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विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप: एथलीट को लगा दो बार गिराए जाने पर ओलंपिक क्वालिफाई का टूट गया सपना

Sat, 05 Oct 2019 07:20 AM IST
Rajeev Rai हेमंत रस्तोगी
हेमंत रस्तोगी Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 05 Oct 2019 07:20 AM IST
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IAAF world champs Avinash Sable was crying after failing to qualify for olympics coach shares story
अविनाश साबले - फोटो : social media

विश्व चैंपियनशिप में तीन हजार मीटर स्टीपलचेज की दौड़ समाप्त करने के बाद अविनाश साबले को राष्ट्रीय कीर्तिमान रचने की कोई खुशी नहीं थी। रेस में दो बार गिराए जाने पर वह अपने को छला महसूस कर रहे थे। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि वह टोकियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाए हैं। उनके पास उस वक्त कोई नहीं था। वह टनल में गए दीवार पकड़कर फूट-फूटकर रोने लगे। दोहा स्टेडियम के दूसरे कोने से भागकर आ रहे कोच अमरीश  कुमार को इसी रेस में भागने वाले कतर के एथलीट ने बताया कि अविनाश दीवार पकड़े अंदर रो रहा है।

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अमरीश ने दोहा से अमर उजाला से खुलासा किया कि अविनाश उन्हें देखते ही लिपट गया और कहने लगा कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ। उन्हें दो बार रेस में गिराया गया जिसके चलते वह ओलंपिक क्वालिफाई नहीं कर पाए। तब अमरीश ने उन्हें हौसला दिया कि घबराओ नहीं उन्होंने प्रोटेस्ट के लिए फेडरेशन को बोल दिया है। जरूर फैसला बदला जाएगा। थोड़ी देर बाद अविनाश के हक में फैसला आ गया और उन्हें फाइनल में प्रवेश दे दिया गया।
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फाइनल में ओलंपिक टिकट के लिए करेंगे प्रयास
अमरीश और अविनाश का कहना है कि अब चार अक्तूबर को होने वाले फाइनल में ओलंपिक टिकट हासिल किया जाएगा। अविनाश ने 8.25.23 मिनट का समय निकाल अपना ही राष्ट्रीय कीर्तिमान भंग किया। अमरीश के मुताबिक दो बार गिराए जाने केचलते पांच से छह सेकेंड बर्बाद हुए। वह इस रेस में ही ओलंपिक क्वालिफाई के लिए समय 8.22.51 मिनट पार कर जाते, लेकिन अब यह काम फाइनल में किया जाएगा।

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सेना की घातक टीम में रहे हैं अविनाश

मेरठ केअमरीश के मुताबिक अविनाश सेना की घातक टीम में थे। इस टीम का काम आतंकवादियों और देशद्रोहियों से लोहा लेना होता है। 2012 में उन्होंने सेना में ही अविनाश को ढूंढा था। वह सिक्किम में तैनात थे। हैदराबाद में अपनी यूनिट से क्रास कंट्री दौडने आए थे। उन्होंने अविनाश की मांसपेशियां देखकर कहा कि एथलेटिक्स करोगे तो वह तुरंत तैयार हो गए।

इसके पीछे कारण यह था कि सिक्किम में जिस जगह वह तैनात थे वहां जोंक बहुत थीं और उन्हें चिपक जाती थीं। अमरीश कहते हैं कि सेना में एक बात सिखाई जाती है। मरते दम तक लडना है। फिर अविनाश तो घातक टीम में था। यही बात उसने दिमाग में रखी और दो बार गिरने के बावजूद रेस पूरी की। वरना गिरने के बाद अमूमन एथलीट रेस छोड़ दिया करते हैं।

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