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सफलता की कहानी: प्रगाननंदा की बहन ने भाई को कार्टून से बचाने के लिए सिखाया था शतरंज, पिता हैं पोलियो से ग्रसित
Tue, 22 Feb 2022 07:05 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रोहित राज
Updated Tue, 22 Feb 2022 07:05 PM IST
सार
दुनिया के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराकर भारत के युवा ग्रैंडमास्टर प्रगनाननंदा ने इतिहास रच दिया। प्रगनाननंदा की बहन वैशाली ने शौक से शतरंज खेलना शुरू किया, लेकिन भाई ने उसे अपने जीवन का हिस्सा ही बना लिया।
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प्रगनाननंदा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दुनिया के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराकर भारत के युवा ग्रैंडमास्टर प्रगनाननंदा ने इतिहास रच दिया। प्रगनाननंदा की बहन वैशाली ने शौक से शतरंज खेलना शुरू किया, लेकिन भाई ने उसे अपने जीवन का हिस्सा ही बना लिया। जब उसके उम्र में छोटे बच्चे खिलौने के प्रति आकर्षित होते, उसने तब तक खेल की सारी बारीकियां समझ ली थीं।
रविवार को प्रगनाननंदा ने विश्व नंबर 1 शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को जब 39 चाल में मात दी तो वह ऐसा करने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए। उनसे पहले विश्वनाथन आनंद और पी हरिकृष्णा ने नॉर्वे के सुपरस्टॉर को हरा चुके हैं। प्रगनाननंदा की यह यात्रा तब शुरू हुई, जब अधिकांश बच्चे के जीवन में कोई उद्देश्य नहीं होता।
पोलियोग्रस्त बैंक कर्मचारी रमेश बाबू कहते हैं, जब मैं और मेरी पत्नी नागालक्ष्मी ने देखा कि बेटी वैशाली दिनभर टीवी देखती रहती है तो उसकी यह आदत छुड़ाने के लिए उसे शतरंज से परिचित कराया। लेकिन हम नहीं जानते थे कि यह खेल प्रगा को प्रेरित करेगा। बेटी के शौक की वजह से प्रगा में खेल के प्रति दिलचस्पी बनी और परिणाम आपके सामने है। मुझे खुशी है कि मेरे दोनों बच्चो को यह खेल पसंद आया और उसमें आगे बढ़ने का फैसला किया। साथ ही वे इस खेल का लुत्फ भी उठा रहे हैं।
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पिता ने प्रगा की मां को दिया उपलब्धियों का श्रेय
रमेश बाबू कहते हैं, इन सब उपलब्धियों का श्रेय मेरी पत्नी को जाता है। वहीं उनके साथ टूर्नामेंट में जाती है और उनकी पढ़ाई से लेकर खेल तक सारी चीजें व्यवस्थित करती है।
6 साल में बहन ने शुरू किया खेलना
इस बारे में 19 वर्षीय महिला ग्रैंडमास्टर वैशाली कहती हैं, मुझे याद है कि मैं जब 6 साल की थी तब बहुत कार्टून देखती। इस आदत को छुड़ाने के लिए मेरे माता-पिता ने शतरंज और ड्रॉइंग क्लास में भेजना शुरू किया। धीरे-धीरे खेल में मजा आने लगा और प्रगा भी रुचि लेने लगा।
कार्लसन पर जीत से बढ़ा आत्मविश्वास
प्रगा के कोच आर बी रमेश कहते हैं, जब कोविड के कारण सभी टूर्नामेंट पर रोक लगी तब एक लंबे अंतराल के कारण प्रगा का विश्वास प्रभावित हुआ, लेकिन कार्लसन पर जीत के बाद यकीनन उसके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। मुझे उसकी उपलब्धि पर गर्व है।
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रविवार को प्रगनाननंदा ने विश्व नंबर 1 शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को जब 39 चाल में मात दी तो वह ऐसा करने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए। उनसे पहले विश्वनाथन आनंद और पी हरिकृष्णा ने नॉर्वे के सुपरस्टॉर को हरा चुके हैं। प्रगनाननंदा की यह यात्रा तब शुरू हुई, जब अधिकांश बच्चे के जीवन में कोई उद्देश्य नहीं होता।
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पोलियोग्रस्त बैंक कर्मचारी रमेश बाबू कहते हैं, जब मैं और मेरी पत्नी नागालक्ष्मी ने देखा कि बेटी वैशाली दिनभर टीवी देखती रहती है तो उसकी यह आदत छुड़ाने के लिए उसे शतरंज से परिचित कराया। लेकिन हम नहीं जानते थे कि यह खेल प्रगा को प्रेरित करेगा। बेटी के शौक की वजह से प्रगा में खेल के प्रति दिलचस्पी बनी और परिणाम आपके सामने है। मुझे खुशी है कि मेरे दोनों बच्चो को यह खेल पसंद आया और उसमें आगे बढ़ने का फैसला किया। साथ ही वे इस खेल का लुत्फ भी उठा रहे हैं।
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पिता ने प्रगा की मां को दिया उपलब्धियों का श्रेय
रमेश बाबू कहते हैं, इन सब उपलब्धियों का श्रेय मेरी पत्नी को जाता है। वहीं उनके साथ टूर्नामेंट में जाती है और उनकी पढ़ाई से लेकर खेल तक सारी चीजें व्यवस्थित करती है।
6 साल में बहन ने शुरू किया खेलना
इस बारे में 19 वर्षीय महिला ग्रैंडमास्टर वैशाली कहती हैं, मुझे याद है कि मैं जब 6 साल की थी तब बहुत कार्टून देखती। इस आदत को छुड़ाने के लिए मेरे माता-पिता ने शतरंज और ड्रॉइंग क्लास में भेजना शुरू किया। धीरे-धीरे खेल में मजा आने लगा और प्रगा भी रुचि लेने लगा।
कार्लसन पर जीत से बढ़ा आत्मविश्वास
प्रगा के कोच आर बी रमेश कहते हैं, जब कोविड के कारण सभी टूर्नामेंट पर रोक लगी तब एक लंबे अंतराल के कारण प्रगा का विश्वास प्रभावित हुआ, लेकिन कार्लसन पर जीत के बाद यकीनन उसके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। मुझे उसकी उपलब्धि पर गर्व है।