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Tokyo Olympics: लवलीना के सेमीफाइनल मुकाबले पर देश की नजर, असम विधानसभा की कार्यवाही भी रहेगी स्थगित
Wed, 04 Aug 2021 10:58 AM IST
Rajeev Rai
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Wed, 04 Aug 2021 10:58 AM IST
सार
भारत की युवा महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने से एक जीत दूर हैं। असम के गोलाघाट से आने वाली 24 वर्षीय मुक्केबाज 125 साल के ओलंपिक इतिहास में असम की पहली एथलीट हैं जिन्होंने पदक पक्का किया है।
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लवलीना बोरगेहेन
- फोटो : PTI
विस्तार
भारत की युवा महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने से एक जीत दूर हैं। असम के गोलाघाट से आने वाली 24 वर्षीय मुक्केबाज 125 साल के ओलंपिक इतिहास में असम की पहली एथलीट हैं जिन्होंने पदक पक्का किया है। लवलीना बुधवार को तुर्की की मौजूदा विश्व चैंपियन बुसेनाज सुरमेनेली के खिलाफ जीत दर्ज करके ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बनने की कोशिश करेंगी।
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लवलीना की जीत के लिए उनके गृह राज्य असम समेत देश भर में पूजा-अर्चना की जा रही है और उनकी जीत के लिए उन्हें शुभकामनाएं भेजी जा रही है। असम सरकार भी लवलीना के मुकाबले को लेकर काफी उत्साहित है इसीलिए उसने फैसला किया है कि लवलीना के सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान असम विधानसभा की कार्यवाही तीस मिनट के लिए स्थगित रहेगी।
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तोक्यो ओलिम्पिक में आज महिला मुक्केबाज #लवलीना_बोर्गेहेन के सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान #असम विधानसभा की कार्यवाही तीस मिनट के लिए स्थगित रहेगी। #Cheer4India
विज्ञापन विज्ञापन— आकाशवाणी समाचार (@AIRNewsHindi) August 4, 2021
दोनों का पहला ओलंपिक
बता दें कि लवलीना और सुरमेनेली दोनों का यह पहला ओलंपिक है। दोनों 23 साल की हैं। बुसेनाज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण पदक जीते हैं। लवलीना ने अभी तक अपने कॅरिअर में विश्व चैंपियनशिप के दो कांस्य पदक जीते हैं। तुर्की की मुक्केबाज 2019 चैंपियनशिप में विजेता रही थी जबकि लवलीना को कांस्य पदक मिला था। तब इन दोनों के बीच मुकाबला नहीं हुआ था।
फाइनल में पहुंचने वालीं पहली भारतीय मुक्केबाज बन जाएंगी
असम की 23 वर्षीय लवलीना इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है। वह पहले ही विजेंदर सिंह (2008) और एमसी मैरीकॉम (2012) की बराबरी कर चुकी है। लवलीना का पदक पिछले नौ वर्षों में भारत का मुक्केबाजी में पहला पदक होगा लेकिन उनका लक्ष्य अब फाइनल में पहुंचना होगा जहां अभी तक कोई भारतीय नहीं पहुंचा है।