालय की ओर से संशोधित बजट में यह राशि फिर मांगी जाएगी।

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