जज्बे से भरी हैं 102 साल की दादी मां मानकौर, पदक हासिल करने को हैं बेताब
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भारत की 102 साल की महिला एथलीट मान कौर ने इस महीने के शुरू में स्पेन में हुई विश्व मास्टर्स में ट्रैक एवं फील्ड में स्वर्ण पदक जीता था और कभी हार न मानने वाले जज्बे से भरी यह खिलाड़ी अब अगली प्रतियोगिता के लिए ट्रेनिंग में जुटी हैं। वह दौड़ने के अलावा भाला भी फेंकती हैं।
उन्होंने कहा कि वह अब भी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक हासिल करने के लिए बेताब हैं। मन कौर ने इस महीने के शुरू में स्पेन के मलागा में हुई विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 200 मीटर रेस में 100 से 104 साल के आयुवर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। उन्होंने वहां भाला फेंक स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता था। वह इस उम्र की स्पर्धा में एकमात्र खिलाड़ी थीं लेकिन उनके प्रशंसकों ने उनकी जीत का जश्न मनाया जिसने 102 साल की उम्र में 200 मीटर की रेस की और भाला फेंका।
93 साल की उम्र में शुरू किया दौड़ना
उन्होंने 93 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया था और पिछले साल न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में विश्व मास्टर्स खेलों में 100 मीटर स्प्रिंट में पदक जीतने के बाद वह सुर्खियों में आईं।
अब इंडोर चैंपियनशिप की तैयारी
अब वह अगले साल मार्च में पोलैंड में होने वाली विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स इंडोर चैंपियनशिप के लिए ट्रेनिंग करने में जुटी हैं, जिसमें उनका लक्ष्य 60 मीटर और 200 मीटर रेस में भाग लेना है। चंडीगढ़ की रहने वालीं मनकौर इन दिनों ट्रेनिंग के लिए पटियाला में हैं।
मानकौर ने कहा, ‘मैं और पदक जीतना चाहती हूं। जीतने केबाद मुझे काफी खुशी होती है। सरकार ने मुझे कुछ नहीं दिया लेकिन यह मायने नहीं रखता क्योंक मैं सिर्फ दौड़ना चाहती हूं क्योंकि दौड़ने से मुझे खुशी मिलती है।’
ये है जीत का मंत्र
मन कौर ने फोन पर हुई बातचीत में अपनी फिटनेस के बारे में कहा कि सभी को खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। व्यायाम करना जरूरी है। जंक फूड नहीं खाने चाहिएं। युवा पीढ़ी के लिए उनका संदेश है कि अपने से बड़ों का आदर करो। उनकी अपनी खुराक दिन भर में छह रोटी के अलावा अंकुरित काले चने और जौ का सेवन है। इसके अलावा वह सोया मिल्क और फ्रूट भी लेती हैं।
अस्सी साल का बेटा भी एथलीट
मन कौर के अस्सी साल के बेटे गुरुदेव सिंह भी मास्टर्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं। गुरुदेव बताते हैं कि मां को जब अगली प्रतियोगिता के बारे में पता चलता है तो वह काफी उत्साहित हो जाती हैं और बार-बार पूछती हैं कि अब कितने दिन रह गए। अगले तीन साल की योजना तैयार है। 2019 में पोलैंड, 2020 में टोरंटो (कनाडा) और 2021 में जापान में होने वाली प्रतियोगिता में हिस्सा लेना है।
ऐसे हुई करिअर की शुरुआत
बेटे गुरुदेव बताते हैं कि जब मैं प्रतियोगिता के लिए विदेश गया तो मैंने देखा कि सौ साल से ज्यादा उम्र की एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। मैंने मां से बात की। उन्हें कोई परेशानी नहीं थी। पहले चंडीगढ़ में सौ और दो सौ मीटर में हिस्सा लिया और विश्व रिकॉर्ड बना दिया। उसके बाद तो सिलसिला शुरू हो गया।
ये रहता है रूटीन
रोजाना सुबह की सैर जरूर करती हैं। उसके बाद दो बार सौ मीटर की रेस और चार बार तीस मीटर की रेस लगाती हैं। उसके बाद अंत में धीमे कदमों से दौ मीटर दौड़ती हैं।
01: मिनट 14 सेकंड में पूरी की थी पिछले साल न्यूजीलैंड में सौ मीटर की रेस
20: से ज्यादा मेडल जीत चुकी हैं अब तक विश्व मास्टर्स खेलों में