फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Other Sports ›   Father grazing sheep and son made wrestling champion

पिता ने चराई भेड़-बकरियां, बेटे को बनाया कुश्ती चैंपियन, दंगल के पैसे से चलता था घर

Mon, 25 Jan 2021 09:32 AM IST
Kuldeep Singh हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 25 Jan 2021 09:32 AM IST
विज्ञापन
Father grazing sheep and son made wrestling champion
Wrestler Rohit - फोटो : twitter

एक शहर से दूसरे शहर घूम-घूमकर भेड़ और बकरियों का झुंड चराने वाले दलेल सिंह खुद भूखे रह लिए, लेकिन बेटे को बड़ा पहलवान बनाने के लिए न उसे भूखा रखा और न ही भेड़-बकिरयों के पास फटकने दिया। अनुसूचित जनजाति घुमंतु से संबंधित दलेल सिंह के त्याग को उनके बेटे रोहित ने रविवार को सफल कर दिया।

विज्ञापन


घुमंतु अनुसूचित जनजाति के रोहित 65 किलो में बने राष्ट्रीय चैंपियन
हरियाणा के रोहित ने राष्ट्रीय फ्रीस्टाइल कुश्ती के 65 किलो भार वर्ग के फाइनल में जूनियर एशियाई चैंपियन सरवन को परास्त कर अपने पिता को बेशकीमती तोहफा दे डाला। यही नहीं मिट्टी के दंगल से पैसे कमाकर घर को देने वाले रोहित के इस स्वर्ण ने उनकी नौकरी का रास्ता भी खोल दिया। नेवी कोच कुलदीप सिंह ने खुलासा किया कि रोहित को वह अपनी टीम में लेने की तैयारी कर रहे हैं।
विज्ञापन


दंगल के पैसे से चलता था घर
बिजवासन गांव के रहने वाले दलेल सिंह खुलासा करते हैं कि उनके सात बेटों में रोहित छठे नंबर का है। गांव में भोलू पहलवान की वजह से उन्हें इस खेल में शौक था। वह भेड़ बकरियां का झुंड इधर-उधर ले जाते थे लेकिन बच्चों को पहलवान बनाने का मन था। उन्होंने सभी बच्चों को भोलू पहलवान के पास डाल दिया। सपना यही था कि बच्चे बड़े पहलवान निकलें, लेकिन सभी मिट्टी की कुश्ती लडने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


दंगल से जो पैसा मिलता वह घर पर लगाया जाता। एशियाई कैडेट कुश्ती में कांस्य जीतने वाले रोहित के मुताबिक उन्होंने 2015 में मैट की कुश्ती को अपनाया। दंगल से भी ज्यादा पैसे नहीं मिल पा रहे थे। बाद में वह जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन भी बने। रोहित के मुताबिक अब उन्होंने पिता का भेड़ बकरियों का काम छुड़वा दिया है। दलेल कहते हैं कि उनका सपना तभी पूरा होगा जब रोहित देश की सीनियर टीम में खेले और पदक लाए। 

रेलवे बना विजेता
चैंपियनशिप के अंतिम दिन रेलवे के पहलवानों का दबदबा रहा। रेलवे ने 192 अंकों के साथ टीम चैंपियनशिप जीती। सेना दूसरे और हरियाणा तीसरे स्थान पर रहा। 97 किलो में रेलवे के सत्यवर्त कादियां ने सेना के मोनू को हराकर स्वर्ण जीता। 86 में दिल्ली के प्रवीण चाहर ने महाराष्ट्र के वेतल को 79 में रेलवे के राहुल राठी ने अपने ही साथी प्रीतम को और 70 किलो में रेलवे के विशाल कालीरमन ने अपने ही साथी प्रवीण को हराकर स्वर्ण पदक जीता।


इससे पहले साई ने दर्शकों के सामाजिक दूरी के कोरोना नियमों को तोडने पर कुश्ती संघ से स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही आईओए से कहा कि खेल संघों से नियमों का पालन सुनिश्चित करवाएं। मना करने के बावजूद आज भी दर्शक पास-पास बैठे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed