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भारतीय कुश्ती कोच की हुई छुट्टी, VIP संस्कृति की मांग पड़ी भारी
Fri, 04 Oct 2019 08:06 AM IST
अंशुल तलमले
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंशुल तलमले
Updated Fri, 04 Oct 2019 08:06 AM IST
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हुसैन करीमी (दाएं)
- फोटो : ट्विटर
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लंबे इंतजार के बाद भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवानों के लिए अनुबंधित किए गए ईरानी कोच हुसैन करीमी से भारतीय कुश्ती संघ ने छह माह में ही तौबा कर लिया। संघ ने दावा किया किया कि ईरान का यह कोच अपने साथ वीआईपी संस्कृति लेकर आया, जिसका देश में पालन नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें समय से पहले ही पद से हटाया जा रहा है जबकि करीमी का अनुबंध टोक्यो ओलंपिक तक था। ईरान के इस कोच को उनकी बर्खास्तगी का नोटिस बुधवार को सौंपा गया।
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डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर ने पीटीआई से कहा, ‘वह वीआईपी संस्कृति का पालन कर रहे थे और उनकी मांगों को मानना बेहद मुश्किल हो गया था। हमने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को इसकी जानकारी दे दी है। हम अब नया कोच ढूंढ रहे हैं।’
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करीमी के साथ काम करते हुए डब्ल्यूएफआई को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था इस बारे में पूछने पर तोमर ने कहा कि वह कभी कोचों या पहलवानों के साथ रिश्ते नहीं बना पाए। तोमर ने कहा, ‘उनकी हमेशा कोई ना कोई शिकायत या मांग होती थी। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण परिसर में रहने से इनकार कर दिया जहां राष्ट्रीय शिविर चल रहा था इसलिए हमें साइ केंद्र के समीप उनके लिए फ्लैट किराए पर लेना पड़ा। वह जब भी भारत में यात्रा करते थे तो हमें उन्हें कार मुहैया करानी पड़ती थी।’
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उन्होंने कहा, ‘वह हमेशा टूर्नामेंटों के दौरान अकेले रहने पर जोर देते थे जबकि अन्य कमरे साझा करते थे। नूर-सुल्तान में विश्व चैंपियनशिप के दौरान भी यूडब्ल्यूडब्ल्यू के निर्देशों के अनुसार दो लोगों को कमरा साझा करना था लेकिन वह अकेले रहे, उनकी सभी मांगों को स्वीकार करना मुश्किल था।’
करीमी को 3500 डालर के मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था, लेकिन डब्ल्यूएफआई ने कहा कि उनकी अतिरिक्त मांगों के कारण खर्चे 5000 डॉलर पहुंच गया था। डब्ल्यूएफआई के लिए चिंता की एक अन्य बड़ी बात यह था कि करीमी का अपने शिष्यों तक के साथ कोई लगाव नहीं था।
तोमर ने कहा, ‘टूर्नामेंट के दौरान वह मैट पर जाते थे, लेकिन पहलवानों का पसीना साफ करने से इनकार कर दिया जो मुकाबले के दौरान प्रत्येक कोच करता है। यहां तक कि शिविर में ट्रेनिंग के दौरान इसी कारण से वह उदारण के साथ तकनीक नहीं समझाते थे क्योंकि उन्हें पसीने से तर-बतर पहलवानों को छूने में समस्या थी।’
करीमी के स्थान पर कुश्ती संघ ने नया विदेशी कोच अनुबंधित करने का फैसला लिया है। हालांकि ओलंपिक सिर पर होने के कारण फ्रीस्टाइल पहलवानों को आसानी से नया विदेशी कोच मिलना मुश्किल है। रियो ओलंपिक में ईरानी टीम के कोच रहे करीमी को ही अनुबंधित करने में कुश्ती संघ को डेढ़ साल का समय लग गया था।
डब्ल्यूएफआई ने विश्व चैंपियनशिप के दौरान उज्बेकिस्तान और रूस के कुछ कोचों से बात की और कुछ इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन करने को कहा है। राष्ट्रीय शिविर एक नवंबर से शुरू होगा और डब्ल्यूएफआई के इससे पहले किसी को नियुक्त करने की उम्मीद है।