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क्या होता है रेपचेज, हारकर भी कैसे पदक जीतीं साक्षी
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 20 Aug 2016 04:24 PM IST
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साक्षी मलिक
- फोटो : getty
क्वार्टर फाइनल मुकाबले में रूसी पहलवान से हारने के बावजूद साक्षी मलिक रिपचेज राउंड के जरिए ओलंपिक कांस्य पदक जीतने में सफल हुईं। यह कैसे संभव हुआ ? क्या है यह रेपचेज राउंड?
कुश्ती की सपर्धाओं में रेपचेज ऐसा फॉर्मेट है जो शुरुआती दौर में हारने वाले पहलवानों को वापसी का मौका देता है।
इसका नियम यह है कि फाइनल में पहुंचने वाले दो पहलवानों ने जिन प्रतिभागियों को नॉकआउट दौर में हराया या मात दी है उन खिलाड़यों को रेपचेज राउंड के जरिए कांस्य पदक जीतने का मौका मिलता है।
कुश्ती में दो कांस्य पदक दिए जाते हैं और ये उन दो पहलवानों को दिए जाते हैं जो फाइनल में पहुंचने वाले पहलवान के सबसे मजबूत प्रतिद्वंदी साबित होते हैं।
पहले दौर में फाइनलिस्ट से हारने वाला खिलाड़ी दूसरे दौर में हारने वाले खिलाड़ी से लड़ता है। इन दोनों में से जो जीतता है वह अगले दौर में हारने वाले खिलाड़ी से लड़ता है। अंत में जो-जो खिलाड़ी विजयी होते हैं उन्हें कांस्य पदक दिया जाता है।
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सुशील और योगेश्वर ने भी रेपचेज में जीते थे पदक
कहते हैं इतिहास अपने को दोहराता है। बीजिंग ओलंपिक में जब भारत के सुशील कुमार ने देश को 56 साल बाद पदक दिलाया था तब वह भी रेपचेज में ही जीते थे।
2012 में लंदन ओलंपिक में योगेश्वर दत्त ने भी रेपचेज में ही पदक जीता था। साक्षी ने भी रेपचेज राउंड में जीत दिलाकर भारतीय महिला पहलवानी में नई क्रांति का बिगुल बजा दिया है।
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कुश्ती की सपर्धाओं में रेपचेज ऐसा फॉर्मेट है जो शुरुआती दौर में हारने वाले पहलवानों को वापसी का मौका देता है।
इसका नियम यह है कि फाइनल में पहुंचने वाले दो पहलवानों ने जिन प्रतिभागियों को नॉकआउट दौर में हराया या मात दी है उन खिलाड़यों को रेपचेज राउंड के जरिए कांस्य पदक जीतने का मौका मिलता है।
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कुश्ती में दो कांस्य पदक दिए जाते हैं और ये उन दो पहलवानों को दिए जाते हैं जो फाइनल में पहुंचने वाले पहलवान के सबसे मजबूत प्रतिद्वंदी साबित होते हैं।
पहले दौर में फाइनलिस्ट से हारने वाला खिलाड़ी दूसरे दौर में हारने वाले खिलाड़ी से लड़ता है। इन दोनों में से जो जीतता है वह अगले दौर में हारने वाले खिलाड़ी से लड़ता है। अंत में जो-जो खिलाड़ी विजयी होते हैं उन्हें कांस्य पदक दिया जाता है।
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सुशील और योगेश्वर ने भी रेपचेज में जीते थे पदक
कहते हैं इतिहास अपने को दोहराता है। बीजिंग ओलंपिक में जब भारत के सुशील कुमार ने देश को 56 साल बाद पदक दिलाया था तब वह भी रेपचेज में ही जीते थे।
2012 में लंदन ओलंपिक में योगेश्वर दत्त ने भी रेपचेज में ही पदक जीता था। साक्षी ने भी रेपचेज राउंड में जीत दिलाकर भारतीय महिला पहलवानी में नई क्रांति का बिगुल बजा दिया है।