{"_id":"66b78ca23dc9380b9403eafa","slug":"paris-olympics-pakistan-laughing-stock-competition-among-people-to-take-credit-for-arshad-nadeem-success-2024-08-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Paris Olympics: हंसी का पात्र बना पाकिस्तान, अरशद नदीम की सफलता का श्रेय लेने के लिए लोगों के बीच मची होड़","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
Paris Olympics: हंसी का पात्र बना पाकिस्तान, अरशद नदीम की सफलता का श्रेय लेने के लिए लोगों के बीच मची होड़
Sat, 10 Aug 2024 09:22 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sat, 10 Aug 2024 09:22 PM IST
सार
पेरिस ओलंपिक से कुछ महीने पहले नदीम को अनुरोध करना पड़ा था कि उसे एक नया भाला प्रदान किया जाए क्योंकि उसका पुराना भाला वर्षों के उपयोग के बाद खराब हो गया था। नदीम को इसके लिए ‘क्राउड फंडिग’ की मदद लेनी पड़ी थी।
विज्ञापन
अरशद नदीम
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान में खेल प्रणाली की विफलता और प्रशासनिक उदासीनता के बीच ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले भाला फेंक एथलीट अरशद नदीम को यह अच्छे से पता है कि उन्हें इस ऐतिहासिक सफलता के लिए किन संघर्षों और बलिदानों का सामना करना पड़ा है। नदीम को जरूरत के समय मदद मुहैया करने में विफल रही सरकारी संस्थाओं के बीच अब उनकी सफलता का श्रेय लेने की होड़ मची है। इस सूची में पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड (पीएसबी), अंतर प्रांतीय समन्वय मंत्रालय (खेल) और सरकार के शीर्ष ओहदे पर बैठे लोग भी शामिल हैं।
विज्ञापन
अरशद नदीम-नीरज चोपड़ा
- फोटो : PTI
पेरिस ओलंपिक से कुछ महीने पहले नदीम को अनुरोध करना पड़ा था कि उसे एक नया भाला प्रदान किया जाए क्योंकि उसका पुराना भाला वर्षों के उपयोग के बाद खराब हो गया था। नदीम को इसके लिए ‘क्राउड फंडिग’ की मदद लेनी पड़ी थी। भारतीय सुपरस्टार नीरज चोपड़ा सहित पेरिस ओलंपिक भाला फेंक फाइनल में भाग लेने वाले अन्य एथलीटों की तुलना में नदीम को धन की कमी के कारण सर्वश्रेष्ठ कोच की देखरेख में प्रशिक्षण लेने या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार प्रतिस्पर्धा करने का मौका नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
अरशद नदीम
- फोटो : Twitter
ओलंपिक से पहले उनके घुटने की सर्जरी भी हुई और पैसे की कमी के कारण उनके पास दर्जनों अन्य एमेच्योर खिलाड़ियों के साथ भीषण गर्मी में पंजाब स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में अभ्यास करने अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। इस स्थिति में भी सरकार, राज्य संचालित पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड, पाकिस्तान ओलंपिक संघ (पीओए) और यहां तक कि प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ उनकी सफलता का श्रेय लेने में पीछे नहीं रहे। प्रधानमंत्री ने सबसे पहले नदीम को बधाई दी, लेकिन जिस बात ने पाकिस्तान के लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया, वह यह दावा है कि यह उनकी दूरदर्शिता ही थी, जिसने नदीम को इस पदक के लिए तैयार होने में मदद की।
अरशद नदीम
- फोटो : PTI
भाला फेंक फाइनल के तुरंत बाद प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक वीडियो में नदीम की सफलता के बाद प्रधानमंत्री उछलते और तालियां बजाते दिख रहे हैं और पंजाब के खेल मंत्री उनसे कह रहे हैं, ‘सर ये आप का विजन था, आपने इसको मौका दिया’। पंजाब के खेल मंत्री उस समय आयोजित होने वाले पंजाब खेलों का जिक्र कर रहे थे जब शाहबाज प्रांत के मुख्यमंत्री थे।
अरशद नदीम-नीरज चोपड़ा
- फोटो : PTI
पीएसबी भी श्रेय लेने में पीछे नहीं था, जिसने दावा किया कि उसने नदीम को हर संभव सहायता प्रदान की और नकद पुरस्कार देने के अलावा उसकी सर्जरी पर एक करोड़ रुपये भी खर्च किए। पीएसबी अपने वार्षिक बजट में सरकार द्वारा आवंटित सभी राष्ट्रीय संघों को धन वितरित करने के लिए जिम्मेदार है। पीओए के एक असंतुष्ट सदस्य ने कहा, 'पीएसबी और पाकिस्तान ओलंपिक संघ कितने भी बड़े दावे करे लेकिन सच्चाई यह है कि देश में गैर-क्रिकेट एथलीटों को समर्थन और प्रोत्साहित करने के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।'
पाकिस्तान के महान स्क्वाश खिलाड़ी जहांगीर खान ने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में वह जानते हैं कि व्यक्तिगत पदक जीतने में कितनी मेहनत, बलिदान, पसीना, खून और आंसू लगते हैं। उन्होंने कहा, 'व्यक्तिगत खेलों में आप सफलता पाने के लिए खुद से संघर्ष कर रहे होते हैं। अगर हमारी खेल प्रणाली ठीक से काम कर रही होती तो हमारे पास मौजूद प्रतिभा को देखते हुए हम अधिक विश्व स्तरीय एथलीट पैदा कर रहे होते।'
पाकिस्तान के महान स्क्वाश खिलाड़ी जहांगीर खान ने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में वह जानते हैं कि व्यक्तिगत पदक जीतने में कितनी मेहनत, बलिदान, पसीना, खून और आंसू लगते हैं। उन्होंने कहा, 'व्यक्तिगत खेलों में आप सफलता पाने के लिए खुद से संघर्ष कर रहे होते हैं। अगर हमारी खेल प्रणाली ठीक से काम कर रही होती तो हमारे पास मौजूद प्रतिभा को देखते हुए हम अधिक विश्व स्तरीय एथलीट पैदा कर रहे होते।'