{"_id":"66b4d80338184b4963038613","slug":"paris-olympics-saved-5-goals-in-final-stood-like-a-rock-pr-sreejesh-said-goodbye-to-international-hockey-2024-08-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"PR Sreejesh: स्पेन के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे, पांच गोल बचाए, ओलंपिक कांस्य पदक के साथ श्रीजेश की विदाई","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
PR Sreejesh: स्पेन के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे, पांच गोल बचाए, ओलंपिक कांस्य पदक के साथ श्रीजेश की विदाई
Thu, 08 Aug 2024 08:06 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 08 Aug 2024 08:06 PM IST
सार
जीत के बाद श्रीजेश ने कहा कि फाइनल से पहले कोच ने कहा था कि यह श्रीजेश का आखिरी मैच है और वह मैदान पर भी वैसा ही जुनून और जज्बा दिखाएगा। इस दिग्गज ने गोलकीपर ने उम्मीदों पर खरा उतरते हुए स्पेन के छह में से पांच अटैक रोके।
विज्ञापन
पीआर श्रीजेश
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भारतीय हॉकी टीम के दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह दिया है। पेरिस ओलंपिक में स्पेन के खिलाफ भारत के कांस्य पदक जीतते ही श्रीजेश का सफर समाप्त हो गया। इसके बाद श्रीजेश भावुक होकर मैदान पर ही लेट गए। बाकी खिलाड़ी दौड़ते हुए उनके पास पहुंचे और जश्न में उनकी पीठ थपथपाने लगे। फिर जैसे ही श्रीजेश खड़े हुए, सभी भारतीय खिलाड़ियों ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया और उनके आगे नतमस्तक हो गए। उन्होंने करियर में 336 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले।
जीत के बाद श्रीजेश ने कहा कि फाइनल से पहले कोच ने कहा था कि यह श्रीजेश का आखिरी मैच है और वह मैदान पर भी वैसा ही जुनून और जज्बा दिखाएगा। यह दिग्गज गोलकीपर उम्मीदों पर खरा उतरा और स्पेन के छह में से पांच अटैक को अपनी शानदार डिफेंडिंग स्किल से रोक लिया। 36 साल के श्रीजेश का यह चौथा ओलंपिक था और उन्होंने इसका शानदार अंत किया। वह लगातार दो बार ओलंपिक पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम का हिस्सा रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने 2016 रियो ओलंपिक में हिस्सा लिया था और टीम आठवें स्थान पर रही थी। हालांकि, उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक और अब पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम के साथ ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता है।
विज्ञापन
जीत के बाद श्रीजेश ने कहा कि फाइनल से पहले कोच ने कहा था कि यह श्रीजेश का आखिरी मैच है और वह मैदान पर भी वैसा ही जुनून और जज्बा दिखाएगा। यह दिग्गज गोलकीपर उम्मीदों पर खरा उतरा और स्पेन के छह में से पांच अटैक को अपनी शानदार डिफेंडिंग स्किल से रोक लिया। 36 साल के श्रीजेश का यह चौथा ओलंपिक था और उन्होंने इसका शानदार अंत किया। वह लगातार दो बार ओलंपिक पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम का हिस्सा रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने 2016 रियो ओलंपिक में हिस्सा लिया था और टीम आठवें स्थान पर रही थी। हालांकि, उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक और अब पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम के साथ ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता है।
विज्ञापन
पीआर श्रीजेश
- फोटो : PTI
2010 में अपना पहला विश्व कप खेलने के बाद श्रीजेश भारत के लिए कई यादगार जीत का हिस्सा रहे हैं, जिसमें 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण और जकार्ता-पालेमबांग में 2018 एशियाड में कांस्य पदक शामिल है। वह 2018 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की संयुक्त विजेता टीम के अलावा, भुवनेश्वर में 2019 एफआईएच पुरुष सीरीज फाइनल चैंपियन टीम में भी थे। इसके अलावा वह 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक और 2023 एशियाई चैंपियन ट्रॉफी जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे। 2022 एशियाई खेलों में उन्होंने भारत को स्वर्ण जीतने में मदद की थी।
श्रीजेश को 2021 में खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वहीं, 2022 में वह साल 2021 के लिए सर्वश्रेष्ठ एथलीट चुने गए थे। श्रीजेश ने अपनी गर्लफ्रेंड अनीषया से शादी की थी, जो कि एक लॉन्ग जंपर और आयुर्वेद डॉक्टर भी हैं। इस कपल की एक बेटी (अनुश्री) और एक बेटा भी है। श्रीजेश 2016 में सरदार सिंह को रिप्लेस कर भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान बने थे। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने अपनी गोलकीपिंग से भारत को 41 साल बाद पुरुष हॉकी में ओलंपिक पदक जिताने में मदद की थी।
श्रीजेश को 2021 में खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वहीं, 2022 में वह साल 2021 के लिए सर्वश्रेष्ठ एथलीट चुने गए थे। श्रीजेश ने अपनी गर्लफ्रेंड अनीषया से शादी की थी, जो कि एक लॉन्ग जंपर और आयुर्वेद डॉक्टर भी हैं। इस कपल की एक बेटी (अनुश्री) और एक बेटा भी है। श्रीजेश 2016 में सरदार सिंह को रिप्लेस कर भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान बने थे। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने अपनी गोलकीपिंग से भारत को 41 साल बाद पुरुष हॉकी में ओलंपिक पदक जिताने में मदद की थी।
पीआर श्रीजेश
- फोटो : PTI
हर अग्निपरीक्षा में संकटमोचक साबित हुए श्रीजेश
बोर्ड के इम्तिहान में ग्रेस अंक पाने के लिए खेलों में उतरने से लेकर ‘भारतीय हॉकी की दीवार’ बनने तक पराट्टू रवींद्रन श्रीजेश का सफर उपलब्धियों से भरपूर रहा। हर बड़ी चुनौती में संकटमोचक बनकर उभरे इस नायाब खिलाड़ी को पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद अपने कंधे पर बिठाकर भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह की टीम ने उन्हें विदाई दी। 36 वर्ष के श्रीजेश ने ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम को मिले 13वें और लगातार दूसरे पदक के साथ अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह दिया।
टोक्यो ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ प्लेऑफ मुकाबले में निर्णायक पेनल्टी बचाकर 41 साल बाद भारत को ओलंपिक पदक दिलाना हो या पेरिस में ओलंपिक खेलों में ऑस्ट्रेलिया पर 52 साल बाद मिली जीत हो या ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में भारत को मिली जीत हो, हर जुबां पर एक ही नाम था पी आर श्रीजेश।
बोर्ड के इम्तिहान में ग्रेस अंक पाने के लिए खेलों में उतरने से लेकर ‘भारतीय हॉकी की दीवार’ बनने तक पराट्टू रवींद्रन श्रीजेश का सफर उपलब्धियों से भरपूर रहा। हर बड़ी चुनौती में संकटमोचक बनकर उभरे इस नायाब खिलाड़ी को पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद अपने कंधे पर बिठाकर भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह की टीम ने उन्हें विदाई दी। 36 वर्ष के श्रीजेश ने ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम को मिले 13वें और लगातार दूसरे पदक के साथ अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह दिया।
टोक्यो ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ प्लेऑफ मुकाबले में निर्णायक पेनल्टी बचाकर 41 साल बाद भारत को ओलंपिक पदक दिलाना हो या पेरिस में ओलंपिक खेलों में ऑस्ट्रेलिया पर 52 साल बाद मिली जीत हो या ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में भारत को मिली जीत हो, हर जुबां पर एक ही नाम था पी आर श्रीजेश।
पीआर श्रीजेश
- फोटो : PTI
आठ मई 1988 को केरल के अर्नाकुलम जिले के किझाकम्बलम गांव में जन्मे श्रीजेश ने पहले बताया था कि वह बोर्ड की परीक्षा में ग्रेस अंक लेने के लिए एथलेटिक्स में उतरे थे और बाद में उनके स्कूल के कोच ने उन्हें हॉकी गोलकीपर बनने की सलाह दी। हालांकि केरल में उस समय एथलेटिक्स और फुटबॉल की ही लोकप्रियता थी, लेकिन कोच की वह सलाह श्रीजेश और भारतीय हॉकी के लिए वरदान साबित हुई। अब तक धनराज पिल्लै ने ही चार ओलंपिक, चार विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी और एशियाई खेलों में भाग लिया है। श्रीजेश चार ओलंपिक खेलने वाले पहले भारतीय गोलकीपर हैं।
कोलंबो में 2006 में दक्षिण एशियाई खेलों के जरिए भारत की सीनियर टीम में डेब्यू करने वाले श्रीजेश 2011 तक एड्रियन डिसूजा और भरत छेत्री जैसे सीनियर गोलकीपरों के रहते टीम में स्थायी जगह नहीं पा सके। वह 2011 से टीम के अभिन्न अंग बने और 2014 एशियाई खेल फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ दो पेनल्टी स्ट्रोक बचाकर स्टार बने। इसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा और ओलंपिक, विश्व कप, चैम्पियंस ट्रॉफी, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल , प्रो लीग सभी टूर्नामेंटों में उनका जलवा रहा । खेल रत्न, पद्मश्री , विश्व के सर्वश्रेष्ठ एथलीट, एफआईएच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी , 336 अंतरराष्ट्रीय मैच उनकी उपलब्धियों की गवाही खुद ब खुद देते हैं।
कोलंबो में 2006 में दक्षिण एशियाई खेलों के जरिए भारत की सीनियर टीम में डेब्यू करने वाले श्रीजेश 2011 तक एड्रियन डिसूजा और भरत छेत्री जैसे सीनियर गोलकीपरों के रहते टीम में स्थायी जगह नहीं पा सके। वह 2011 से टीम के अभिन्न अंग बने और 2014 एशियाई खेल फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ दो पेनल्टी स्ट्रोक बचाकर स्टार बने। इसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा और ओलंपिक, विश्व कप, चैम्पियंस ट्रॉफी, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल , प्रो लीग सभी टूर्नामेंटों में उनका जलवा रहा । खेल रत्न, पद्मश्री , विश्व के सर्वश्रेष्ठ एथलीट, एफआईएच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी , 336 अंतरराष्ट्रीय मैच उनकी उपलब्धियों की गवाही खुद ब खुद देते हैं।
पीआर श्रीजेश
- फोटो : PTI
यही वजह है कि धनराज पिल्लै उन्हें मेजर ध्यानचंद, बलबीर सिंह सीनियर, मोहम्मद शाहीद जैसे महानतम खिलाड़ियों की सूची में रखते हैं तो दिलीप तिर्की उन्हें भारतीय गोलकीपिंग का भगवान कहते हैं। मनप्रीत सिंह जैसे अनुभवी मिडफील्डर अपनी परेशानियां उनसे साझा करते हैं तो राजकुमार पाल या अभिषेक जैसे युवा खिलाड़ियों को वे दबाव झेलने का हौसला देते हैं। कप्तान हरमनप्रीत सिंह उनकी उपस्थिति में अपना बोझ हलका महसूस करते हैं तो करोड़ों भारतीय हॉकी प्रेमियों को आखिरी पल तक उम्मीद रहती है कि श्रीजेश है तो गोल नहीं होने देगा।
रजनीकांत के फैन श्रीजेश भारतीय हॉकी खिलाड़ियों के ऐसे ‘थाला’ ( बड़े भाई) रहे जिन्होंने गलती होने पर डांटा और अच्छा खेलने पर पीठ भी थपथपाई। मैदान पर गोल के सामने अकेले खड़े होने पर भी वह अकेले नहीं रहते और लगातार बोलते हुए खिलाड़ियों का मनोबल बढाते रहते हैं। मलयालम भाषी श्रीजेश कभी पंजाबी में भी बोलते सुनाई दे जाते हैं तो कभी मैच जीतने पर गोलपोस्ट पर बैठे नजर आते हैं।
रजनीकांत के फैन श्रीजेश भारतीय हॉकी खिलाड़ियों के ऐसे ‘थाला’ ( बड़े भाई) रहे जिन्होंने गलती होने पर डांटा और अच्छा खेलने पर पीठ भी थपथपाई। मैदान पर गोल के सामने अकेले खड़े होने पर भी वह अकेले नहीं रहते और लगातार बोलते हुए खिलाड़ियों का मनोबल बढाते रहते हैं। मलयालम भाषी श्रीजेश कभी पंजाबी में भी बोलते सुनाई दे जाते हैं तो कभी मैच जीतने पर गोलपोस्ट पर बैठे नजर आते हैं।
पीआर श्रीजेश 2020 टोक्यो ओलंपिक के दौरान और 2024 पेरिस ओलंपिक के दौरान
- फोटो : Twitter
2020 टोक्यो ओलंपिक के गोलपोस्ट पर बैठने के पोज को उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक में भी दोहराया। भारतीय टीम में उनकी कमी को पूरी करना वाकई चुनौती होगी। आगे जो भी गोलकीपर टीम इंडिया का हिस्सा होगा, उससे श्रीजेश जैसा कारनाम करने की उम्मीद होगी। यह देखने वाली बात होगी कि वह गोलकीपर उन उम्मीदों के तले दब जाता है या फिर खुद को साबित करने में कामयाब रहता है।