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'गोल्डन' मुक्केबाज बेटियां: दादी स्वर्ग सिधारीं, चाची की मौत हो गईं पर नहीं गया कोई घर
Sat, 24 Apr 2021 01:40 PM IST
अंशुल तलमले
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
Published by: अंशुल तलमले
Updated Sat, 24 Apr 2021 01:40 PM IST
सार
- दादी के बेहद करीब थीं पानीपत की विंका
- तैयारियों के लिए शिविर में रहीं पर संस्कार में नहीं गईं
- प्रशिक्षकों ने छह माह घर का नहीं देखा मुंह
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कोच भास्कर के साथ गोल्ड जीतने के बाद विंका
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
किसी की दादी स्वर्ग सिधार गईं तो किसी की चाची की मृत्यु हो गई, एक महिला कोच की शादी हुए कुछ समय बीता था, लेकिन वह ससुराल नहीं जा सकीं। मां-बाप अपनी बेटियों से मिलने को आतुर थे, लेकिन विश्व युवा मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण लाने की तैयारियों के लिए कोई घर नहीं गया। बेटियों की तपस्या आखिर रंग लाई। अक्तूबर से नेशनल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस रोहतक में तैयारियां कर रहीं बेटियों को स्वर्ण पदक के साथ अब अपने घर जाना नसीब होगा।
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स्वर्ण के साथ मां-बाप से मिलेंगी बेटियां
पोलैंड में मौजूद टीम के चीफ कोच पिथौरागढ़ के भास्कर भट्ट की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। भास्कर खुलासा करते हैं कि लॉकडाउन के बाद चैंपियनशिप की तैयारियों को शिविर बायो सिक्योर बबल में लगाया गया। बॉक्सर हों या सपोर्ट स्टाफ या फिर कोच किसी को घर जाने की इजाजत नहीं थी। कोरोना के चलते जोखिम नहीं लिया जा सकता था। मुश्किल उस वक्त खड़ी हुई जब 60 किलो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पानीपत की विंका की जनवरी माह में दादी की मृत्यु हो गई।
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दादी के बेहद करीबी थीं विंका
विंका का अपनी दादी से बेहद लगाव था। वह उन्हें अपनी प्रेरणास्रोत मानती थीं, लेकिन विंका ने इस चैंपियनशिप में स्वर्ण लाने के लिए घर नहीं जाने का फैसला लिया। वह दादी की यादों को ढाल बनाकर प्रैक्टिस में जुट गईं। आखिर उनका त्याग रंग लाया। भास्कर के मुताबिक ऐसा ही कोच सुंदर सिंह के साथ हुआ। इसी दौरान उनकी चाची की मृत्यु हो गई। स्थितियां ऐसी थीं कि उनका जाना जरूरी था, लेकिन टीम के लिए वह नहीं गए।
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मां-बाप से कहा स्वर्ण चाहिए तो यहीं रहने दो
भास्कर के मुताबिक सारी बेटियां 20 से कम उम्र की हैं। इस उम्र में घर से छह माह अलग रहना आसान नहीं है। मां-बाप मिलने की इच्छा जताते तो उनसे यही कहा गया कि विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण चाहिए तो इन्हें यहीं छोड़ दो। बेटियों को घर की याद आई तो वीडियो कॉल के जरिए उनसे बात करा दी जाती थी, लेकिन उन्हें शिविर में नहीं आने दिया गया। कोच प्रवीण कलकल की तो शादी हुए कुछ ही समय हुआ है। उनकी ससुराल पास में ही भिवानी में है, वह भी वहां नहीं गईं। भास्कर खुलासा करते हैं कि अब बेटियां और सपोर्ट स्टाफ मेडल और गौरव के साथ अपने घरों को जाएंगे।