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बत्रा के राष्ट्रमंडल खेलों को समय की बर्बादी कहने पर मचा बवाल, खिलाड़ी बोले, बयान अस्वीकार्य

Wed, 25 Sep 2019 07:40 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Rajeev Rai Updated Wed, 25 Sep 2019 07:40 PM IST
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IOA chief Narinder Batra says commonwealth games Commonwealth games no standard players unhappy
नरिंदर बत्रा

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) प्रमुख नरिंदर बत्रा के राष्ट्रमंडल खेलों को समय की बर्बादी करार देने और देश को इससे स्थायी रूप से हटने के विचार पर बबाल मच गया है। खिलाड़ियों ने इसकी आलोचना करते हुए इसे अस्वीकार्य करार दिया है। बत्रा ने मंगलवार को बंगलूरू में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में प्रतिस्पर्धा का स्तर इतना ऊंचा नहीं होता। भारत को अपने मानकों को सुधारने के लिए इनसे हटने पर विचार करना चाहिए। बत्रा ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों के कार्यक्रम से निशानेबाजी को हटाने के बाद बर्मिंघम का बहिष्कार करने को कहा था। भारत राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी में अब तक कुल 134 पदक जीतकर दूसरे स्थान पर है। गोल्ड कोस्ट 2018 दो रजत और एक कांस्य जीतने वाले भारत के मौजूदा सबसे सफल टेबल टेनिस खिलाड़ी जी साथियान ने कहा, ‘यह स्वीकार्य नहीं है।’ खेल मंत्रालय और राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) बत्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देने से बचते रहे। 

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शूटिंग को शामिल कर लिया जाए तो बत्रा इसे अच्छी स्पर्धा मानेंगे

एक ओलंपिक खेल के राष्ट्रीय महासंघ के अधिकारी ने पूछा कि क्या अगर निशानेबाजी को वापस इन खेलों में शामिल कर लिया जाएगा तो बत्रा इसे अच्छी स्पर्धा मानेंगे। अधिकारी ने कहा,‘किसी को उनसे पूछना चाहिए कि क्या राष्ट्रमंडल खेलों की महत्ता फिर से बढ़ जाएगी, अगर निशानेबाजी को इसके कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा तो हो सकता है कि फिर उनके विचार अग हो जाएं। उन एथलीटों की मेहनत को कम क्यों आंका जाए जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में अपने पदक के लिए कड़ी मेहनत की है क्योंकि आप एक खेल के बाहर करने से खुश नहीं हो? अगर भारत इनसे हट जाएगा तो राष्ट्रमंडल खेल खत्म नहीं होंगे।’ 

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बड़ा सच, पैसे की बर्बादी

मुखर्जी :  तीरंदाजी संघ के पूर्व महासचिव परेश नाथ मुखर्जी ने कहा, ‘आईओए प्रमुख ने जो कहने का साहस किया है, इससे बड़ा सच नहीं हो सकता। उन्होंने सही जगह वार किया है। राष्ट्रमंडल खेलों की ओलंपिक में कोई महत्ता नहीं है। इसकी कोई अहमियत नहीं है और सिर्फ हमारे जैसे मूर्ख देश ही राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर इतनी हाइप बनाते हैं। यह पैसे की बर्बादी है।’

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निराशाजनक बयान

‘यह काफी निराशाजनक है। इस लिहाज से देखो तो भारत को आमंत्रण टूर्नामेंट में भी अपनी टीमें नहीं भेजनी चाहिए क्योंकि टूर्नामेंट का स्तर ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप जैसा नहीं है। खिलाड़ियों की उपलब्धियों को कम क्यों आंको? किसी भी मामले में राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी में मजबूत देश खेलते हैं जैसे इंग्लैंड और आयरलैंड।’ - विजेंदर सिंह, मुक्केबाज

बयान हास्यास्पद

‘राष्ट्रमंडल खेलों के बहिष्कार की बात सोचना भी हास्यास्पद है। मुझे नहीं लगता कि इनका स्तर कम होता है। 2010 के चरण में जब मैंने कांस्य पदक जीता और फिर 2014 खेलों के दौरान मैंने जितने खिलाड़ियों को हराया, मुझे नहीं लगता कि यह आसान रहा था।’-पी कश्यप, शटलर  

राष्ट्रमंडल खेल विश्व स्तरीय

‘एथलेटिक्स के लिए राष्ट्रमंडल खेल विश्व स्तरीय खेल हैं, जिसमें स्पर्धा का स्तर एशियाई खेलों की तुलना में ऊंचा होता है।’ -कृष्णा पुनिया, पूर्व एथलीट 

टूर्नामेंट अहम है

‘मैं इस बहिष्कार के खिलाफ हूं। राष्ट्रमंडल खेल हमारे लिए बड़ा टूर्नामेंट है। राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छे प्रदर्शन से काफी लाभ मिलता है जिसमें पद और धन शामिल है। हमारे लिए यह टूर्नामेंट अहम है।’ सतीश शिवलिंग, वेटलिफ्टर 

ओलंपिक के बाद सबसे बड़ा टूर्नामेंट

’पूर्व भारतीय हाकी कप्तान जफर इकबाल 1980 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य थे। वह बत्रा के बयान से हैरान थे। उन्होंने कहा, ‘‘यह हास्यास्पद बयान उस व्यक्ति से आया है जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों में कई अहम पदों पर काबिज है। राष्ट्रमंडल खेल देशों की भागीदारी के लिहाज से ओलंपिक के बाद सबसे बड़ा टूर्नामेंट है। पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में 72 देशों ने शिरकत की थी। अगर आप हॉकी के बारे में बात करो तो सभी शीर्ष देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ग्रेट ब्रिटेन इसमें खेलते हैं।’ जफर इकबाल, ओलंपियन 

आसान नही हैं खेल

‘अगर राष्ट्रमंडल खेल इतने आसान थे तो सिर्फ कुछ ही खेलों जैसे कुश्ती, निशानेबाजी और मुक्केबाजी ने ही भारत को पदक क्यों दिलाए? निश्चित रूप से हम राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना ओलंपिक से नहीं कर सकते और यहां तक कि विश्व चैंपियनशिप से भी नहीं। तो क्या इसका मतलब है कि हम विश्व चैंपियनशिप के पदक को अहमियत नहीं देंगे और वहां अपनी टीम नहीं भेजेंगे?’ -राहुल बनर्जी, तीरंदाज

हर टूर्नामेंट की अहमियत

‘मेरे विचार से हर खेल, भले ही वह दक्षिण एशियाई खेल हों, एशियाई खेल हों, राष्ट्रमंडल खेल हों या फिर ओलंपिक हों। सबकी अपनी अहमियत है और हमारे कुछ खिलाड़ियों का भविष्य इनसे जुड़ा है।’ -आनंदेश्वर पांडे, कोषाध्यक्ष आईओए 

खिलाड़ी के लिए पदक जीतना बड़ी बात

‘मैं उनका (बत्रा) समर्थन करता हूं क्योंकि वह मेरे खेल का समर्थन कर रहे हैं। आप (राष्ट्रमंडल खेल 2022 आयोजक) लंबे समय से कार्यक्रम का हिस्सा रहे किसी खेल को यूं ही नहीं हटा सकते हैं। लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष भी है क्योंकि खेलों से हमेशा के लिए हटने से खिलाड़ी प्रभावित होंगे। प्रतियोगिता किसी भी तरह की हो, किसी खिलाड़ी के लिए पदक जीतना बहुत बड़ी बात होती है।’ जसपाल राणा, जूनियर निशानेबाजी कोच

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