अब संजीता के अर्जुन अवार्डी बनने का रास्ता साफ, जल्द ही खेल मंत्रालय कर सकता है घोषणा
- अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग संघ ने दो साल बाद संजीता पर लगे डोपिंग के आरोप वापस लिए
- दो बार की राष्ट्रमंडल खेल विजेता लिफ्टर मांगेगी आईडब्लूएफ से हर्जाना
- संजीता के अर्जुन अवार्डी बनने का रास्ता साफ
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डोपिंग के दाग से मुक्त किए जाने के बाद संजीता चानू के अर्जुन अवार्ड का रास्ता साफ हो गया है। दो साल से संजीता को अर्जुन अवार्ड दिए जाने का फैसला सील बंद लिफाफे में कैद है। भारतीय वेटलिफ्टिंग संघ ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर संजीता को अर्जुन अवार्ड देने के लिए कहा है। मंत्रालय ने भी सील बंद लिफाफा खोलने का फैसला कर लिया है। कुछ ही दिनों के अंदर मंत्रालय संजीता को अर्जुन अवार्ड दिए जाने की घोषणा कर देगा।
साल 2018 में संजीता ने अर्जुन अवार्ड नहीं दिए जाने पर अदालत की शरण ले ली थी। अभी उनका केस अदालत में लंबित पड़ा था। तभी उनके डोप में आने की खबर आ गई। अदालत ने खेल मंत्रालय को आदेश दिए थे कि संजीता का नाम अवार्ड के लिए कमेटी का समक्ष रखा जाए। अदालत ने कमेटी के फैसले को संजीता के डोपिंग पर फैसले के आने तक सील बंद लिफाफे में रखने को कहा। उसने मंत्रालय को निर्देश दिए कि यह लिफाफा तब खोला जाए जब संजीता डोपिंग के आरोप से मुक्त हो जाए। इस बीच कमेटी ने भी संजीता को डोपिंग के आरोपों से मुक्त होने पर अर्जुन अवार्ड दिए जाने का फैसला लिया। फेडरेशन ने इसी लिफाफे का हवाला देकर संजीता को अवार्ड देने को कहा है।
कैंप में शामिल होने का न्योता
फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल सहदेव यादव का कहना है कि वह पहले भी संजीता को कैंप में शामिल होने के लिए कह चुके हैं, लेकिन वह नहीं आईं। उनमें तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन बनने की क्षमता है। वह कभी भी कैंप में शामिल हो सकती हैं।
संजीता ने पूछे गंभीर सवाल
आईडब्लूएफ ने साफ किया है कि वाडा ने 28 मई को उन्हें बताया कि अमेरिका की सॉल्ट लेक सिटी की लैब में संजीता के सैंपल के आईआरएमएस परीक्षण में समानता नहीं होने के कारण खिलाड़ी के खिलाफ जारी केस को बंद किया जाए। इस बीच आठ जून को भारतीय वेटलिफ्टिंग संघ ने भी आईडब्लूएफ से संजीता के केस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इसके बाद आईडब्लूएफ ने दो साल एक माह बाद संजीता पर लगे डोपिंग के आरोप वापस ले लिए।
ओलंपिक क्वालिफाई से दूर करने का जिम्मेदार कौन
इन आरोपों के चलते टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का मौका खोने वाली संजीता आईडब्लूएफ से भारी भरकम हर्जाना मांगने जा रही हैं। संजीता का कहना है कि टोक्यो के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाना और इतने दिनों तक मानसिक प्रताडना झेलने का हर्जाना कौन देगा? इसके लिए सीधे तौर पर आईडब्लूएफ जिम्मेदार है।
संजीता का कहना है कि उनके साथ भद्दा मजाक हुआ है, जिसमें उनका पूरा करियर दांव पर लग गया। 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में 48 और 2018 में 53 किलो में स्वर्ण जीतने वाली संजीता के सैंपल में नौ जनवरी 2018 को टेस्टोस्टोरान पाया गया था। उनके यूरिन सैंपल के दो नंबर भेजे गए। यह गलती आईडब्लूएफ ने स्वीकार की थी। 22 जनवरी 2019 को उन पर लगे अस्थाई प्रतिबंध को भी हटा दिया गया। तब से उनका केस लंबित पड़ा था।