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Paris Olympics: अधिक भार वर्ग में लिया हिस्सा, हार से निराश होकर छोड़ रही थीं कुश्ती, ऐसा रहा रितिका का सफर
Sat, 10 Aug 2024 04:07 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sat, 10 Aug 2024 04:07 PM IST
सार
रितिका 76 किग्रा भार वर्ग में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। रितिका इस भार वर्ग में कम उतरती हैं और वह आमतौर पर 72 किग्रा वर्ग में ही हिस्सा लेती हैं, लेकिन उन्होंने 76 किग्रा में प्रतिस्पर्धा करने का फैसला किया।
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पेरिस ओलंपिक 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत की महिला पहलवान रितिका हुड्डा रितिका हुड्डा पेरिस ओलंपिक खेलों में शानदार शुरुआत करते हुए 76 किग्रा वर्ग फ्रीस्टाइल कुश्ती के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने प्री क्वार्टर फाइनल में हंगरी की बर्नाडेट नेगी को तकनीकी श्रेष्ठता से 12-2 से हराया, लेकिन रीतिका किर्गिस्तान की पहलवान आयपेरी मेदेत किजी से क्वार्टर फाइनल में हार गईं। रितिका के लिए हालांकि ओलंपिक तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था और उन्हें पेरिस खेलों में हिस्सा लेने के लिए अधिक भार वर्ग में हिस्सा लेना पड़ा।
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रितिका के सामने आई कई चुनौतियां
रितिका 76 किग्रा भार वर्ग में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। रितिका इस भार वर्ग में कम उतरती हैं और वह आमतौर पर 72 किग्रा वर्ग में ही हिस्सा लेती हैं, लेकिन उन्होंने 76 किग्रा में प्रतिस्पर्धा करने का फैसला किया। इसके लिए उन्हें अपना वजन बढ़ाना पड़ा था। रितिका के लिए वजन बरकरार रखना बड़ी चुनौती थी।
रितिका 76 किग्रा भार वर्ग में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। रितिका इस भार वर्ग में कम उतरती हैं और वह आमतौर पर 72 किग्रा वर्ग में ही हिस्सा लेती हैं, लेकिन उन्होंने 76 किग्रा में प्रतिस्पर्धा करने का फैसला किया। इसके लिए उन्हें अपना वजन बढ़ाना पड़ा था। रितिका के लिए वजन बरकरार रखना बड़ी चुनौती थी।
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एशियाई खेलों के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थीं रितिका
हरियाणा के रोहतक की रहने वाली 22 वर्षीय रितिका ने कम उम्र में ही कुश्ती करना शुरू कर दिया था। उनका सपना ओलंपिक में पदक जीतने का है और इसके लिए उनके माता-पिता ने भी रितिका का पूरा साथ दिया। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने कुश्ती छोड़ने का फैसला किया था। दरअसल, रितिका एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल दोनों के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थीं। इससे वह काफी निराश हो गईं और उन्होंने इस खेल को छोड़ने का फैसला किया। हालांकि, उनके माता-पिता ने उन्हें काफी समझाया जिससे रितिका को प्रेरणा मिली। रितिका ने फिर कड़ी मेहनत की और आगे बढ़ती रहीं।
हरियाणा के रोहतक की रहने वाली 22 वर्षीय रितिका ने कम उम्र में ही कुश्ती करना शुरू कर दिया था। उनका सपना ओलंपिक में पदक जीतने का है और इसके लिए उनके माता-पिता ने भी रितिका का पूरा साथ दिया। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने कुश्ती छोड़ने का फैसला किया था। दरअसल, रितिका एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल दोनों के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थीं। इससे वह काफी निराश हो गईं और उन्होंने इस खेल को छोड़ने का फैसला किया। हालांकि, उनके माता-पिता ने उन्हें काफी समझाया जिससे रितिका को प्रेरणा मिली। रितिका ने फिर कड़ी मेहनत की और आगे बढ़ती रहीं।
पिछले साल विश्व अंडर-23 चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण
रितिका ने पिछले साल विश्व अंडर-23 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर कमाल कर दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। रितिका ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। रितिका की नजरें स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हैं और इसके लिए वो काफी मेहनत कर रही हैं। रितिका ने ओलंपिक की दमदार शुरुआत की थी और उनसे बेहतर प्रदर्शन करने की आस थी, लेकिन क्वार्टर फाइनल में स्कोर बराबर रहने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
रितिका ने पिछले साल विश्व अंडर-23 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर कमाल कर दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। रितिका ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। रितिका की नजरें स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हैं और इसके लिए वो काफी मेहनत कर रही हैं। रितिका ने ओलंपिक की दमदार शुरुआत की थी और उनसे बेहतर प्रदर्शन करने की आस थी, लेकिन क्वार्टर फाइनल में स्कोर बराबर रहने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
भारत को सातवां पदक दिला सकती हैं रितिका
रितिका के पास भारत को सातवां पदक दिलाने का जिम्मा है। भारत ने पेरिस ओलंपिक में अब तक एक रजत और पांच कांस्य सहित कुल छह पदक जीते हैं। भारत ने टोक्यो ओलंपिक में सात पदक जीतकर अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। भारत ने अब तक पेरिस में स्वर्ण नहीं जीता है और रितिका के पास यह कमाल करने का मौका था। हालांकि, रितिका अब स्वर्ण नहीं जीत सकती हैं, लेकिन उनके पास रेपेचेज के जरिये कांस्य पदक जीतने का मौका है। अगर आयपेरी फाइनल में पहुंचने में सफल रहीं तो रितिका रेपेचेज दौर में पहुंच जाएंगी।
रितिका के पास भारत को सातवां पदक दिलाने का जिम्मा है। भारत ने पेरिस ओलंपिक में अब तक एक रजत और पांच कांस्य सहित कुल छह पदक जीते हैं। भारत ने टोक्यो ओलंपिक में सात पदक जीतकर अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। भारत ने अब तक पेरिस में स्वर्ण नहीं जीता है और रितिका के पास यह कमाल करने का मौका था। हालांकि, रितिका अब स्वर्ण नहीं जीत सकती हैं, लेकिन उनके पास रेपेचेज के जरिये कांस्य पदक जीतने का मौका है। अगर आयपेरी फाइनल में पहुंचने में सफल रहीं तो रितिका रेपेचेज दौर में पहुंच जाएंगी।