टोक्यो ओलंपिक: नीरज ने स्वर्ण पदक मिल्खा सिंह को समर्पित किया, कहा- वे स्वर्ग से आज मुझे देख रहे होंगे
कामयाबी की नई इबारत लिखने वाले नीरज ने अपने गोल्ड मेडल को भारत के महान धावक दिवंगत मिल्खा सिंह को समर्पित किया।
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भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा शनिवार को टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। एथलेटिक्स में भारत का यह पहला मेडल है। इस गोल्ड के साथ नीरज ने 'फ्लाइंग सिख' का सपना साकार किया। कामयाबी की नई इबारत लिखने वाले नीरज ने अपने गोल्ड मेडल को भारत के महान धावक दिवंगत मिल्खा सिंह को समर्पित किया। गोल्ड जीतने के बाद नीरज ने कहा, 'मैं अपने गोल्ड मेडल को महान धावक मिल्खा सिंह को समर्पित करता हूं। वे शायद मुझे स्वर्ग से देख रहे होंगे। मैं पदक के साथ मिल्खा सिंह से मिलना चाहता था। विश्वास नहीं हो रहा। पहली बार है जब भारत ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता है इसलिए मैं बहुत खुश हूं। हमारे पास अन्य खेलों में ओलंपिक का एक ही गोल्ड है।'
मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा ने नीरज का शुक्रिया अदा किया
मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह ने ट्वीट कर नीरज का शुक्रिया अदा किया। उन्होंनो कहा, आपने (नीरज) न केवल हमें ओलंपिक खेलों में पहली बार एथलेटिक्स का स्वर्ण पदक दिलाया बल्कि आपने इसे मेरे पिता को भी समर्पित किया। मिल्खा परिवार इस सम्मान के लिए सदा आभारी रहेगा।'
Not only did you win us a first-ever athletics gold medal in the #OlympicGames, you even dedicated it to my father.
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The Milkha family is eternally grateful for this honour. pic.twitter.com/0gxgF8mmNQ — Jeev Milkha Singh (@JeevMilkhaSingh) August 7, 2021
मिल्खा सिंह की रफ्तार की दुनिया थी दीवानी
एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स में एक गोल्ड मेडल जीतने वाले मिल्खा सिंह की रफ्तार की दीवानी दुनिया थी। फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर इस धावक को दुनिया के हर कोने से प्यार और समर्थन मिला। मिल्खा का जन्म अविभाजित भारत (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था, लेकिन वह आजादी के बाद हिंदुस्तान आ गए थे। मिल्खा की प्रतिभा और रफ्तार का यह जलवा था कि उन्हें पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें 'फ्लाइंग सिख' की उपाधि से नवाजा था। इसके बाद से मिल्खा सिंह को पूरी दुनिया में 'फ्लाइंग सिख' के नाम से जाना जाने लगा।
एथलेटिक्स में कोई भी भारतीय गोल्ड जीते, यह थी ख्वाहिश
बता दें कि 'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह की ख्वाहिश थी कि ओलंपिक में एथलेटिक्स में कोई भी भारतीय गोल्ड जीते। मालूम हो कि मिल्खा सिंह ने मेलबर्न ओलंपिक (1956), रोम ओलंपिक (1960) और टोक्यो ओलंपिक (1964) में हिस्सा लिया था, लेकिन वे पदक नहीं जीत सके थे। उन्होंने रोम ओलंपिक में 400 मीटर रेस में हिस्सा लिया था, लेकिन पदक जीतने से सेकंड के दसवें हिस्से से चूक गए थे और चौथे स्थान पर रहे थे।