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महिला खिलाड़ियों के आत्महत्या प्रयास की जांच मेडिकल बोर्ड के सुपुर्द
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 08 May 2015 05:24 PM IST
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केरल के साई सेंटर में तीन महिला खिलाड़ियों के आत्महत्या प्रयास मामले की जांच खेल मंत्रालय ने मेडिकल बोर्ड के सुपुर्द कर दी है। इस बीच अस्पताल में भर्ती तीनों खिलाड़ियों की हालत स्थिर बनी हुई है।
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खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को यहां कहा कि हमने जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया है। हमारी प्राथमिकता तीनों खिलाड़ियों की जिंदगी बचाना है।
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उल्लेखनीय है कि दुखद घटना में कथित तौर पर सीनियरों के कथित उत्पीड़न के बाद वाटर स्पोर्ट्स सेंटर की चार खिलाड़ियों ने जहरीला फल खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। इनमें से एक खिलाड़ी की मौत हो गई और तीन की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
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केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्नीथला ने अस्पताल का दौरा किया और निष्पक्ष जांच का वायदा किया। अलपुझा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपरिटेंडेंट संतोष राघवन ने कहा है तीनों खिलाड़ियों की हालत स्थिर है लेकिन संकट अभी टला नहीं है। जो जहरीला फल उन्होंने खाया है उसकी कोई खास दवा नहीं है। इस जहर का सीधा असर दिल पर होता है, हमारी कोशिश यह है कि उस पर असर न हो। दिल्ली स्थित आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों से भी टेलिकान्फ्रेंस के जरिए सलाह-मशविरा हुआ है।
‘मां क्या मैं अब नहीं बच पाऊंगी’
इस दुखद घटना में जिस खिलाड़ी अपर्णा की मौत हो गई वह पिछले पांच साल से साई सेंटर में थी। उसकी मां गीता का कहना है कि उत्पीड़न के बावजूद वह घर के हालातों के कारण हॉस्टल में ठहरने को विवश थी। अपर्णा चाहती थी कि उसकी अच्छी नौकरी लग जाए ताकि आठवीं में पढ़ने वाले छोटे भाई को बेहतर जिंदगी मिल सके। अपर्णा के पिता एक हाउसबोट में काम करते हैं जबकि मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है।
उनके अनुसार, सारे परिवार की उम्मीदें अपर्णा पर टिकीं थी। गीता के मुताबिक अस्पताल में जब अपर्णा जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी तब उसने सीनियरों के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बारे में उसे बताया था और साथ ही इतना कड़ा कदम उठाने के लिए माफी भी मांगी थी।
बकौल गीता उसने कहा था, "मां मुझे माफ कर दो, मैंने यह सीनियर चेची (बड़ी बहन) के उत्पीड़न के कारण किया। मां, क्या मैं अब नहीं बच पाऊंगी।" गीता ने कहा कि उसकी बेटी का आत्महत्या का इरादा नहीं था लेकिन लगातार उत्पीड़न के बाद उसे कोई विकल्प नहीं दिखा होगा।
विशु उत्सव के दौरान 15 अप्रैल को घर आई थी और उसने कहा था कि सीनियरों के साथ एक कमरे में रहना बड़ा मुश्किलों भरा होता है। जब हॉस्टल की वार्डन को कहा गया था तो उसने वायदा किया था कि तीन महीने बाद कमरा बदल देंगे। मगर उसके बाद अपर्णा ने इस तरह जाहिर किया जैसे हॉस्टल में सब कुछ ठीक हो गया शायद वो मां-बाप की चिंता नहीं बढ़ाना चाहती थी।
गीता ने कहा कि अस्पताल में अंतिम सांस लेने से पहले बताया था कि दो सीनियरों के उत्पीड़न के कारण उन्होंने जहरीला फल खा लिया।
घटना से जुड़ा है जश्न पार्टी कनेक्शन
कुछ सीनियरों एथलीटों ने कहा है कि शनिवार को हमने नेशनल गेम्स में पदक जीतने की खुशी में पार्टी का आयोजन किया था। रात को वे लड़कियां कमरे में बीयर ले आईं थीं। हमें इस बारे में नहीं पता लेकिन यह बात चल रही थी कि उन लड़कियों ने ड्रिंक्स कर रखी थी और मैडम को शायद इस बारे में पता लग गया था।