दुती चंद ने स्वीकार किया था समलैंगिक रिश्ता, अब बड़ी बहन ने दी जेल भेजने की धमकी
- दुती चंद अपने समलैंगिक रिश्ते का खुलासा करने वाली पहली भारतीय ऐथलीट
- उन्होंने खुलासा किया था कि वह अपने रिश्तेदार के साथ घर बसाना चाहती हूं
- लेकिन, अब उन्हें लग रहा है डर, क्योंकि बड़ी बहन ने दी है जेल भेजने की धमकी
- दरअसल, घर में उनकी बड़ी बहन की काफी धाक है और उनसे सभी डरते हैं
विस्तार
युवा रिश्तेदार के साथ समलैंगिक रिश्ते का खुलासा करने वाली भारत की सबसे तेज धाविका दुती चंद के सामने अब अपने परिवार द्वारा स्वीकार किए जाने की कड़ी चुनौती है। 100 मीटर दौड़ में 11.24 सेकंड के समय के साथ राष्ट्रीय रेकॉर्ड धारक दुती ने कहा कि उनके माता पिता ने अब तक इस रिश्ते पर कोई आपत्ति नहीं जताई है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी बहन ने उन्हें परिवार से बाहर करने के अलावा जेल भेजने की भी धमकी दी है।
बड़ी बहन का घर में है दबदबा
एशियाई खेल 2018 में दो रजत पदक जीतने वाली 23 साल की दुती दुनिया की उन कुछ खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से समलैंगिक रिश्ता स्वीकार किया है। दुती ने कहा, ‘मेरे परिवार में मेरी बड़ी बहन का काफी दबदबा है। उसने मेरे बड़े भाई को घर से बाहर कर दिया, क्योंकि उसे उसकी पत्नी पसंद नहीं थी। उसने मुझे धमकी दी है कि मेरे साथ भी ऐसा ही होगा। लेकिन मैं भी वयस्क हूं जिसकी निजी स्वतंत्रता है। इसलिए मैंने इस रिश्ते को आगे बढ़ाने और सार्वजनिक करने का फैसला किया।’
इसलिए किया रिश्ते का खुलासा
साथ ही उनका लक्ष्य अगले साल होने वाले ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाइ करने का है। इस धाविका ने अपनी जोड़ीदार का नाम नहीं बताया, लेकिन कहा कि इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले ने उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने आने का हौसला दिया। दुती ने कहा कि इस रिश्ते को सार्वजनिक करने का एक और कारण यह भी था कि वह नहीं चाहती थी कि धाविका पिंकी प्रमाणिक के साथ जो भी हुआ वह उनके साथ भी हो। पिंकी पर उनकी लिव इन जोड़ीदार ने बलात्कार का आरोप लगाया था। पिंकी 2006 एशियाई खेलों की चार गुणा 400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम की सदस्य थीं।
बसाना चाहती हैं घर
हैदराबाद में ट्रेनिंग कर रही दुती ने कहा, ‘मेरे गांव की 19 साल की महिला से पिछले पांच साल से मेरा रिश्ता है। वह भुवनेश्वर के कालेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। वह मेरी रिश्तेदार हैं और मैं जब भी घर आती हूं तो उनके साथ समय बिताती हूं। वह मेरे लिए जीवन साथी की तरह हैं और भविष्य में हैं उनके साथ घर बसाना चाहती हूं।’ उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल एतिहासिक फैसला सुनाते हुए आपसी सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक रिश्तों को गैर आपराधिक करार दिया था, लेकिन ऐसे लोगों के बीच विवाह अब भी भारत में वैध नहीं है।