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Paris Olympics: ओलंपिक मेडलिस्ट स्वप्निल कुसाले ने कहा- इतनी मेहनत करूंगा कि अगली बार इस पदक का रंग बदल सकूं
Sun, 04 Aug 2024 10:42 AM IST
स्वप्निल शशांक
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला ब्यूरो, पेरिस
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला ब्यूरो, पेरिस
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 04 Aug 2024 10:42 AM IST
सार
स्वप्निल को जब पदक पहनाया जा रहा था तो उनकी नजर वहां मौजूद भारतीयों और तिरंगे पर थी। वह कहते हैं कि यह पदक भारत का है और देश को ही समर्पित है।
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स्वप्निल कुसाले (दाएं)
- फोटो : PTI
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विस्तार
स्वप्निल कुसाले जिस सपने को पिछले 12 वर्षों से जी रहे थे वह ओलंपिक पदक के रूप में बृहस्पतिवार को पूरा हो गया। इस पदक के बाद उन्हेें रेलवे ने प्रमोशन भी दे दिया महाराष्ट्र सरकार ने एक करोड़ रुपये के इनाम की भी घोषणा कर दी। बावजूद इसके स्वप्निल सामान्य हैं। स्वप्निल अमर उजाला से कहते हैं कि वह ओलंपिक पदक विजेता जरूर बन गए हैं, लेकिन उनमें कुछ बदलाव नहीं होने जा रहा है। वह कल जैसे थे वैसे अब भी रहेंगे, बल्कि यह पदक उन्हें शूटिंग में और कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करेगा, जिससे वह अगले ओलंपिक में इस पदक का रंग बदलने के लायक बन सकें।
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स्वप्निल कुसाले
- फोटो : PTI
अब माता-पिता के कष्ट दूर करने की बारी मेरी
स्वप्निल को जब पदक पहनाया जा रहा था तो उनकी नजर वहां मौजूद भारतीयों और तिरंगे पर थी। वह कहते हैं कि यह पदक भारत का है और देश को ही समर्पित है। स्वप्निल के निशानेबाजी के इस सफर में उनके पिता सुरेश महादेव कुसाले ने भी काफी संघर्ष किया। स्वप्निल भी कहते हैं कि माता-पिता ने उनके लिए बहुत कुछ दिया। अब उनके लिए करने की बारी मेरी है। स्वप्निल कहते हैं कि वह उनके सारे कष्टों को दूर करने की कोशिश करेंगे। उनकी माता-पिता से बात हुई, वह बेहद भावुक हो गए थे। उनसे बात कर मैं भी भावुक हो गया।
स्वप्निल को जब पदक पहनाया जा रहा था तो उनकी नजर वहां मौजूद भारतीयों और तिरंगे पर थी। वह कहते हैं कि यह पदक भारत का है और देश को ही समर्पित है। स्वप्निल के निशानेबाजी के इस सफर में उनके पिता सुरेश महादेव कुसाले ने भी काफी संघर्ष किया। स्वप्निल भी कहते हैं कि माता-पिता ने उनके लिए बहुत कुछ दिया। अब उनके लिए करने की बारी मेरी है। स्वप्निल कहते हैं कि वह उनके सारे कष्टों को दूर करने की कोशिश करेंगे। उनकी माता-पिता से बात हुई, वह बेहद भावुक हो गए थे। उनसे बात कर मैं भी भावुक हो गया।
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स्वप्निल कुसाले
- फोटो : PTI
कोच ने नीलिंग पैड ठीक नहीं कराया होता तो दिक्कत हो जाती
स्वप्निल बताते हैं कि फाइनल से पहले वह नीलिंग पोजीशन को लेकर दिक्कत में थे। उनके निशाने सही नहीं बैठ रहे थे। वह परेशान थे। इस बारे में उन्होंने कोच दीपाली देशपांडे से बात की। अंत में पता लगा कि उनके नीलिंग पैड में दिक्कत है। यात्रा के समय यह पैड दब गया, जिसके चलते उनका घुटना इस पैड पर सही से सेट नहीं हो पा रहा था। इस कारण उनकी पोजीशन खराब हो रही थी, जिससे स्कोरिंग पर फर्क पड़ रहा था। कोच ने ही उन्हें पैड में टिश्यू पेपर भरवाए और तब पोजीशन ठीक हुई। अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो उन्हें मैच में बड़ी समस्या आ सकती थी।
स्वप्निल बताते हैं कि फाइनल से पहले वह नीलिंग पोजीशन को लेकर दिक्कत में थे। उनके निशाने सही नहीं बैठ रहे थे। वह परेशान थे। इस बारे में उन्होंने कोच दीपाली देशपांडे से बात की। अंत में पता लगा कि उनके नीलिंग पैड में दिक्कत है। यात्रा के समय यह पैड दब गया, जिसके चलते उनका घुटना इस पैड पर सही से सेट नहीं हो पा रहा था। इस कारण उनकी पोजीशन खराब हो रही थी, जिससे स्कोरिंग पर फर्क पड़ रहा था। कोच ने ही उन्हें पैड में टिश्यू पेपर भरवाए और तब पोजीशन ठीक हुई। अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो उन्हें मैच में बड़ी समस्या आ सकती थी।