{"_id":"5d88cfaf8ebc3e93d56cc136","slug":"olympic-ticket-is-more-than-medal-for-vinesh-phogat","type":"story","status":"publish","title_hn":"विनेश के लिए मेडल से बढ़कर है ओलंपिक टिकट","category":{"title":"Other Sports","title_hn":"अन्य खेल","slug":"other-sports"}}
विनेश के लिए मेडल से बढ़कर है ओलंपिक टिकट
Tue, 24 Sep 2019 07:54 AM IST
मुकेश कुमार झा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Tue, 24 Sep 2019 07:54 AM IST
सार
-कोच नहीं चाहते थे दूसरे देश के पहलवान देखें तैयारियां इस वजह से पहले नूर सुल्तान नहीं गईं
-विदेशी कोच ने पहचानी देसी जड़ों की महत्वता, दी घरेलू माहौल का प्राथमिकता
विज्ञापन
विनेश फोगाट
विस्तार
विश्व चैंपियनशिप हो या फिर ओलंपिक भारतीय खिलाडिय़ों और प्रशिक्षकों की पहली पसंद विदेश में तैयारियों की होती है, लेकिन एक विदेशी कोच ने विनेश फोगाट के जरिए इस सच्चाई को मिथ में तब्दील करने का उदाहरण रखा है। यह हंगेरियन कोच वॉलर एकोस थे जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए विनेश को 15 दिन पहले नूर सुल्तान (कजाखस्तान) नहीं जाने दिया।
विज्ञापन
विनेश ने अमर उजाला से खुलासा किया कि कोच नहीं चाहते थे कि वह इतनी जल्दी नूर सुल्तान जाएं और दूसरे देश के पहलवान उनकी कमियों को देखें। कोच चाहते थे कि वह घरेलू महौल के बीच तरोताजा रहकर विश्व चैंपियनशिप में उतरें। उनकी यह रणनीति काम कर गई। उन्होंने नूर सुल्तान में न सिर्फ पदक जीता बल्कि ओलंपिक टिकट हासिल किया। विनेश यह भी खुलासा करती हैं कि उनके लिए ओलंपिक टिकट विश्व चैंपियनशिप के पदक से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
कोच कहेंगे तो यह रणनीति ओलंपिक में भी रहेगी
विनेश साफ करती हैं कि अगर कोच चाहेंगे तो ओलंपिक के लिए भी वह इसी रणनीति को अपनाएंगी। घर से ज्यादा बाहर नहीं निकलने का काफी फायदा हुआ। विनेश ने अपनी तैयारियां खरखौंदा (हरियाणा) में अंजाम दीं। विनेश कहा कि उन्हें कैडेट चैंपियन लड़कों के साथ तैयारिया काफी फायदा मिला। विनेश यह भी कहती हैं कि ऐसा नहीं है कि वह तैयारियों के लिए विदेश नहीं जाएंगी। विदेश जाने का समय होता है, लेकिन कोच समझते हैं कि विश्व चैंपियनशिप, ओलंपिक जैसे आयोजन की तैयारियों के लिए रणनीति अलग होनी चाहिए।
विज्ञापन
चोट के बाद सीखा नहीं घबराना किसी से
विनेश ने अपने कठिन ड्रा पर कहा कि वह अच्छे पहलवानों के साथ लडने से नहीं घबराती हैं। दरअसल अब उन्हें उनके साथ लडने में मजा आता है। रियो ओलंपिक में चोट लगने के बाद उन्होंने एक चीज सीखी है कि सामने चीनी पहलवान हो या फिर जापानी, घबराना किसी से नहीं है। वह नूर सुल्तान इतने नामी पहलवानों से लड़ीं लेकिन किसी से घबराई नहीं।
सोफिया को हराना रही बड़ी बात
चैंपियनशिप में विनेश विश्व चैंपियन सारा एन, जापानी मायो मकूदा जैसी पहलवानों से लड़ीं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी जीत महान सोफिया मैटसन को पहली बाउट में 10-0 से हराना रही। विनेश खुलासा करती हैं कि एक बार की ओलंपिक और सात बार विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली सोफिया के कारण उन्हें डर लगता था कि वह 53 किलो में कैसे जाएं। वहां सोफिया है। लेकिन उन्होंने उन्हें इकतराफ मुकाबले में हराया है। वह यह कभी नहीं भूलेंगी।