किसान पिता के जुनूनी बेटे की कहानी, 23 की उम्र में दिग्गजों को याद दिलाई नानी
हरियाणा के लोग अपनी सभ्यता, परंपरा और मेहनत के बीज को कुछ यूं बोते हैं, कि पूरा देश तरक्की से हरा-भरा हो जाता है। खेलों में तो इस राज्य का कोई सानी नहीं। कुश्ती हो या फिर मुक्केबाजी यहां के लाल अपने पसीन से कभी दंगल को सींचते हैं तो कभी अपने दमदार पंच से दुनियाभर में तिरंगे का मान बढ़ाते हैं। रूस के एकातेरिनबर्ग में खेले जा रहे वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शनिवार को अमित पंघाल ने भी कुछ ऐसा ही किया।
16 अक्टूबर 1995 को हरियाणा के रोहतक जिले में जन्में अमित बॉक्सिंग के इस सबसे बड़े इवेंट के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। 52 किग्रा फ्लाईवेट कैटेगिरी के सेमीफाइनल में पंघाल ने एक कांटे के मुकाबले में 3-2 से मात देते हुए यह कमाल किया। अब अमित फाइनल में शनिवार को उजबेकिस्तान के मुक्केबाज शाखोबिदीन जोइरोव से जीतने में कामयाब हो जाते हैं तो भारतीय बॉक्सिंग इतिहास का नया अध्याय लिख जाएगा।
कौन हैं अमित पंघाल और क्या है इनकी संघर्ष की कहानी...
अमित का जन्म हरियाणा में रोहतक जिले के मयाना गांव में हुआ। पिता विजेंदर सिंह पेशे से किसान हैं। घर में बचपन से ही उन्हें मुक्केबाजी का माहौल मिला। बड़े भाई अजय बॉक्सिंग किया करते थे। बताया जाता है कि बड़े भाई अजय ने ही अमित को बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया। बड़े भाई अजय सेना में हैं।
अमित ने भी उनकी सलाह को मानते हुए जी-तोड़ मेहनत की और देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस सफलता का पहला श्रेय अमित अपने अग्रज को ही देते हैं। बकौल अमित, 'मेरे बड़े भाई अजय श्रेय के हकदार हैं। वह वास्तव में मेरे लिए सबसे अच्छे कोच हैं। वह हमेशा मेरे लिए रणनीति बनाते और मैं कोशिश करता हूं कि हर मुकाबले से पहले उनसे बात करूं।
अजय खुद एक बेहतरीन मुक्केबाज थे, लेकिन परिवार दोनों भाईयों में से किसी एक ही ट्रेनिंग का खर्च वहन कर सकता था, तब वह अजय ही थे, जिन्होंने सामने आकर अपने छोटे भाई अमित को प्रशिक्षण दिलाने पर जोर दिया।
फर्श से अर्श तक का सफर
अमित पंघाल की सबसे बड़ी उपलब्धि 2017 में आई, जब उन्होंने राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक हासिल किया, लेकिन प्रसिद्धि मिलनी अभी बाकी थी। 2017 में एशियन चैंपियनशिप का कांस्य पदक जीतते ही वह मीडिया की सुर्खियां बन चुके थे। उस एशियाई चैम्पियनशिप के पदक ने उन्हें विश्व चैंपियनशिप में क्वालीफाई करवा दिया, जहां उन्हें हसनबॉय दुश्मातोव ने क्वार्टरफाइनल में हराया था। उस हार ने पंघाल को और मजबूती से वापसी करने के लिए तैयार किया।
अब मौका था 2018 राष्ट्रमंडल खेल, जहां अमित ने रजत पदक जीता। उसी साल हुए एशियाई खेलों में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप की हार का बदला ले लिया। 49 किलोग्राम भारवर्ग में रियो ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट उजबेकिस्तान के दुश्मातोव को धुनते हुए भारत के लिए 14वां गोल्ड हासिल किया।
भारतीय सेना में कार्यरत अमित
भारतीय सेना में नाएब सूबेदार के पद पर तैनात अमित पंघाल ओलंपिक 2020 में भारत के मेडल की बड़ी आस बनकर उभरे हैं। भारतीय मुक्केबाजी में पंघाल के ऊपर चढ़ने का ग्राफ शानदार रहा है जिसकी शुरूआत 2017 एशियाई चैम्पियनशिप में 49 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक से हुई थी। वह इसी साल विश्व चैम्पियनशिप में पदार्पण करते हुए क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे थे और फिर उन्होंने बुल्गारिया में प्रतिष्ठित स्ट्रांदजा मेमोरियल में लगातार स्वर्ण पदक हासिल किए और फिर वह 2018 में एशियाई चैम्पियन बने।
पंघाल इकलौते भारतीय मुक्केबाज है जिसने यूरोप के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्रतियोगिता स्ट्रांदजा मेमोरियल में लगातार दो बार स्वर्ण पदक हासिल किया। इस साल उन्होंने एशियाई चैम्पियनशिप का स्वर्ण अपने नाम कर किया और फिर 49 किग्रा के ओलंपिक कार्यक्रम से हटने के बाद 52 किग्रा में खेलने का फैसला किया।
गोल्ड लाने का किया वादा
फाइनल में पहुंचने के बाद पंघाल काफी खुश हैं, लेकिन यह भी मानना है कि अभी उनका काम पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘आज जिस मुक्केबाज से मेरा सामना था वह मुझ से लंबा था, लेकिन उसके पंच में मेरी तरह दमखम नहीं था। कल जिस मुक्केबाज से मुझे भिड़ना है मुझे उसके बारे में कुछ नहीं पता। मैं पहले कभी उसके खिलाफ रिंग में नहीं उतरा हूं। मैं पुराने वीडियो देखकर मुकाबले की तैयारी करूंगा।’
पंघाल ने कहा, ‘मैंने सामंजस्य बैठा लिया है। मुझे अपने पंच में दमखम की जरूरत थी जो मैंने किया। मैं सही दिशा में आगे बढ़ रहा हूं लेकिन अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ है।’ अब, अगर वह शनिवार को विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत लेते हैं तो ऐसा करने वाले भारत के पहले मुक्केबाज बन जाएंगे।