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Sharad Kumar: रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कोच से नहीं मिल पाए शरद, अब पेरिस में पदक जीतकर दिया गुरू को तोहफा
Wed, 04 Sep 2024 07:16 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: Mayank Tripathi
Updated Wed, 04 Sep 2024 07:16 PM IST
सार
बीते दिन 32 वर्षीय एथलीट ने टी63 वर्ग में 1.88 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता जबकि उनके हमवतन मरियप्पन थंगावेलु ने 1.85 मीटर के प्रयास से कांस्य पदक जीता। कुमार ने तीन साल पहले टोक्यो पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीता था।
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शरद कुमार
- फोटो : @narendramodi
विस्तार
पेरिस पैरालंपिक में भारतीय दल का जलवा जारी है। मंगलवार को ऊंची कूद की टी63 श्रेणी में शरद कुमार ने रजत पदक जीतकर अपने गुरू को खास तोहफा दिया। दरअसल, भारतीय एथलीट पिछले दो साल से अपने कोच निकितिन येवहेन से नहीं मिल पाए। रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के चलते दोनों की एक-दूसरे से मुलाकात नहीं हुई।
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शरद ने रजत, मरियप्पन ने कांस्य जीता
बीते दिन 32 वर्षीय एथलीट ने टी63 वर्ग में 1.88 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता जबकि उनके हमवतन मरियप्पन थंगावेलु ने 1.85 मीटर के प्रयास से कांस्य पदक जीता। कुमार ने तीन साल पहले टोक्यो पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीता था। बता दें कि, टी63 कैटेगरी एकल घुटने या घुटने से ऊपर के अंग की कमी वाले एथलीटों के लिए है।
बीते दिन 32 वर्षीय एथलीट ने टी63 वर्ग में 1.88 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता जबकि उनके हमवतन मरियप्पन थंगावेलु ने 1.85 मीटर के प्रयास से कांस्य पदक जीता। कुमार ने तीन साल पहले टोक्यो पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीता था। बता दें कि, टी63 कैटेगरी एकल घुटने या घुटने से ऊपर के अंग की कमी वाले एथलीटों के लिए है।
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दो साल से नहीं हुई कोच से मुलाकात
पदक जीतने के बाद शरद ने इस बात का खुलासा किया कि वह अपने यूक्रेनी गुरू से दो साल से अधिक समय से नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि जब उनके कोच येवहेन को उनकी जीत के बारे में पता चला तो वह भावुक हो गए। शरद ने कहा- "मैंने कल रात उनसे बात की, वह बहुत खुश हैं। उन्होंने मुझे एक ऑडियो भेजा। वह लगभग रो रहे थे।"
पदक जीतने के बाद शरद ने इस बात का खुलासा किया कि वह अपने यूक्रेनी गुरू से दो साल से अधिक समय से नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि जब उनके कोच येवहेन को उनकी जीत के बारे में पता चला तो वह भावुक हो गए। शरद ने कहा- "मैंने कल रात उनसे बात की, वह बहुत खुश हैं। उन्होंने मुझे एक ऑडियो भेजा। वह लगभग रो रहे थे।"
ऑनलाइन ट्रेनिंग देते हैं कोच
शरद ने बताया कि रूस-युक्रेन युद्ध के चलते उन दोनों के बीच सिर्फ ऑनलाइन बात होती है। पदक विजेता ने कहा- युद्ध ने मुझ पर बहुत गहरा असर डाला है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से (फरवरी 2022 में) मेरे कोच मेरे साथ नहीं रह पाए हैं। यहां तक कि जब मैं फिलीपींस में था तब भी मैं हमेशा उनसे ऑनलाइन चैट करता था। उनका आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ है। मैं हर समय, हर दिन उनके संपर्क में रहता हूं।
शरद ने बताया कि रूस-युक्रेन युद्ध के चलते उन दोनों के बीच सिर्फ ऑनलाइन बात होती है। पदक विजेता ने कहा- युद्ध ने मुझ पर बहुत गहरा असर डाला है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से (फरवरी 2022 में) मेरे कोच मेरे साथ नहीं रह पाए हैं। यहां तक कि जब मैं फिलीपींस में था तब भी मैं हमेशा उनसे ऑनलाइन चैट करता था। उनका आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ है। मैं हर समय, हर दिन उनके संपर्क में रहता हूं।
शरद की कहानी
पोलियो की नकली दवा के सेवन के कारण शरद के बाएं पैर में लकवा मार गया था। बिहार के रहने वाले शरद एशियाई पैरा खेलों (2014 और 2018) में दो बार ऊंची कूद के चैंपियन और विश्व रजत पदक विजेता (2019) हैं। उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री हासिल की है। कुमार तीन साल पहले घुटने की समस्या के कारण टोक्यो में टी42 ऊंची कूद के फाइनल से बाहर होने की कगार पर थे, लेकिन भारत में अपने परिवार को फोन करने और इवेंट से एक रात पहले भगवद गीता पढ़ने से उन्हें कांस्य जीतने के प्रयास की चिंता से उबरने में मदद मिली।
पोलियो की नकली दवा के सेवन के कारण शरद के बाएं पैर में लकवा मार गया था। बिहार के रहने वाले शरद एशियाई पैरा खेलों (2014 और 2018) में दो बार ऊंची कूद के चैंपियन और विश्व रजत पदक विजेता (2019) हैं। उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री हासिल की है। कुमार तीन साल पहले घुटने की समस्या के कारण टोक्यो में टी42 ऊंची कूद के फाइनल से बाहर होने की कगार पर थे, लेकिन भारत में अपने परिवार को फोन करने और इवेंट से एक रात पहले भगवद गीता पढ़ने से उन्हें कांस्य जीतने के प्रयास की चिंता से उबरने में मदद मिली।