फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Other Sports ›   when wrestler sakshi malik bring pride in olympic for india

साक्षी मलिक का कमाल, 2016 ओलंपिक में जब पहली बार लहराया तिरंगा 

Sun, 13 Aug 2017 06:26 PM IST
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र Updated Sun, 13 Aug 2017 06:26 PM IST
विज्ञापन
when wrestler sakshi malik bring pride in olympic for india
साक्षी मलिक - फोटो : bbc.com
पिछले ओलंपिक खेलों में भारत का हर खिलाड़ी लगातार हारता जा रहा था। देश मायूस हो गया ‌था। खेल प्रेमियों को लग रहा था कि वह इस बार लंदन ओलंपिक जैसा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। तभी हरियाणा की बेटी साक्षी मलिक ने ब्राजील के रियो में कमाल कर दिया और भारत की झोली में पहला पदक आखिर आ ही गया। महिलाओं की फ्रीस्टाइल कुश्ती में साक्षी ने कांस्य पदक जीत देश को गौरव से भर दिया था। साक्षी का यह पदक बहुत मायने रखता था क्योंकि इससे पहले महिला कुश्ती में भारत को कोई भी पदक नहीं ‌मिला था। 
विज्ञापन

ओलंपिक क्वालीफाइंग में साक्षी का नाम ही नहीं था

when wrestler sakshi malik bring pride in olympic for india
Sakshi Malik In Chandigarh
साक्षी की जीत आश्चर्य से भरने वाली इसलिए थी क्योंकि ओलंपिक क्वालीफाइंग की सूची में साक्षी का नाम ही नहीं था। इसके बाद भी साक्षी ने दम दिखा पदक जीता। दिल्ली में डीटीसी में बस कंडक्टर की बेटी ने अपनी जीत से देश की हर बेटी को प्रेरणा से भर दिया। 2012 के लंदन ओलंपिक में देश की पहली महिला रेसलर गीता फौगाट मंगोलिया में ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में कांस्य के लिए बाउट में नहीं उतरीं। इसलिए वह अयोग्य घोषित हो गईं। ऐसे में साक्षी को मौका मिला क्योंकि साक्षी 58 किग्रा भार वर्ग में ही खेलती थीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी और साक्षी रेसलर बन गईं  

when wrestler sakshi malik bring pride in olympic for india
Sakshi Malik
साक्षी मलिक को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी। बस और क्या था साक्षी ने इसके बाद पहलवान बनने की ठान ली। कांस्य पदक जीतने के बाद परिजनों ने अब साक्षी मलिक से अगले ओलंपिक में सोने की उम्मीद रखी है। साक्षी ने ओलंपिक के अलावा 2014 के राष्ट्रमंडल खेल में ग्लासगो में रजत पदक जीता था। 3 सितंबर, 1992 को हरियाणा के रोहतक के गांव मोखरा में जन्मीं साक्षी की मां सोचती थी कि बेटी पढ़ लिखकर अधिकारी बने। मां सोचती थी कि पहलवानों में दिमाग कम होता है। लिहाजा पढ़ाई पर ध्यान दिया जाना चाहिए। लेकिन साक्षी ने साहस और कड़े अभ्यास से मां को उसकी सोच से विपरीत चलकर भी खुश कर दिया और देश को गौरवान्वित कर दिया।  
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed