सिंधू के कमाल से भारत ने माइकल फेल्प्स की कर ली 'बराबरी'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
31वें ओलंपिक के शुरुआती 11 दिन तक पदक के लिए तरसने के बाद 12वें दिन पहलवान साक्षी मलिक ने कांस्य पदक जीतकर भारत का पदक तालिका में खाता खोल दिया। इन 12 दिनो में कई ऐसे मौके आए जब भारतीय खिलाड़ी पदक जीतने के करीब पहुंच गए लेकिन कभी किस्मत तो कभी किसी और कारण से पदक नहीं जीत पाए।
भारतीय खिलाड़ियों के पदक से महरूम होते देख कई लोग तो उनका मजाक उड़ाने लगे थे। इस बीच अमेरिका के महान तैराक माइकल फ्लेप्स का मुकाबला शुरू हो चुका था और पिछले 3 ओलंपिक में कम से कम 4 स्वर्ण पदक जीतने के बाद रियो के पूल में भी धमाल मचाना शुरू कर दिया और 5 गोल्ड के साथ एक रजत पदक भी जीत लिया।
फ्लेप्स ने रियो में 4 स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब अपना पांचवां पदक (रजत) जीता तो सोशल मीडिया में कहा जाने लगा कि अकेले फ्लेप्स ने पदक जीतने के लिहाज से भारत को हरा दिया है। लेकिन अब पीवी सिंधू ने फाइनल में पहुंच कर रजत पदक जीतने के साथ ही फ्लेप्स और भारत के बीच सबसे ज्यादा पदक जीतने की अनचाही रेस को बराबरी पर ला दिया है।
फ्लेप्स ने लगातार 4 ओलंपिक में 4 या उससे ज्यादा जीते हैं गोल्ड
माइकल फ्लेप्स उस अमेरिका से आते हैं जिसका खेल जगत में खासा दबदबा है। खेलों के महाकुंभ कहे जाने वाले ओलंपिक गेम्स में पहले अमेरिका को अविभाजित रूस से चुनौती मिलती थी, लेकिन 90 के दशक में रूस के विभाजन के बाद खेल में उसकी पकड़ थोड़ी ढीली हुई तो चीन उसको चुनौती देने लगा।
दूसरी ओर, क्रिकेट के दीवाने देश भारत की स्थिति अन्य खेलों में फिसड्डी ही रही है। 1996 से पहले के 19 ओलंपिक खेलों में भारत ने हिस्सा लिया जिसमें उसके खाते में 8 स्वर्ण और 3 रजत के साथ कुल 14 पदक ही आए थे। इन 14 पदकों में से 11 पदक तो अकेले हॉकी से आए, जबकि 2 एथलेटिक्स और एक कुश्ती से।
1996 के बाद से भारत ओलंपिक खेलों में कम से कम एक पदक तो जीत ही रहा है। रियो में साक्षी मलिक ने कांस्य पदक जीतकर पिछले 5 ओलंपिक्स में पदक जीतने के सिलसिले को कायम रखा जिसे बैडमिंटन खिलाड़ी सिंधू ने थोड़ा और सही कर दिया। सिंधू के रजत पदक तय करने के साथ ही भारत और माइकल फ्लेप्स के ओलंपिक में जीते 28-28 पदकों की संख्या बराबर हो गई है।
हॉकी ने भारत को खूब दिलाई कामयाबी
'द फ्लाइंग शार्क' के नाम से मशहूर माइकल फ्लेप्स की बात करें तो उन्होंने अपना ओलंपिक सफर 2004 के एथेंस ओलंपिक से शुरू किया और पहले ही ओलंपिक में 6 स्वर्ण पदक के साथ 2 कांस्य पदक जीतकर जोरदार शुरुआत की।
इसके बाद बीजिंग ओलंपिक (2008) में उन्होंने स्वर्णिम सफलता की झड़ी लगाते हुए रिकॉर्ड 8 गोल्ड जीत डाले। फिर 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने अपनी सफलता को कायम रखते हुए 4 स्वर्ण और 2 रजत पदक जीतकर अपने कुल ओलंपिक पदकों की संख्या को 22 तक पहुंचा दिया।
4 साल के अंतराल के बाद फ्लेप्स रियो पहुंचे तो उन्होंने यहां भी एक रजत के साथ 5 स्वर्ण पदक जीत लिए जिससे उनके कुल ओलंपिक पदकों की संख्या 28 तक हो गई।
वहीं साक्षी मलिक के कुश्ती में कांस्य पदक जीतने से पहले भारत के खाते में कुल 26 पदक थे जो उसने पिछले 23 ओलंपिक में जीते थे। फ्लेप्स के 27वें पदक ने भारत को पीछे छोड़ दिया, लेकिन अब पीवी सिंधू के फाइनल में पहुंचने के साथ ही भारत फिर से फ्लेप्स की बराबरी पर आ गया है।
सिंधू ने रजत पदक जीत लिया है, लेकिन उनकी इस कामयाबी से पहले भारत को हॉकी से 8 स्वर्ण के अलावा एक रजत और 2 कांस्य पदक मिले। हॉकी के बाद कुश्ती से भारत को 6 पदक (एक रजत) और निशानेबाजी से 4 (एक स्वर्ण) पदक के अलावा एथलेटिक्स और मुक्केबाजी से 2-2 रजत मिले। जबकि बैडमिंटन, टेनिस और भारोत्तोलन से एक-एक कांस्य पदक भारत को मिले हैं। आज सिंधू ने बैडमिंटन में एक और पदक का इजाफा कर दिया है। इस तरह से भारत के अब कुल 28 ओलंपिक पदक हो गए हैं।
हालांकि अकेले एक खिलाड़ी और एक देश के प्रदर्शन की तुलना किसी भी तरह से वाजिब नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया में जिस तरह दोनों की तुलना करते हुए भारतीय खिलाड़ियों का मजाक उड़ाया गया था, वह गलत था। अमेरिका, चीन और यूरोपिय देशों की तरह हमारे यहां खेल संस्कृति नहीं है, बावजूद इसके भारतीय खिलाड़ी अब शानदार प्रदर्शन करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।