भाला फेंक खिलाड़ी संदीप चौधरी को बड़ी राहत, आईपीसी ने पक्ष में सुनाया फैसला
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विश्व चैंपियन और पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके भाला फेंक खिलाड़ी संदीप चौधरी का प्रतियोगिता से इतर परीक्षण के लिए उपलब्ध नहीं होना रहने के स्थान संबंधी नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा क्योंकि उन्होंने पहले ही अपनी मौजूदगी के नए स्थान की सूचना दे दी थी। अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (आईपीसी) ने यह फैसला किया है। आईपीसी के पत्र के अनुसार, 'एथलीट अपनी पूर्व निर्धारित जगह पर मौजूद नहीं था। डीसीओ को एथलीट (फोन पर) और उसके कोच से पुष्टि हुई कि वह अपने गृहनगर गया है। सामान्यत: यह रहने के स्थान संबंधी नियम का उल्लंघन होता है।'
इसमें कहा गया, 'खिलाड़ी भाग्यशाली है कि वह साबित करने में सफल रहा कि उसने 23 फरवरी 2021 को एडम्स@वाडा-एएमए.ओआरजी पर ईमेल करके 28 फरवरी तक अपनी उपलब्धता के नए स्थान की जानकारी दे दी थी।' पत्र के अनुसार, 'उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उस समय एडम्स (डोपिंग रोधी प्रशासन एवं प्रबंधन प्रणाली) के साथ परेशानी का सामना कर रहा था। इस कारण से हम रहने के स्थान संबंधी नियम के उल्लंघन के मामले को आगे नहीं बढ़ा रहे।'
आईपीसी ने कहा, 'भविष्य में अगर उसे एडम्स को लेकर किसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है तो और उसे अपने रहने के स्थान की अपडेट जानकारी देनी होगी। उसे ऐसा एंटीडोपिंग@पैरालंपिक.ओआरजी पर करना होगा और सीधी एडम्स के पास नहीं भेजना होगा क्योंकि ऐसे में आईपीसी को सीधे सूचना नहीं मिलती।' आईपीसी ने हालांकि भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) को लिखे पत्र में कहा है कि अगर भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा हुई तो इसे रहने के स्थान संबंधी नियम का संभावित उल्लंघन माना जा सकता है।
बता दें कि सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) का हिस्सा चौधरी पिछले महीने उस समय जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम परिसर में मौजूद नहीं थे जब डोप नियंत्रण अधिकारी (डीसीओ) उनका नमूना लेने आए थे। खिलाड़ी अगर अपने एडम्स अकाउंट के स्थान पर 60 मिनट के घोषित समय के दौरान उपलब्ध नहीं रहता है जो इसे परीक्षण के लिए उपलब्ध नहीं रहना माना जाता है और 12 महीने में तीन बार ऐसा होने पर इसे डोपिंग रोधी उल्लंघन माना जा सकता है और पहले उल्लंघन की स्थिति में खिलाड़ी को दो साल तक प्रतिबंधित किया जा सकता है।