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एशियाई कुश्ती चैंपियनशिपः गोल्ड से चूकीं साक्षी, विनेश-अंशू-गुरशरणप्रीत ने जीते कांस्य पदक

Sat, 22 Feb 2020 02:36 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sat, 22 Feb 2020 02:36 AM IST
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Asian Wrestling Championships: Sakshi Malik reaches final, Vinesh Phogat to fight for bronze
साक्षी मलिक - फोटो : सोशल मीडिया

रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक (65 किग्रा) और विश्व चैंपियनशिप में कांसा जीतने वाली विनेश फोगाट (53 किग्रा) एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाईं। साक्षी को रजत तो विनेश को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। 

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दरअसल केडी जाधव स्टेडियम में तीसरे दिन मुकाबले में उतरीं पांचों भारतीय महिला पहलवान जापानी पहलवानों का कोड क्रैक नहीं कर सकीं। साक्षी और विनेश के अलावा सोनम मलिक (62 किग्रा), अंशु मलिक (57 किग्रा) और गुरशरणप्रीत कौर (72 किग्रा) को जापानी पहलवानों ने परास्त किया। अंशु और गुरशरण ने भी कांसा जीता जिससे भारत के खाते में तीसरे दिन एक रजत सहित चार पदक आए। इस तरह महिलाओं ने तीन स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य सहित आठ पदक जीते।

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मुकेदा से फिर हारीं विनेश

बीते वर्ष विश्व चैंपियनशिप में रजत जीतने वाली जापानी मायो मुकेदा एक बार फिर विनेश पर भारी पड़ गईं। इस बार भी उनका पहला मुकाबला मुकेदा से पड़ गया। पिछले दो मुकाबलों में एक भी अंक नहीं करने वाली विनेश के हिस्से यहां 2-6 से हार आई। हालांकि मुकेदा यहां भी स्वर्ण नहीं जीत पाईं उन्हें कजाखस्तान की तात्याना अखयेनोवा ने 8-2 से फाइनल में हराया। विनेश ने कांसे की लड़ाई में वियतनाम की थी जी कियू को 10-0 से हराया। विनेश ने स्वीकार किया कि मुकेदा इस बार काफी तैयारी करकेआईं थीं। उन्हें ऐसा दांव मारा जिसकी भनक उन्हें नहीं थी। मुकेदा उन्हें अच्छा करने की प्रेरणा दे रही हैं। उनके दिमाग में यही रहता है कि अगली बार इस पहलवान को जरूर हराना है।

साक्षी को नाओमी ने दो बार हराया

साक्षी की शुरुआत अच्छी नहीं रही। जापानी नाओमी रुइके ने 2-1 से हराया। राउंड रोबिन के आधार पर यहां हुए मुकाबलों में साक्षी ने पहले कोरियाई ओ ह्यूंग को 14-4 और बाद में उज्बेकिस्तान की नबीरा को 5-4 से हराकर फाइनल में जगह बनाई, जहां उन्हें नाओमी ने एक बार फिर 0-2 से पराजित किया। अंशु मलिक को पहले स्वर्ण जीतने वाली रिसाको काबाई ने 0-10 से परास्त किया। कांस्य की लड़ाई में उन्होंने उज्बेकिस्तान की सेवारा को 4-1 से हराया। सोनम को पहले जापानी युकाको काबाई ने 2-5 से हराया। इसके बाद वह कांस्य की लड़ाई किर्गिस्तान की एइसुलु से 0-11 हार गईं।

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बेटी के लिए गुरशरण ने जीता कांस्य

पति से अलग होने के बाद बेटी के लिए वापस मैट पर उतरने वाली गुरशरणप्रीत ने जैसे ही कांस्य पदक जीता कोच कुलदीप मलिक से गले लगकर फफक-फफक कर रों पड़ीं। उन्होंने मंगोलिया की एंखबयार को 5-2 से हराकर कांस्य जीता। दरअसल गुरशरण के लिए यह पदक बेहद खास है। बेटी को पालने के लिए उन्हें छह साल बाद एक बार फिर कुश्ती को अपनाना पड़ा। 2011 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में रजत जीतने वाली गुरशरण ने वापसी के बाद नेपाल में हुए दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता।  गुरशरण भी मानती हैं कि यह पदक उनके लिए बेहद खास है।

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