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Nishant Dev: इतिहास रचने से चूके निशांत देव, क्वार्टर फाइनल में लगा झटका, मैक्सिको के मुक्केबाज ने हराया
Sun, 04 Aug 2024 12:46 AM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: Mayank Tripathi
Updated Sun, 04 Aug 2024 12:46 AM IST
सार
मुक्केबाजी में निशांत के अलावा निकहत जरीन, अमित पंघाल, जैस्मीन लैम्बोरिया और प्रीति पवार सहित अन्य भारतीय मुक्केबाज बाहर हो गए हैं। पदक की दौड़ में केवल लवलीना बोरगोहेन ही बची हैं।
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निशांत देव
- फोटो : PTI
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विस्तार
मुक्केबाज निशांत देव पुरुषों की 71 किग्रा मुक्केबाजी क्वार्टर फाइनल में मार्को अलोंसो वर्डे अल्वारेज (मेक्सिको) से हार गए हैं। अगर निशांत यह मुकाबला जीतते तो भारत के लिए पेरिस ओलंपिक 2024 में चौथा पदक पक्का हो जाता। हालांकि, उन्हें तगड़ा झटका लगा। मुक्केबाजी में निशांत के अलावा निकहत जरीन, अमित पंघाल, जैस्मीन लैम्बोरिया और प्रीति पवार सहित अन्य भारतीय मुक्केबाज बाहर हो गए हैं। पदक की दौड़ में केवल लवलीना बोरगोहेन ही बची हैं।
सेमीफाइनल में पहुंचने से चूके निशांत
पहले दो बाउट में बढ़त बनाने के बावजूद भारतीय मुक्केबाज निशांत देव पेरिस ओलंपिक में पुरुषों के 71 किग्रा के क्वार्टर फाइनल में मैक्सिको के वर्डे से हारकर बाहर हो गए। इस मुकाबले में विश्व चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता निशांत ने अच्छी शुरुआत की लेकिन बंटे हुए फैसले के आधार पर उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। उन्हें पदक पक्का करने के लिए यह मुकाबला जीतना था। अब पेरिस ओलंपिक में मुक्केबाजी में भारत की चुनौती टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन के रूप में ही बची है जो महिलाओं के 75 किलो वर्ग में चीन की लि कियान से रविवार को खेलेंगी।
इतिहास रचने से चूके
अगर निशांत मार्को एलोन्सो वर्डे अल्वारेज के खिलाफ जीत दर्ज करने में कामयाब होते तो वे समर गेम्स में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय मुक्केबाज बन जाते। इसी के साथ वह विजेंदर सिंह, मैरी कॉम और लवलीना बोरगोहेन की श्रेणी में शामिल हो जाते। विजेंदर सिंह ओलंपिक में पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय पुरुष मुक्केबाज हैं।
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सेमीफाइनल में पहुंचने से चूके निशांत
पहले दो बाउट में बढ़त बनाने के बावजूद भारतीय मुक्केबाज निशांत देव पेरिस ओलंपिक में पुरुषों के 71 किग्रा के क्वार्टर फाइनल में मैक्सिको के वर्डे से हारकर बाहर हो गए। इस मुकाबले में विश्व चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता निशांत ने अच्छी शुरुआत की लेकिन बंटे हुए फैसले के आधार पर उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। उन्हें पदक पक्का करने के लिए यह मुकाबला जीतना था। अब पेरिस ओलंपिक में मुक्केबाजी में भारत की चुनौती टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन के रूप में ही बची है जो महिलाओं के 75 किलो वर्ग में चीन की लि कियान से रविवार को खेलेंगी।
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इतिहास रचने से चूके
अगर निशांत मार्को एलोन्सो वर्डे अल्वारेज के खिलाफ जीत दर्ज करने में कामयाब होते तो वे समर गेम्स में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय मुक्केबाज बन जाते। इसी के साथ वह विजेंदर सिंह, मैरी कॉम और लवलीना बोरगोहेन की श्रेणी में शामिल हो जाते। विजेंदर सिंह ओलंपिक में पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय पुरुष मुक्केबाज हैं।
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निशांत देव
- फोटो : twitter
चाचा से मिली प्रेरणा
निशांत का जन्म 23 दिसंबर, 2000 को हरियाणा के करनाल में हुआ। निशांत 2012 में मुक्केबाजी की तरफ मुड़े। उन्हें अपने चाचा से प्रेरणा मिली, जो पेशेवर मुक्केबाज थे। उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण कोच सुरेंदर चौहान ने दिया। निशांत के पिता भी बेटे को मुक्केबाज बनाना चाहते थे। वह निशांत को खुद प्रशिक्षण के लिए स्टेडियम छोड़ने जाते थे और सुनिश्चित करते थे कि उनकी अच्छी तरह ट्रेनिंग हो रही है या नहीं। बाद में निशांत ने कर्नाटक के विजयनगर में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में प्रशिक्षण लिया।
निशांत का जन्म 23 दिसंबर, 2000 को हरियाणा के करनाल में हुआ। निशांत 2012 में मुक्केबाजी की तरफ मुड़े। उन्हें अपने चाचा से प्रेरणा मिली, जो पेशेवर मुक्केबाज थे। उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण कोच सुरेंदर चौहान ने दिया। निशांत के पिता भी बेटे को मुक्केबाज बनाना चाहते थे। वह निशांत को खुद प्रशिक्षण के लिए स्टेडियम छोड़ने जाते थे और सुनिश्चित करते थे कि उनकी अच्छी तरह ट्रेनिंग हो रही है या नहीं। बाद में निशांत ने कर्नाटक के विजयनगर में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में प्रशिक्षण लिया।
निशांत देव
- फोटो : twitter
2021 में निशांत ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था
19 की उम्र में निशांत ने साल 2019 में बद्दी में अपनी पहली सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस दौरान भारतीय मुक्केबाजी के तत्कालीन उच्च प्रदर्शन निदेशक सैंटियागो नीवा उनसे काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने निशांत को भारतीय शिविर में आमंत्रित किया और देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण लेने का अवसर दिया। 2021 में निशांत ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
निशांत ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला साल 2021 एलीट विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में खेला था। इसमें उन्हें क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। इस टूर्नामेंट में उन्होंने मैक्सिको के मार्को अल्वारेज वर्डे को भी हराया था, जिससे वह पेरिस ओलंपिक में भी भिड़ेंगे।
19 की उम्र में निशांत ने साल 2019 में बद्दी में अपनी पहली सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस दौरान भारतीय मुक्केबाजी के तत्कालीन उच्च प्रदर्शन निदेशक सैंटियागो नीवा उनसे काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने निशांत को भारतीय शिविर में आमंत्रित किया और देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण लेने का अवसर दिया। 2021 में निशांत ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
निशांत ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला साल 2021 एलीट विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में खेला था। इसमें उन्हें क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। इस टूर्नामेंट में उन्होंने मैक्सिको के मार्को अल्वारेज वर्डे को भी हराया था, जिससे वह पेरिस ओलंपिक में भी भिड़ेंगे।
निशांत देव
- फोटो : PTI
चोट के बावजूद नहीं मानी हार
साल 2010 में निशांत के दाहिने कंधे में चोट लग गई थी। 10 साल की उम्र में सीढ़ियों से गिरने के कारण उनका कंधा उखड़ गया था। 2022 में उनकी पुरानी चोट फिर से उभर आई थी। छोटी उम्र में कंधे में रॉड लगने के कारण उनका बोन मैरो संक्रमित हो गया था। निशांत ने अपनी इस चोट के बारे में बात करते हुए एक इंटरव्यू में कहा था, "2021 में मैंने उस साल नेशनल्स में जीत हासिल की और वर्ल्ड चैंपियनशिप से भी लौटा, लेकिन 2022 में, जब मैं एशियाई चैंपियनशिप के लिए ट्रेनिंग कर रहा था, तो दर्द फिर से उभर आया.. मैं दिन में लगभग पांच से छह दर्द निवारक दवाएं ले रहा था, हर कुछ घंटों में गर्म सेंक दे रहा था, लेकिन कुछ भी नहीं बदला।"
2022 में निशांत की सर्जरी हुई और रिहैब में जाने की वजह से वह कॉमनवेल्थ गेम्स भी भाग नहीं ले पाए थे। जनवरी 2023 में उन्होंने राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपना खिताब बरकरार था। निशांत ने मई 2023 में ताशकंज में आईबीए पुरुष विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। मई 2024 में उन्होंने थाईलैंड के बैंकॉक में दूसरे मुक्केबाजी क्वालिफायर के दौरान चार मुकाबले जीते। जुलाई 2024 में उन्हें ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई करने में सहायता मिली और पेरिस ओलंपिक में अपने जगह पक्की करने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बने।
साल 2010 में निशांत के दाहिने कंधे में चोट लग गई थी। 10 साल की उम्र में सीढ़ियों से गिरने के कारण उनका कंधा उखड़ गया था। 2022 में उनकी पुरानी चोट फिर से उभर आई थी। छोटी उम्र में कंधे में रॉड लगने के कारण उनका बोन मैरो संक्रमित हो गया था। निशांत ने अपनी इस चोट के बारे में बात करते हुए एक इंटरव्यू में कहा था, "2021 में मैंने उस साल नेशनल्स में जीत हासिल की और वर्ल्ड चैंपियनशिप से भी लौटा, लेकिन 2022 में, जब मैं एशियाई चैंपियनशिप के लिए ट्रेनिंग कर रहा था, तो दर्द फिर से उभर आया.. मैं दिन में लगभग पांच से छह दर्द निवारक दवाएं ले रहा था, हर कुछ घंटों में गर्म सेंक दे रहा था, लेकिन कुछ भी नहीं बदला।"
2022 में निशांत की सर्जरी हुई और रिहैब में जाने की वजह से वह कॉमनवेल्थ गेम्स भी भाग नहीं ले पाए थे। जनवरी 2023 में उन्होंने राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपना खिताब बरकरार था। निशांत ने मई 2023 में ताशकंज में आईबीए पुरुष विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। मई 2024 में उन्होंने थाईलैंड के बैंकॉक में दूसरे मुक्केबाजी क्वालिफायर के दौरान चार मुकाबले जीते। जुलाई 2024 में उन्हें ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई करने में सहायता मिली और पेरिस ओलंपिक में अपने जगह पक्की करने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बने।