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एशियन गेम्स 2018: कर्ज के पिस्टल से सोने पर निशाना साध सौरभ ने किया पिता का सपना पूरा

Wed, 22 Aug 2018 05:06 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 22 Aug 2018 05:06 AM IST
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saurabh chaudhary clinched gold medal in asian games 2018
सौरभ चौधरी

किसान जगमोहन सिंह के बेटे सौरव चौधरी ने इंडोनेशिया में जिस पिस्टल से निशाना साधा उसे पिता ने कर्ज लेकर खरीदा था। बेटे ने भी पिता को निराश नहीं किया बल्कि ऐसा तोहफा दिया जो ताउम्र उन्हें याद रहेगा। वह कहते हैं कर्ज लेकर दो साल पहले ही पौने दो लाख रुपये की नई पिस्टल खरीदकर सौरव को दी थी। इसके लिए बैंक से दो लाख रुपये का लोन लिया है। यह लोन अभी तक चुकाया नहीं है। बेटे ने वह कर दिखाया जो सपने में भी नहीं सोचा था।

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आज दुनिया मुझे सौरव के पिता के नाम से जान रही है। एक पिता के लिए इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है। रही बात कर्ज की तो वह अब धीरे-धीरे चुकता हो जाएगा। बेटे की मेहनत रंग ला रही है। मां ब्रजेश देवी कहती हैं कि मेरे पास अपनी खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं है। उसने ऐसा तोहफा दिया है जो ताउम्र याद रहेगा।

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सरकार से नाखुश पिता

saurabh chaudhary clinched gold medal in asian games 2018
saurabh chaudhary

उत्तर प्रदेश सरकार ने सौरव को 50 लाख रुपये और नौकरी देने की घोषणा की है। पर सौरव के पिता इससे खुश नहीं हैं। वह कहते हैं यह तो ऊंट के मुंह में जीरा है। हरियाणा सरकार जहां अपने स्वर्ण पदक विजेताओं को तीन करोड़ रुपये दे रही है वहीं यूपी सरकार खिलाड़ियों से मजाक कर रही है। इससे खिलाड़ियों में निराशा है। सरकार को तो खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाना चाहिए।

स्वर्ण पदक विजेता को कम से कम पांच करोड़ रुपये देने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब यूपी सरकार की तरफ से उन्हें कोई इनाम देने की घोषणा की गई। इससे पहले सौरव ने जूनियर स्तर पर भी विश्व चैंपियनशिप में रिकॉर्ड के साथ तीन स्वर्ण पदक जीते पर किसी ने याद तक नहीं किया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई पदक जीत चुका है पर बधाई के दो शब्द तक किसी ने नहीं बोले।

ऑटो से 15 किमी जाते हैं अभ्यास के लिए

saurabh chaudhary clinched gold medal in asian games 2018
सौरभ चौधरी

सौरव अपने घर से रोजाना 15 किमी का सफर तय कर अभ्यास के लिए बड़ौत के बिनौली रेंज में जाते हैं। सात से आठे घंटे रेंज में कड़ा अभ्यास करते हैं। उसके बाद शाम को घर में आकर अभ्यास करते हैं। घर के तीन कमरे में इसमें एक में परिजन रहते हैं और एक में सौरव के लिए छोटी सी रेंज बना रखी है जिसमें वह अभ्यास करते हैं।

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मेलों में गुब्बारों पर साधते थे निशाना

saurabh chaudhary clinched gold medal in asian games 2018
सौरभ चौधरी

सौरव के बड़े भाई नितिन ने कहा कि उसे बचपन से ही निशानेबाजी का शौक था। वह गांव और आसपास में लगने वाले मेलों में जाकर गुब्बारों पर निशाना लगाते थे और इनाम जीतते थे। 2015 में 15 साल की उम्र में निशानेबाजी का अभ्यास शुरू किया। इसके बाद से उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

कोच की गन से जीता था पहला स्वर्ण
सौरव शुरू में अपने कोच अमित श्योराण की पिस्टल से ही अभ्यास करते थे। यही नहीं उन्होंने अपना पहला स्वर्ण पदक राज्य स्तर पर कोच की ही पिस्टल से ही जीता था।

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