{"_id":"5d51d27c8ebc3e6d206df27c","slug":"sports-ministry-ordered-sports-associations-sai-centers-to-tutor-in-national-camps","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल मंत्रालय ने खेल संघों, साई सेंटरों को नेशनल कैंप में ट्यूटर लगाने के दिए आदेश","category":{"title":"Other Sports","title_hn":"अन्य खेल","slug":"other-sports"}}
खेल मंत्रालय ने खेल संघों, साई सेंटरों को नेशनल कैंप में ट्यूटर लगाने के दिए आदेश
Tue, 13 Aug 2019 02:26 AM IST
Mukesh Jha
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
Published by: Mukesh Jha
Updated Tue, 13 Aug 2019 02:26 AM IST
विज्ञापन
Kiren Rijiju
- फोटो : social media
भारतीय खेलों में एक नहीं अनेक उदाहरण मिलेंगे जहां खेलों की तैयारियों के लिए न चाहते हुए भी पढ़ाई का त्याग करना पड़ा। खेल मंत्रालय के संज्ञान में जब ऐसे मामले आए तो उसने ऐसा कदम उठा डाला जो आज तक भारतीय खेलों के इतिहास में नहीं उठाया गया।
विज्ञापन
अब चाहें तैयारी ओलंपिक की हों या एशियन गेम्स या फिर किसी अंतरराष्ट्रीय सीनियर या जूनियर कंपटीशन की खाली समय में पढ़ाई की तैयारी का भी मौका मिलेगा। नेशनल कैंप में खेलों की तैयारियों के साथ खिलाडिय़ों को गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे विषयों की ट्यूशन उपलब्ध कराई जाएगी। ट्यूशन का सारा भार मंत्रालय उठाएगा जो खेल संघों के खर्च में जोड़ा जाएगा। मंत्रालय ने यह कदम उठाने के लिए खेल संघों और अपने साई सेंटरों को आदेश भी दे दिए हैं।
विज्ञापन
गर्मियों में तीन सर्दियों में डेढ़ माह के कैंप लगेगी ट्यूशन
मंत्रालय ने सभी खेल संघों को साफ किया है कि गर्मियों में तीन माह की अवधि और सर्दियों में डेढ़ माह की अवधि वाले नेशनल कैंपों में जरूरतमंद खिलाडिय़ों के लिए उनकी मांग के अनुसार ट्यूशन उपलब्ध कराई जाएगी। ट्यूटर लगवाने का जिम्मा खेल संघों और साई सेंटरों का होगा। ट्यूटर का अधिकतम खर्च 15 हजार रुपये प्रति माह तक होगा। यही नहीं खेल मंत्रालय खिलाडिय़ों के लिए ट्यूटर उपलब्ध कराने को खेल संघों से अंडर टेकिंग भी ले रहा है। हालांकि खेल संघों का कहना है कि जो खिलाड़ी नेशनल कैंप में ट्यूशन लगवाने को कहेंगे उन्हें ट्यूटर उपलब्ध कराए जाएगा।
विज्ञापन
खिलाडियों की परीक्षाएं छूटना है आम बात
एशियाई खेलों का गोल्ड जीतने वाले शूटर सौरभ चौधरी हों या फिर माकरन कप में गोल्ड जीतने वाले बॉक्सर दीपक भोरिया। दोनों को ही खेलों की तैयारियों के चलते अपनी परीक्षाओं को छोडना पड़ा। सौरभ ओलंपिक क्वालिफायर वल्र्ड कप की तैयारियों के लिए दसवीं की परीक्षाएं नहीं दे पाए, जबकि दीपक कंपटीशनों की तैयारियों के चलते पिछले दो बार से परीक्षाएं नहीं दे पा रहे हैं। भारतीय खेलों की दुनिया में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं।
खिलाडियों से बात की तो पता लगा पढ़ाई का
दरअसल यह कदम उठाने का फैसला खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने लिया है। उन्होंने अमर उजाला से खुलासा किया कि जब उन्होंने साई के रीजनल सेंटरों और ट्रेनिंग सेंटरों का दौरा किया तो खिलाडिय़ों से उनकी पढ़ाई के बारे में बात हुई। इस बातचीत में पता लगा कि खेलों में करियर बनाने के चलते इन खिलाडिय़ों की पढ़ाई बुरी तरह बाधित हो रही है। इतना ही कई तो पढ़ाई तक छोड़ दे रहे हैं। तभी उनके दिमाग में खेलों की तैयारियों के दौरान खिलाडिय़ों को ट्यूशन उपलब्ध कराने का विचार आया। फिर जितने भी विकसित देश हैं वहां खेल और पढ़ाई साथ-साथ चलती है।