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ओलंपिक में अपने हक के लिए हाईकोर्ट पहुंचे सुशील कुमार

Mon, 16 May 2016 07:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली Updated Mon, 16 May 2016 07:53 PM IST
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Still holding on to hope, Sushil moves Delhi High Court

आखिरकार पहलवान सुशील कुमार ने नर सिंह यादव के साथ ट्रायल कराने के लिए अदालत की शरण ले ली। पहले भारतीय कुश्ती संघ और बाद में खेल मंत्रालय की ओर से इस मामले पर पल्ला झाडने के बाद सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को याचिका दाखिल कर दी, जिसमें रियो ओलंपिक में खेलने के लिए 74 किलो भार वर्ग में नर सिंह यादव के साथ ट्रायल कराने की अपील की गई है। मामले पर सुनवाई जस्टिस मनमोहन की ओर से मंगलवार को की जाएगी।

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अमर उजाला की ओर से इस बात का खुलासा शुक्रवार को ही कर दिया गया था कि सुशील राहत नहीं मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। वही हुआ, ट्रायल केलिए सुशील की ओर से खेल मंत्री से लेकर पीएमओ, साई डीजी और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को पत्र लिखे जाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। बीते तीन दिनों के दौरान सुशील ने खेल मंत्री से मिलने की कोशिशें कीं, लेकिन बात नहीं बनी।
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खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने पहले ही साफ कर दिया था कि चयन का अधिकार फेडरेशन के पास है और मंत्रालय इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। बृज भूषण की ओर से कहा गया कि जब तक खेल मंत्रालय उनसे ट्रायल कराने के लिए नहीं कहेगा तब तक उनका फैसला रियो के लिए कोटा हासिल करने वाले नर सिंह यादव के पक्ष में रहेगा। सोमवार की सुबह जब खेल मंत्री ने पटियाला में फिर वही हस्तक्षेप नहीं करने की पुरानी बात दोहराई। उसके बाद ही सुशील ने अदालत की शरण ले ली।

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अदालत ने माना सुशील सही

Still holding on to hope, Sushil moves Delhi High Court

अदालत में दाखिल याचिका में कहा गया है कि नियमों के अनुसार पहलवानों की ओर से हासिल किया गया कोटा देश का होता है। वह दो बार के ओलंपिक पदक विजेता हैं और कई माह से ओलंपिक की तैयारियों में जुटे हैं। वह सिर्फ ट्रायल की मांग कर रहे हैं। दोनों में जो जीते उसे ही रियो का टिकट दिया जाए। इसके बाद मामले की सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई।

भारतीय कुश्ती संघ की ओर से कहा गया है कि उन्हें अब तक अदालत से नोटिस नहीं मिला है। नोटिस मिलने पर उनकी ओर से इस मामले पर फेडरेशन का पक्ष रखा जाएगा। दरअसल फेडरेशन को उम्मीद है कि साल 2004 में दिझ्ल्ली हाईकोर्ट की ओर से ही ओलंपिक कोटा हासिल करने वाले योगेश्वर दत्त के पक्ष में फैसला आ चुका है। तब कोटा हासिल करने वाले योगेश्वर के चयन को कृपाशंकर पटेल ने अदालत में चुनौती देते हुए ट्रायल की मांग की थी।

अदालत ने उस दौरान योगेश्वर के चयन को सही ठहराने का फैसला सुनाया था। वहीं सुशील के ससुर सतपाल का कहना है कि उनके पास अदालत जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है कि दो बार के ओलंपिक पदक विजेता को इस तरह ट्रायल के लिए अदालत जाना पड़ रहा है।

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